LPG Action Plan 2026: दुनिया इस वक्त बारूद के ढेर पर बैठी है और मिडिल ईस्ट में छिड़ी जंग की सबसे भीषण तपिश अब सीधे आपकी रसोई तक पहुंच गई है। अगर आप भी घर में रखे एलपीजी सिलेंडर के खत्म होने से डरे हुए हैं, तो आपकी चिंता जायज है। ईरान, इजरायल और अमेरिका के बीच चल रहे खूनी संघर्ष ने भारत की ऊर्जा सुरक्षा पर ऐसा प्रहार किया है कि देश भर में सिलेंडर की बुकिंग के लिए लंबी कतारें और किल्लत देखने को मिल रही है। (LPG Action Plan 2026) सप्लाई का सबसे महत्वपूर्ण रास्ता ‘होर्मुज स्ट्रेट’ लगभग ठप पड़ चुका है, जिससे गैस और तेल के जहाजों के पहिये थम गए हैं। लेकिन घबराने की जरूरत नहीं है, क्योंकि मोदी सरकार ने इस महासंकट से निपटने के लिए एक ऐसा प्लान तैयार किया है जो न केवल आपकी रसोई को जलता रखेगा, बल्कि जमाखोरों की कमर भी तोड़ देगा।
LPG Action Plan 2026: होर्मुज का रास्ता बंद और भारतीय किचन में मची खलबली
भारत अपनी जरूरत का लगभग 55 प्रतिशत एलपीजी और 30 प्रतिशत एलएनजी खाड़ी देशों जैसे सऊदी अरब, कतर और यूएई से मंगवाता है। ये सारा माल होर्मुज के रास्ते ही भारत पहुंचता है, जिसे दुनिया के तेल का ‘गला’ कहा जाता है। (LPG Action Plan 2026) युद्ध की वजह से इस रास्ते पर जहाजों की आवाजाही रुकने से सप्लाई चेन पूरी तरह ध्वस्त हो गई है। इसी का नतीजा है कि आज बुकिंग करने के बावजूद लोगों को सिलेंडरों के लिए हफ़्तों इंतजार करना पड़ रहा है। इस कमी ने न केवल आम आदमी को परेशान किया है, बल्कि होटल और रेस्तरां कारोबार पर भी बड़ा संकट खड़ा कर दिया है। विपक्ष इस मुद्दे पर सरकार को घेर रहा है, लेकिन पेट्रोलियम मंत्रालय ने साफ कर दिया है कि घरेलू उपभोक्ताओं की जरूरतें उसकी सर्वोच्च प्राथमिकता रहेंगी।
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बुकिंग के नियम बदले और रिफाइनरियों को मिला इमरजेंसी आदेश
संकट को देखते हुए सरकार ने जमाखोरी और पैनिक बुकिंग को रोकने के लिए एक बड़ा फैसला लिया है। अब गैस सिलेंडर की बुकिंग के बीच का अंतर 21 दिन से बढ़ाकर 25 दिन कर दिया गया है ताकि कोई भी जरूरत से ज्यादा स्टॉक जमा न कर सके। (LPG Action Plan 2026) इसके साथ ही देश की सभी सरकारी और निजी रिफाइनरियों को आदेश दिया गया है कि वे एलपीजी का उत्पादन अधिकतम स्तर पर ले जाएं। सरकार ने साफ किया है कि अतिरिक्त उत्पादित गैस केवल सरकारी कंपनियों जैसे आईओसी, बीपीसीएल और एचपीसीएल को ही दी जाएगी ताकि सप्लाई में कोई बाधा न आए। कमर्शियल सिलेंडर की कमी को दूर करने के लिए भी एक हाई-लेवल कमेटी बनाई गई है जो 19 किलो वाले नीले सिलेंडरों की उपलब्धता सुनिश्चित करेगी।
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रूस और अमेरिका बने संकटमोचक और बदला आयात का रूट
भारत ने इस युद्ध के बीच अपनी रणनीति को पूरी तरह बदल लिया है। अब हम केवल मिडिल ईस्ट के भरोसे नहीं हैं। भारत ने अब अपना 70 प्रतिशत तेल और गैस उन वैकल्पिक मार्गों से मंगाना शुरू कर दिया है जो युद्ध क्षेत्र से दूर हैं। (LPG Action Plan 2026) इस संकट में रूस भारत का सबसे बड़ा मददगार बनकर उभरा है और मार्च के शुरुआती दिनों में ही रूस से तेल की खरीद 50 प्रतिशत तक बढ़ गई है। इसके अलावा भारत ने पहली बार लैटिन अमेरिकी देश गुयाना से 40 लाख बैरल तेल खरीदा है। (LPG Action Plan 2026) अमेरिका से एलएनजी के बड़े सौदे किए गए हैं और अफ्रीका के नाइजीरिया और अंगोला जैसे देशों से भी अतिरिक्त खेप मंगाई जा रही है। यह मोदी सरकार की कूटनीति ही है कि युद्ध के बावजूद भारत ने अपने लिए नए रास्ते खोल लिए हैं।