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India-Uzbekistan Relations: ताशकंद में मोदी ‘मैजिक’! भारत के लिए लाइफलाइम यूरेनियम सप्लाई, न्यूक्लियर पावर प्लानिंग को बड़ा बूस्ट
Published
2 सप्ताह agoon

India-Uzbekistan Relations: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की उज्बेकिस्तान की दो दिवसीय यात्रा से नस सिर्फ भारत और उज्बेकिस्तान के रिश्तों को नई ऊंचाई मिलेगी, बल्कि ये यात्रा भारत के लिए यूरेनियम सप्लाई का रास्ता भी साफ करेगा, जिससे भारत की परमाणु उर्जा सप्लाई लंबे समय तक के लिए सुनिश्चित हो जाए।
दोनों देशों ने अपने संबंधों को ‘कॉम्प्रिहेंसिव स्ट्रैटेजिक पार्टनरशिप’ में बदलने पर सहमति जताई है। इसके साथ ही भारत के लिए लंबे समय तक यूरेनियम की आपूर्ति के लिए भी अहम समझौता हुआ है। (India-Uzbekistan Relations) यह फैसला भारत की बढ़ती परमाणु ऊर्जा जरूरतों के लिहाज से काफी महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
India-Uzbekistan Relations: यूरेनियम सप्लाई को लेकर बड़ा फैसला
ताशकंद में प्रधानमंत्री मोदी और उज्बेकिस्तान के राष्ट्रपति शावकत मिर्जियोयेव के बीच प्रतिनिधिमंडल स्तर की बातचीत हुई। (India-Uzbekistan Relations) इस दौरान दोनों नेताओं ने व्यापार, निवेश, डिजिटल कनेक्टिविटी, रक्षा और ऊर्जा समेत कई क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने पर चर्चा की। बैठक के बाद प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि दोनों देश यूरेनियम की सप्लाई के लिए एक लॉन्गटर्म सिस्टम भी स्थापित करेंगे।
भारत के लिए यह समझौता इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि देश अपनी परमाणु ऊर्जा क्षमता को बड़े स्तर पर बढ़ाने की तैयारी कर रहा है। (India-Uzbekistan Relations) परमाणु ऊर्जा संयंत्रों के लिए लगातार और भरोसेमंद परमाणु ईंधन की जरूरत होती है। ऐसे में लंबे समय के लिए यूरेनियम की सप्लाई सुनिश्चित होने से भारत की ऊर्जा रणनीति को मजबूती मिल सकती है।
उज्बेकिस्तान है बड़ा यूरेनियम उत्पादक
उज्बेकिस्तान दुनिया के महत्वपूर्ण यूरेनियम उत्पादक देशों में शामिल है। वहां पिछले कुछ सालों में यूरेनियम उद्योग को विस्तार देने के साथ-साथ कच्चे माल के निर्यात से आगे बढ़कर अधिक मूल्य वाली गतिविधियों पर भी जोर दिया जा रहा है।
भारत पहले से ही उज्बेकिस्तान से यूरेनियम खरीदने की दिशा में काम कर चुका है। दोनों देशों ने 2019 में यूरेनियम अयस्क कंसंट्रेट की आपूर्ति के लिए लॉन्गटर्म कॉन्ट्रैक्ट किया था। अब नई लॉन्गटर्म सिस्टम दोनों देशों के परमाणु ऊर्जा सहयोग को और मजबूत कर सकती है।
रिश्ते अब ‘कॉम्प्रिहेंसिव स्ट्रैटेजिक पार्टनरशिप’ तक पहुंचे
मोदी और मिर्जियोयेव की बैठक में भारत-उज्बेकिस्तान संबंधों को ‘कॉम्प्रिहेंसिव स्ट्रैटेजिक पार्टनरशिप’ का दर्जा देने पर सहमति बनी। इसका मतलब है कि दोनों देश अब केवल सीमित क्षेत्रों में ही नहीं, बल्कि रणनीतिक, आर्थिक, तकनीकी और ऊर्जा जैसे कई महत्वपूर्ण क्षेत्रों में लंबे समय के सहयोग पर काम करेंगे।
प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि दोनों देशों को व्यापार और निवेश के साथ डिजिटल कनेक्टिविटी, रक्षा और ऊर्जा के क्षेत्र में सहयोग को और आगे बढ़ाना चाहिए। दोनों नेताओं ने भारत के ‘विकसित भारत’ और उज्बेकिस्तान के ‘न्यू उज्बेकिस्तान’ जैसे विकास लक्ष्यों के बीच सहयोग की संभावनाओं पर भी चर्चा की।
तीन सिस्टर सिटी और सिस्टर स्टेट बनाने पर सहमति
भारत और उज्बेकिस्तान ने आपसी संबंधों को जमीनी स्तर तक मजबूत करने के लिए तीन ‘सिस्टर सिटी’ और ‘सिस्टर स्टेट’ व्यवस्था स्थापित करने पर भी सहमति जताई। (India-Uzbekistan Relations) प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि इन व्यवस्थाओं की पूरी क्षमता का इस्तेमाल करने के लिए एक रोडमैप तैयार किया जाना चाहिए। इससे दोनों देशों के स्थानीय प्रशासन, संस्थानों और शहरों के बीच सीधे सहयोग को बढ़ावा मिल सकता है।
न्यू ताशकंद और GIFT City के बीच सहयोग की संभावना
प्रधानमंत्री मोदी ने उज्बेकिस्तान के ‘न्यू ताशकंद’ प्रोजेक्ट और भारत की गुजरात स्थित ‘GIFT City’ का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि उज्बेकिस्तान में न्यू ताशकंद जैसे बड़े शहरी विकास प्रोजेक्ट पर काम चल रहा है, वहीं भारत ने गुजरात में GIFT City को विकसित किया है। India-Uzbekistan Relationsमोदी ने कहा कि भारत उज्बेकिस्तान के एक प्रतिनिधिमंडल का स्वागत करके GIFT City के विकास और उसमें तकनीक के इस्तेमाल से जुड़े अनुभव साझा करने के लिए तैयार है। इससे शहरी नियोजन, तकनीक और आधुनिक बुनियादी ढांचे के क्षेत्र में दोनों देशों के बीच सहयोग बढ़ने की संभावना है।
सेंट्रल एशिया में भारत की बढ़ती सक्रियता
प्रधानमंत्री मोदी की यह उज्बेकिस्तान की चौथी यात्रा है। ऐसे समय में जब भारत मध्य एशियाई देशों के साथ अपने आर्थिक और रणनीतिक संबंधों को लगातार मजबूत कर रहा है, उज्बेकिस्तान के साथ साझेदारी को व्यापक रणनीतिक स्तर पर ले जाना महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
