s jaishankar: संसद के बजट सत्र का दूसरा चरण आज से शुरू हो गया है, लेकिन सदन की कार्यवाही शुरू होते ही पश्चिम एशिया (मिडिल-ईस्ट) के बिगड़ते हालातों पर गहरी चिंता जताई गई। विपक्षी सांसदों की नारेबाजी के बीच विदेश मंत्री डॉ. एस. जयशंकर ने राज्यसभा में भारत सरकार का पक्ष रखा। उन्होंने स्पष्ट किया कि खाड़ी देशों में जारी युद्ध न केवल क्षेत्रीय शांति के लिए खतरा है, बल्कि भारत की ऊर्जा सुरक्षा और वहां रह रहे एक करोड़ भारतीयों के लिए भी गंभीर चुनौती है।
s jaishankar: ईरान में फंसे भारतीयों के लिए हाई अलर्ट
विदेश मंत्री ने सदन को जानकारी दी कि तेहरान स्थित भारतीय दूतावास पूरी तरह सक्रिय और हाई अलर्ट पर है। डॉ. जयशंकर ने बताया कि ईरान में पढ़ रहे भारतीय छात्रों को सुरक्षित स्थानों पर स्थानांतरित किया जा रहा है। व्यापारिक सिलसिले में गए नागरिकों को आर्मेनिया के रास्ते भारत वापस लाने में मदद की जा रही है। (s jaishankar) उन्होंने कहा, “हम इस संकट की घड़ी में अपने नागरिकों की सुरक्षा के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध हैं और दूतावास लगातार उनके संपर्क में है।”
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पीएम मोदी की सीधी नजर
डॉ. एस. जयशंकर ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी खुद इस पूरे घटनाक्रम की पल-पल की निगरानी कर रहे हैं। भारत के लिए यह युद्ध इसलिए भी चिंताजनक है क्योंकि खाड़ी देश भारत की ऊर्जा सुरक्षा (तेल और गैस आपूर्ति) के मुख्य स्रोत हैं। (s jaishankar) युद्ध के कारण ग्लोबल सप्लाई चेन में व्यवधान आने की आशंका है, जिसका सीधा असर भारतीय अर्थव्यवस्था पर पड़ सकता है। सरकार के विभिन्न मंत्रालय मिलकर स्थिति का आकलन कर रहे हैं ताकि किसी भी आपात स्थिति से निपटा जा सके।
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संवाद और कूटनीति ही एकमात्र रास्ता
ईरान के विदेश मंत्री से हुई बातचीत का हवाला देते हुए जयशंकर ने कहा कि मौजूदा परिस्थितियों में शीर्ष नेतृत्व से संपर्क करना कठिन है, फिर भी भारत शांति का पक्षधर है। उन्होंने जोर देकर कहा, “भारत हमेशा से संवाद और कूटनीति के जरिए समाधान का समर्थक रहा है। हम सभी पक्षों से तनाव कम करने और संयम बरतने की अपील करते हैं।” भारत सरकार ने स्पष्ट किया कि युद्ध का विस्तार अन्य देशों में होना पूरी दुनिया के लिए विनाशकारी साबित हो सकता है।
ईरान ने भारत को कहा धन्यवाद
विदेश मंत्री S. Jaishankar ने बताया कि ईरान के विदेश मंत्री ने भारत का आभार जताया है। उन्होंने कहा कि भारत ने मानवीय आधार पर ईरानी युद्धपोत लावन को कोच्चि बंदरगाह पर डॉक करने की अनुमति दी। इस फैसले के लिए ईरान की ओर से भारत को धन्यवाद दिया गया है।
67 हजार भारतीय लौटे वापस
विदेश मंत्री ने यह भी जानकारी दी कि अब तक करीब 67,000 भारतीय नागरिक अंतरराष्ट्रीय सीमा पार कर अपने देश लौट चुके हैं।
पश्चिम एशिया से लोगों को लाने की कोशिश जारी
उन्होंने कहा कि पश्चिम एशिया में फंसे भारतीयों को सुरक्षित वापस लाने के लिए सरकार लगातार प्रयास कर रही है और इसके लिए हर संभव कदम उठाए जा रहे हैं।