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Abhijeet Dipke NYT Interview: NYT कैमरे के सामने क्यों फूट-फूटकर रोए अभिजीत दीपके? बयां किया भारत वापसी का खौफ
Published
2 सप्ताह agoon

Abhijeet Dipke NYT Interview: केंद्र सरकार को शिक्षा मंत्री के इस्तीफे के लिए मजबूर करने वाली कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) के संस्थापक अभिजीत दीपके का एक बेहद भावुक वीडियो इस समय दुनिया भर में चर्चा का विषय बना हुआ है। प्रसिद्ध अमेरिकी अखबार ‘न्यू यॉर्क टाइम्स’ की एक विशेष डॉक्यूमेंट्री में साक्षात्कार देते समय अभिजीत दीपके अपने आंसुओं पर काबू नहीं रख सके और कैमरे के सामने ही बिलख-बिलख कर रो पड़े।
अमेरिका से भारत की अपनी यात्रा और उस दौरान मन में उमड़ रहे डर को याद करते हुए युवा नेता पूरी तरह टूट गए। सोशल मीडिया पर अब यह वीडियो तेजी से वायरल हो रहा है, जिसने राजनीतिक गलियारों में एक नई बहस को जन्म दे दिया है।
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Abhijeet Dipke NYT Interview: सोशल मीडिया से जंतर-मंतर तक की दास्तान
न्यू यॉर्क टाइम्स के आधिकारिक यूट्यूब चैनल पर जारी इस डॉक्यूमेंट्री में अभिजीत दीपके ने अपने इस पूरे सफर की शुरुआत के बारे में विस्तार से चर्चा की। उन्होंने बताया कि वे अमेरिका के बोस्टन शहर में अपनी पढ़ाई पूरी कर रहे थे। उसी दौरान उन्होंने मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत की एक टिप्पणी को पढ़ा और महज एक मजाक के रूप में ‘कॉकरोच जनता पार्टी’ नाम से सोशल मीडिया अकाउंट बना दिया।
किसे मालूम था कि यह डिजिटल कदम देश के सबसे बड़े जनांदोलन की नींव रख देगा। देखते ही देखते यह पेज लोगों के बीच प्रचंड रूप से लोकप्रिय हो गया और भारत आकर जंतर-मंतर पर एक महीने से अधिक समय तक ऐतिहासिक धरना देने का जरिया बना।
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हिमालय की चोटियां और जेल जाने का खौफ
साक्षात्कार के दौरान दीपके ने स्वीकार किया कि भारत लौटने के फैसले के साथ ही उनके मन में गिरफ्तारी और जेल जाने का गहरा डर समा गया था। उन्होंने बताया कि जब उनका हवाई जहाज भारत की सीमा में दाखिल हो रहा था और खिड़की से बर्फ से ढकी हिमालय की विशाल पर्वत श्रृंखलाएं दिखाई दे रही थीं, तब उनके मन में यह विचार आया कि शायद वे आखिरी बार आजाद फिजा में सांस ले रहे हैं। उन्हें सबसे ज्यादा फिक्र अपने परिवार की सुरक्षा और भविष्य की सता रही थी। इतना कहते ही अभिजीत अपने आंसू रोक नहीं पाए और रुमाल से आंखें पोंछते हुए खुद को संभालने की कोशिश करते नजर आए।
दीपके ने साझा किए अनुभव
अपने इस अभूतपूर्व सफर से मिले अनुभवों का जिक्र करते हुए सीजेपी प्रमुख ने दो महत्वपूर्ण बातें साझा कीं। उन्होंने कहा कि पहली बात यह है कि जीवन में सही वक्त और किस्मत का साथ होना बेहद जरूरी है, क्योंकि अमेरिका में बैठकर तुरंत प्रतिक्रिया देने के फैसले ने महज दो महीनों में 2.6 करोड़ से ज्यादा लोगों को उनके साथ जोड़ दिया। दूसरा सबक उन्होंने साहस का सीखा। जब उन्होंने भारत लौटने का फैसला किया तो उनकी मां फूट-फूटकर रोने लगी थीं। मां की चिंताओं के बावजूद उन्होंने जोखिम उठाने का फैसला किया, ताकि वे साबित कर सकें कि वे देश की सुरक्षा के लिए कोई खतरा नहीं हैं।
