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Avadh Ojha on Rahul Gandhi: ‘राहुल गांधी अच्छे नेता तो बन रहे हैं, लेकिन…’ अवध ओझा ने पकड़ी वो ‘नब्ज’, जो कांग्रेस को पहुंचा सकती है सत्ता तक!

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Avadh Ojha on Rahul Gandhi: भारतीय राजनीति के गलियारों में हलचल मचाने के लिए मशहूर और ‘आम आदमी पार्टी’ के पूर्व दिग्गज नेता अवध ओझा ने एक ऐसा बयान दिया है जिसने कांग्रेस खेमे से लेकर सोशल मीडिया तक आग लगा दी है। (Avadh Ojha on Rahul Gandhi) अपनी बेबाक राय और ऐतिहासिक उदाहरणों के लिए जाने जाने वाले ओझा ने इस बार सीधे तौर पर लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी पर निशाना साधा है। राहुल गांधी के बार-बार होने वाले विदेश दौरों और उनकी राजनीतिक सूझबूझ पर अवध ओझा ने जो विश्लेषण किया है, वह किसी कड़वी दवा से कम नहीं है। राजनीति से संन्यास ले चुके ओझा ने राहुल गांधी की ‘प्रोग्रेस रिपोर्ट’ कार्ड पेश करते हुए उन्हें दो ऐसी सलाह दी हैं, जो शायद उनके राजनीतिक करियर की दिशा बदल सकती हैं। आखिर अवध ओझा ने राहुल गांधी को ‘चंद्रगुप्त और अकबर’ से सीखने की सलाह क्यों दी? आइए जानते हैं इस तीखे और दिलचस्प विश्लेषण की पूरी कहानी।

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Avadh Ojha on Rahul Gandhi: राहुल गांधी के विदेश दौरे और ओझा का ‘गुरु’ मंत्र

राहुल गांधी जब-जब विदेश जाते हैं, देश की राजनीति में एक नया विवाद जन्म ले लेता है। बीजेपी हमेशा यह आरोप लगाती रही है कि राहुल गांधी महत्वपूर्ण मौकों पर देश छोड़कर चले जाते हैं। इसी मुद्दे पर जब न्यूज़ एजेंसी आईएएनएस ने अवध ओझा से बात की, तो उन्होंने बड़े ही दिलचस्प अंदाज में अपनी बात रखी। (Avadh Ojha on Rahul Gandhi) ओझा ने कहा कि उन्हें यह तो नहीं पता कि राहुल गांधी बार-बार विदेश क्यों जाते हैं, लेकिन एक राजनेता के रूप में उनमें काफी सुधार हुआ है। हालांकि, ओझा ने एक बड़ी कमी की ओर इशारा करते हुए कहा कि राहुल गांधी को इस वक्त एक ‘मजबूत राजनीतिक गुरु’ की सख्त जरूरत है। उनका मानना है कि जब तक राहुल गांधी के अंदर खुद की राजनीतिक समझ पैदा नहीं होगी, तब तक वे स्वतंत्र रूप से सही फैसले नहीं ले पाएंगे। ओझा का कहना है कि इसके लिए राजनीति विज्ञान की डिग्री की जरूरत नहीं, बल्कि जमीनी हकीकत और दांव-पेच समझने वाले चतुर दिमाग की जरूरत है।

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अवध ओझा सिर्फ आलोचना नहीं करते, बल्कि इतिहास के पन्नों से समाधान भी ढूंढ कर लाते हैं। उन्होंने राहुल गांधी को दूसरी बड़ी सलाह देते हुए कहा कि अगर उन्हें राजनीति के शिखर पर पहुँचना है, तो उन्हें भारत के महान शासकों जैसे चंद्रगुप्त मौर्य, समुद्रगुप्त, अलाउद्दीन खिलजी और सम्राट अकबर के जीवन का अध्ययन करना चाहिए। (Avadh Ojha on Rahul Gandhi) ओझा ने विशेष रूप से ‘नवरत्नों’ के कॉन्सेप्ट पर जोर दिया। उनका मानना है कि जैसे अकबर और चंद्रगुप्त के पास सलाहकारों की एक बेहद काबिल टीम थी, वैसे ही राहुल गांधी को भी अपने आस-पास ऐसे लोगों को रखना चाहिए जो उन्हें सही दिशा दिखा सकें। (Avadh Ojha on Rahul Gandhi) ओझा ने संकेत दिया कि अगर राहुल गांधी इन ऐतिहासिक मिसालों को अपनी रणनीति में शामिल करते हैं, तो वे राजनीति के मैदान में और भी ज्यादा सफल और प्रभावशाली साबित हो सकते हैं।

अमित शाह का हमला और राहुल की चुनौतियां

यह विवाद तब और गरमा गया जब हाल ही में संसद के भीतर गृह मंत्री अमित शाह ने राहुल गांधी पर तीखा प्रहार किया था। शाह ने तंज कसते हुए कहा था कि जब भी संसद में बोलने या जनता के मुद्दों पर चर्चा का मौका आता है, तो राहुल गांधी जर्मनी और इंग्लैंड की सैर पर निकल जाते हैं। (Avadh Ojha on Rahul Gandhi) राहुल गांधी अक्सर आरोप लगाते हैं कि उन्हें संसद में बोलने नहीं दिया जाता, जिसके जवाब में बीजेपी उनके विदेश दौरों को उनकी गैर-गंभीरता का प्रतीक बताती है। अवध ओझा का यह नया विश्लेषण ऐसे समय में आया है जब राहुल गांधी अपनी छवि को एक गंभीर नेता के रूप में स्थापित करने की कोशिश कर रहे हैं। अब देखना यह होगा कि क्या राहुल गांधी अवध ओझा की इस ‘ऐतिहासिक’ सलाह को गंभीरता से लेते हैं या उनकी विदेश यात्राएं और राजनीतिक शैली इसी तरह चर्चा का विषय बनी रहती हैं।

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