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Murshidabad SIR Controversy: सुलग उठा मुर्शिदाबाद! इस एक ‘चिंगारी’ ने हिला दी पूरे बंगाल की राजनीति, कटघरे में ममता सरकार, SIR रोकने की थी साजिश?

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Murshidabad SIR Controversy: पश्चिम बंगाल के मुर्शिदाबाद जिले में स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) प्रक्रिया को लेकर हालात तेज़ी से बेहद तनावपूर्ण स्थिति में पहुंचते जा रहे हैं। मतदाता सूची के सत्यापन से संबंधित इस प्रक्रिया के बीच एक व्यक्ति की मौत, अफवाहों के बाद हिंसा, रेलवे फाटक तोड़े जाने और सरकारी संपत्ति को नुकसान पहुंचाए जाने की घटनाओं ने ममता बनर्जी सरकार की कानून-व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।

Murshidabad SIR Controversy: क्या था मामला ?

ये पूरा मामला उस वक्त तूल पकड़ा, जब मुर्शिदाबाद निवासी अक्षत अली मंडल को SIR के अंतर्गत दस्तावेज़ सत्यापन का नोटिस मिला। (Murshidabad SIR Controversy) परिवार का दावा है कि नोटिस मिलने के बाद वह मानसिक तनाव में आ गए और इसी सदमे के कारण उनकी मौत हो गई। हालांकि, प्रशासन और पुलिस इस दावे की जांच में जुटी है, लेकिन इस घटना को आधार बनाकर इलाके में विरोध प्रदर्शन शुरू किया गया।

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रेलवे संपत्ति को बनाया निशाना

जानकारी के मुताबिक, विरोध प्रदर्शन जल्द ही हिंसक हो गया। प्रदर्शनकारियों ने रेलवे फाटक तोड़ दिए, ट्रैक के आसपास हंगामा किया और सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान पहुंचाया। (Murshidabad SIR Controversy) रेलवे प्रशासन के अनुसार, इस दौरान रेल परिचालन भी प्रभावित हुआ और यात्रियों को काफी परेशानियों का सामना करना पड़ा। सवाल यह उठ रहा है कि जब SIR जैसी संवैधानिक प्रक्रिया पूरे देश में चल रही है, तो केवल बंगाल में ही हालात क्यों बेकाबू हो रहे हैं?

अफवाहों ने बढ़ाया तनाव

जानकारी के अनुसार, SIR को लेकर बड़े पैमाने पर अफवाहें फैलाई गईं कि जिन लोगों के दस्तावेज पूरे नहीं होंगे, उन्हें डिटेंशन सेंटर भेज दिया जाएगा। (Murshidabad SIR Controversy) इसी खौफ के कारण हालात और भी विस्फोटक हो गए। कई इलाकों में लोग अपने घर छोड़कर चले गए, जिससे मजदूरों और घरेलू कामगारों की भारी कमी तक देखने को मिली।

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इसे लेकर राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि यह डर जानबूझकर फैलाया गया ताकि SIR प्रक्रिया को रोका जा सके। उल्लेखनीय है कि SIR का उद्देश्य मतदाता सूची से फर्जी और अवैध नामों को हटाना है, जिसे विपक्षी दल ‘वोटबंदी’ जैसा कदम बताकर विरोध कर रहे हैं।

पहले भी खड़े हो चुके हैं सवाल

बता दे, मुर्शिदाबाद से जुड़ा यह पहला मामला नहीं है। इससे पहले भी एक बूथ लेवल ऑफिसर (BLO) की आत्महत्या को लेकर SIR पर आरोप लगाए गए थे। (Murshidabad SIR Controversy) बाद में पुलिस जांच में सामने आया कि मामला व्यक्तिगत लेन-देन और कर्ज से जुड़ा था, न कि SIR के काम के दबाव से। इसके बावजूद राजनीतिक बयानबाजी थमी नहीं और सरकार पर प्रशासनिक असफलता के आरोप लगते रहे।

विपक्षी दलों और राष्ट्रवादी संगठनों ने ममता बनर्जी सरकार पर आरोप लगाया है कि वह SIR जैसी संवैधानिक प्रक्रिया में बड़ी रुकावट पैदा करने के लिए हिंसा को अनदेखा कर रही है। उनका कहना है कि रेलवे और सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान पहुंचाना सीधे तौर पर कानून-व्यवस्था की नाकामी को दर्शाता है। (Murshidabad SIR Controversy) इसके साथ ही यह भी सवाल उठाया जा रहा है कि जब तमिलनाडु, पंजाब और अन्य राज्यों में SIR शांतिपूर्ण तरीके से चल रहा है, तो बंगाल में ही बार-बार हिंसा क्यों होती है? क्या इसके पीछे राजनीतिक संरक्षण है?

कानून-व्यवस्था पर बड़ा सवाल

विशेषज्ञों का मानना है कि अगर वक़्त रहते कड़ी कार्रवाई नहीं की गई, तो कुछ ही दिनों में हालात और भी बिगड़ सकते हैं। रेलवे संपत्ति को नुकसान पहुंचाना सिर्फ विरोध नहीं, बल्कि एक गंभीर अपराध है। ऐसे में राज्य सरकार की जिम्मेदारी बनती है कि वह अफवाहों पर रोक लगाए, दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई करे और आम नागरिकों में विश्वास बहाल करे।

बता दे, मुर्शिदाबाद की यह घटना अब केवल एक स्थानीय मामला नहीं रही, बल्कि यह SIR, फर्जी मतदाताओं, कानून-व्यवस्था और राज्य सरकार की भूमिका पर राष्ट्रीय बहस का विषय बन चुकी है। अब आगामी दिनों में यह देखना बेहद महत्वपूर्ण होगा कि प्रशासन इस पर क्या कदम उठाता है और क्या बंगाल में हालात दोबारा सामान्य हो पाते हैं या नहीं।

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