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mohan bhagwat: ‘स्वार्थ और वर्चस्व की आग में जल रही दुनिया’, मोहन भागवत की चेतावनी- सिर्फ धर्म और भारत ही है आखिरी रास्ता

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mohan bhagwat: संघ प्रमुख मोहन भागवत ने शुक्रवार को कहा कि दुनिया में संघर्षों की मुख्य वजह स्वार्थ और वर्चस्व की भावना है। उन्होंने जोर देते हुए कहा कि स्थायी शांति केवल एकता, अनुशासन और धर्म के पालन से ही संभव है। (mohan bhagwat) नागपुर में आयोजित एक कार्यक्रम में संबोधित करते हुए उन्होंने कहा कि पिछले करीब 2000 वर्षों में दुनिया ने संघर्षों के समाधान के लिए कई विचारों पर प्रयोग किए, लेकिन अपेक्षित सफलता नहीं मिल सकी।

राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) प्रमुख ने यह बातें विश्व हिंदू परिषद के कार्यालय की आधारशिला रखने के बाद सभा को संबोधित करते हुए कहीं। उन्होंने कहा कि आज भी दुनिया में धार्मिक असहिष्णुता, जबरन धर्मांतरण और ऊंच-नीच की भावना जैसी समस्याएं मौजूद हैं। (mohan bhagwat) उन्होंने कहा, “विश्व आज अस्थिर स्थिति में है। युद्धों के पीछे असली कारण स्वार्थ और वर्चस्व की लड़ाई है, जिसकी जड़ में स्वार्थ की प्रवृत्ति ही है।”

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भागवत ने भारत की भूमिका पर प्रकाश डालते हुए कहा कि भारत मानवता और समरसता में विश्वास रखता है, जबकि कई देश अस्तित्व की लड़ाई और ‘योग्यतम की उत्तरजीविता’ की सोच पर चलते हैं। उन्होंने कहा, “दुनिया को संघर्ष नहीं, बल्कि सद्भाव की आवश्यकता है। (mohan bhagwat) आज वैश्विक स्तर पर यह आवाज उठ रही है कि भारत ही शांति स्थापित करने में अहम भूमिका निभा सकता है, क्योंकि विश्व भारत की प्रकृति और दृष्टिकोण को समझता है।”

उन्होंने आगे कहा कि भारत का प्राचीन ज्ञान यह सिखाता है कि सभी प्राणी आपस में जुड़े हुए हैं और एक हैं। भागवत के अनुसार, आधुनिक विज्ञान भी धीरे-धीरे इसी सोच की पुष्टि कर रहा है।

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आचरण के महत्व पर जोर देते हुए उन्होंने कहा कि धर्म केवल ग्रंथों तक सीमित नहीं रहना चाहिए, बल्कि वह लोगों के व्यवहार में भी दिखाई देना चाहिए। उनके अनुसार, जब तक समाज में धर्म का पालन व्यवहारिक रूप में नहीं होगा, तब तक सच्ची शांति स्थापित नहीं हो सकती।

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