BJP internal reshuffle: भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के गलियारों में इस वक्त एक ऐसी खामोश बेचैनी पसरी है, जिसने पार्टी के कई बड़े सूरमाओं की धड़कनें तेज कर दी हैं। जैसे ही नितिन नवीन ने अध्यक्ष पद की कमान संभाली, संगठन के भीतर बदलाव की बयार बहने लगी है। यह सिर्फ एक पद की अदला-बदली नहीं है, बल्कि भाजपा के भविष्य की नई पटकथा लिखी जा रही है। खबर है कि अगले महीने के मध्य तक भाजपा की एक ऐसी ‘नई टीम’ सामने आने वाली है, जो संगठन का पूरा चेहरा ही बदल देगी। (BJP internal reshuffle) इस नई टीम में युवाओं और महिलाओं को मिलने वाली तरजीह ने उन पुराने नेताओं के माथे पर चिंता की लकीरें खींच दी हैं, जो दशकों से अपनी कुर्सियां जमाए बैठे हैं। क्या भाजपा अब ‘मार्गदर्शक मंडल’ की लिस्ट लंबी करने वाली है?
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BJP internal reshuffle: युवा जोश और उम्र का ‘डर’
नितिन नवीन के अध्यक्ष बनने के बाद सबसे ज्यादा चर्चा ‘युवा शक्ति’ की हो रही है। सूत्रों की मानें तो पार्टी का केंद्रीय नेतृत्व अब नई ऊर्जा के साथ मैदान में उतरना चाहता है। यही वजह है कि नई टीम के गठन में उपाध्यक्ष, महासचिव और सचिवों के पदों पर बड़े फेरबदल की तैयारी है। बताया जा रहा है कि लगभग आधे मौजूदा चेहरों की छुट्टी हो सकती है और उनकी जगह नए, युवा चेहरों को मौका दिया जाएगा। (BJP internal reshuffle) इस ‘क्लीनअप ड्राइव’ से उन नेताओं में सबसे ज्यादा डर है जिनकी उम्र अब उनके करियर के आड़े आने लगी है। पार्टी का मानना है कि युवा नेतृत्व ही आने वाले चुनावों में नई चुनौतियों का डटकर मुकाबला कर सकेगा, लेकिन इस बदलाव ने पुराने वफादारों के बीच ऊहापोह की स्थिति पैदा कर दी है।
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महिला आरक्षण का असर
भाजपा की इस नई टीम में एक और बड़ा बदलाव महिलाओं की संख्या को लेकर होने वाला है। चूंकि आने वाले समय में लोकसभा और विधानसभाओं में महिला आरक्षण लागू होना है, इसलिए भाजपा अपनी सांगठनिक टीम में भी ‘नारी शक्ति’ को फ्रंट सीट पर रखने की तैयारी में है। पार्टी के संविधान के मुताबिक पदाधिकारियों में एक-तिहाई पद महिलाओं के लिए होते हैं, और इस बार नितिन नवीन की टीम में महिलाओं की भागीदारी पिछली बार के मुकाबले कहीं ज्यादा होने वाली है। (BJP internal reshuffle) राज्यों में अच्छा काम कर रही महिला नेताओं को सीधे केंद्रीय टीम में जगह मिल सकती है, जिससे कई पुरुष दावेदारों के समीकरण बिगड़ते नजर आ रहे हैं।
प्रभारियों की नियुक्ति में अनुभव को तरजीह
जहां एक तरफ युवाओं को मौका देने की बात हो रही है, वहीं राज्यों के प्रभारी और सह-प्रभारियों की नियुक्ति में पार्टी कोई जोखिम नहीं लेना चाहती। (BJP internal reshuffle) सूत्रों का कहना है कि जरूरी नहीं कि केवल केंद्रीय पदाधिकारियों को ही राज्यों की कमान सौंपी जाए; राष्ट्रीय कार्यकारिणी के वरिष्ठ और अनुभवी सदस्यों को भी प्रभारी बनाया जा सकता है। चूंकि प्रभारियों का काम संगठन को जमीन पर मजबूत करना होता है, इसलिए यहां अनुभव को जोश से ज्यादा महत्व दिया जाएगा। इससे उन वरिष्ठ नेताओं को थोड़ी राहत मिली है जो प्रशासनिक और चुनावी रणनीतियों में माहिर माने जाते हैं।
अगले कुछ हफ्ते भाजपा की अंदरूनी राजनीति के लिए बेहद निर्णायक होने वाले हैं। जब नई टीम के नामों का ऐलान होगा, तभी साफ हो पाएगा कि नितिन नवीन की इस ‘नई भाजपा’ में पुराने दिग्गजों के लिए कितनी जगह बची है।