Shubhanshu Shukla: ग्रुप कैप्टन शुभांशु शुक्ला को अंतरराष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन (ISS) पर अपने ऐतिहासिक स्पेस मिशन के दौरान असाधारण साहस और सूझबूझ दिखाने के लिए भारत का सर्वोच्च शांतिकालीन वीरता पुरस्कार, अशोक चक्र, दिया जा सकता है। (Shubhanshu Shukla) मिशन के दौरान उन्होंने चुनौतीपूर्ण परिस्थितियों में जिम्मेदारियों का निर्वहन करते हुए भारत का नाम अंतरराष्ट्रीय मंच पर गौरवान्वित किया। उनकी असाधारण बहादुरी को देखते हुए उन्हें अशोक चक्र के लिए अनुशंसित किया गया है।
शुभांशु शुक्ला ने एक्सिओम-4 मिशन के तहत तीन अन्य यात्रियों के साथ अंतरराष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन (ISS) की यात्रा की थी। इस मिशन के लिए उन्होंने 25 जून 2025 को उड़ान भरी थी। वे विंग कमांडर राकेश शर्मा के बाद दूसरे भारतीय अंतरिक्ष यात्री हैं, जिन्होंने स्पेस की यात्रा की।
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Shubhanshu Shukla: मिशन के दौरान दिखाया असाधारण साहस
शुभांशु ने अंतरिक्ष में 20 दिन बिताए और इस दौरान 60 से अधिक प्रयोग किए। (Shubhanshu Shukla) इन प्रयोगों में जैवचिकित्सा विज्ञान, तंत्रिका विज्ञान, कृषि, अंतरिक्ष प्रौद्योगिकी और उन्नत सामग्री विज्ञान जैसे विविध क्षेत्रों के अध्ययन शामिल थे।
मिशन के दौरान, शुभांशु को ISS पर माइक्रोग्रैविटी, मानव शरीर विज्ञान और उन्नत सामग्री से संबंधित कई जटिल समस्याओं का सामना करना पड़ा। उन्होंने अंतरिक्ष यात्रा से जुड़ी गंभीर चुनौतियों और जोखिमों का सामना करते हुए पूरी मिशन अवधि में अडिग साहस का प्रदर्शन किया।
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मिशन की कठिनाइयों का किया सामना
अंतरिक्ष के प्रतिकूल वातावरण में उन्हें शारीरिक तनाव, विकिरण जोखिम, मांसपेशियों के नुकसान, बदली हुई शारीरिक क्रियाओं और मनोवैज्ञानिक दबाव जैसी कठिनाइयों का सामना करना पड़ा। (Shubhanshu Shukla) इसके बावजूद, उन्होंने मानसिक दृढ़ता और लचीलापन के साथ पूरे मिशन को सफलतापूर्वक पूरा किया। उनकी इस विशेष बहादुरी के कारण उन्हें अशोक चक्र के लिए नामित किया गया है।
शुभांशु शुक्ला की पृष्ठभूमि
शुभांशु शुक्ला लखनऊ, उत्तर प्रदेश के निवासी हैं। उन्होंने नेशनल डिफेंस एकेडमी (NDA) का एंट्रेंस परीक्षा उत्तीर्ण करने के बाद यहां से अपनी ग्रेजुएशन की डिग्री हासिल की। वे 2006 में भारतीय वायुसेना में शामिल हुए और 2019 में गगनयान मिशन के लिए अंतरिक्ष यात्री के तौर पर चयनित हुए।