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Naravane Book Controversy: भारत चीन डोकलाम विवाद…कौन हैं पूर्व सेना प्रमुख नरवणे, जिनकी किताब बनी मोदी सरकार की बड़ी टेंशन!

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Naravane Book Controversy: लोकसभा में उस समय भारी हंगामा खड़ा हो गया जब नेता विपक्ष राहुल गांधी ने पूर्व थल सेना प्रमुख जनरल एम.एम. नरवणे की अभी तक अप्रकाशित आत्मकथा के कुछ अंश पढ़ने शुरू किए। सत्ता पक्ष ने तुरंत आपत्ति जताई और स्पीकर ने इसे नियमों के खिलाफ बताते हुए अनुमति देने से इनकार कर दिया। इसके बाद सदन में शोरगुल इतना बढ़ा कि कार्यवाही रोकनी पड़ी। इस घटनाक्रम के बाद जनरल नरवणे की किताब और उसके अब तक प्रकाशित न होने के कारण चर्चा के केंद्र में आ गए।

Naravane Book Controversy: कौन हैं जनरल एम.एम. नरवणे

जनरल मनोज मुकुंद नरवणे भारतीय थलसेना के 27वें प्रमुख रहे। उन्होंने 31 दिसंबर 2019 से 30 अप्रैल 2022 तक सेना की कमान संभाली। उनके कार्यकाल के दौरान ही वर्ष 2020 में गलवान घाटी संघर्ष हुआ। (Naravane Book Controversy) इसके अलावा वे पूर्वी लद्दाख, डोकलाम और अन्य अहम सैन्य अभियानों में निर्णायक भूमिका निभा चुके हैं।

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शानदार सैन्य सेवा और सरकार की सराहना

चार दशकों से अधिक की सेवा के बाद सेवानिवृत्त हुए जनरल नरवणे को सरकार ने उनके योगदान के लिए सराहा था। (Naravane Book Controversy) कोविड-19 महामारी के दौरान सैनिकों के स्वास्थ्य, पूर्वी लद्दाख में चीन को सख्त जवाब और सेना में आत्मनिर्भरता बढ़ाने के उनके प्रयासों को खास तौर पर याद किया गया। उन्होंने अग्रिम मोर्चों का लगातार दौरा किया और सैनिकों के लिए बुनियादी सुविधाओं को मजबूत किया।

‘फोर स्टार्स ऑफ डेस्टिनी’ और प्रकाशन में अड़चन

जनरल नरवणे की आत्मकथा का नाम ‘फोर स्टार्स ऑफ डेस्टिनी’ है, जिसके प्रकाशक पेंग्विन रेंडम हाउस हैं। यह किताब 2023-24 में प्रकाशित होनी थी। हालांकि दिसंबर 2023 में इसके कुछ अंश मीडिया में आने के बाद पूरी प्रकाशन प्रक्रिया रोक दी गई।

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किताब में क्या है विवादास्पद

किताब में गलवान, डेपसांग और पेंगोंग झील से जुड़े संवेदनशील घटनाक्रमों का जिक्र है। इसमें दावा किया गया है कि गलवान संकट के दौरान चीनी टैंक सामने आने के बावजूद राजनीतिक स्तर से फायर खोलने की अनुमति नहीं मिली। (Naravane Book Controversy) इसके अलावा अग्निपथ योजना को लेकर भी कहा गया है कि मूल प्रस्ताव को PMO स्तर पर पूरी तरह बदल दिया गया। चीन संकट पर सरकार के नैरेटिव पर भी सवाल उठाए गए हैं।

क्यों नहीं मिली अब तक मंजूरी

इन संवेदनशील खुलासों के चलते रक्षा मंत्रालय और सेना मुख्यालय ने किताब की प्री-पब्लिकेशन समीक्षा कराई है। अब तक इसे अंतिम मंजूरी नहीं मिली है। (Naravane Book Controversy) अक्टूबर 2025 में जनरल नरवणे ने खुद कहा था कि उनका काम किताब लिखना था, अब फैसला रक्षा मंत्रालय और प्रकाशक के हाथ में है।

एक विशिष्ट सैन्य करियर

एनडीए और आईएमए से प्रशिक्षित जनरल नरवणे ने सिख लाइट इन्फैंट्री में कमीशन प्राप्त किया। उन्होंने पूर्वोत्तर, जम्मू-कश्मीर, श्रीलंका और पश्चिमी मोर्चे पर अहम कमान संभाली। सेना प्रमुख बनने से पहले वे उप सेना प्रमुख, पूर्वी कमान और सेना प्रशिक्षण कमान के प्रमुख भी रहे।

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