Saudi Arabia Economy: जिस सऊदी अरब को दुनिया तेल की दौलत का पर्याय मानती है, वही देश आज पैसों के लिए अपने सबसे अमीर नागरिकों की ओर देख रहा है। चमकदार मेगा प्रोजेक्ट्स, अरबों डॉलर के निवेश और विज़न 2030 के बड़े सपनों के बीच अब सऊदी सरकार अपने रईस परिवारों से कह रही है। आगे आइए, निवेश कीजिए, वरना विकास की रफ्तार थम सकती है।
Saudi Arabia Economy: तेल की कीमत ने बिगाड़ा गणित
असल कहानी तेल की कीमत से शुरू होती है। रिपोर्ट्स के मुताबिक सऊदी अरब को अपना बजट संतुलन में रखने के लिए तेल की कीमत लगभग 100 डॉलर प्रति बैरल चाहिए, जबकि वैश्विक बाजार में कीमतें 60 डॉलर के आसपास बनी हुई हैं। (Saudi Arabia Economy) इसका सीधा असर सरकारी राजस्व पर पड़ा है और खर्चों को पूरा करना चुनौती बनता जा रहा है।
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मेगा प्रोजेक्ट्स: सपने बड़े, खर्च उससे भी बड़ा
क्राउन प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान ने सऊदी अरब को बदलने के लिए नियोम सिटी, 170 किलोमीटर लंबी द लाइन, रेगिस्तान में स्की रिज़ॉर्ट और रियाद की विशाल मुकाब इमारत जैसे भव्य प्रोजेक्ट्स पेश किए थे। (Saudi Arabia Economy) लेकिन अब हकीकत सामने है। कई योजनाओं की रफ्तार धीमी कर दी गई है, तो कुछ का आकार छोटा किया जा रहा है। सरकार समझ चुकी है कि हर सपना एक साथ पूरा करना संभव नहीं।
अब अमीरों से निवेश की अपील
रिपोर्ट के मुताबिक सऊदी पब्लिक इन्वेस्टमेंट फंड और निवेश मंत्रालय ने देश के सबसे अमीर परिवारों को साफ संदेश दिया है—देश के भीतर निवेश करें, विदेशी निवेशकों के साथ साझेदारी करें और सरकार पर पड़ रहे आर्थिक दबाव को कम करें। संकेत साफ है कि अब सरकार अकेले यह बोझ नहीं उठा सकती।
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घटते राजस्व की भरपाई के लिए सऊदी अरब अंतरराष्ट्रीय बाजार से कर्ज़ भी उठा रहा है। (Saudi Arabia Economy) बॉन्ड जारी किए जा रहे हैं और विदेशी निवेशकों से धन जुटाया जा रहा है। हालांकि फिलहाल कर्ज़ का स्तर नियंत्रित है, लेकिन खर्च की तेज़ रफ्तार भविष्य को लेकर सवाल खड़े कर रही है।
तेल के बाद की तैयारी
सरकार जानती है कि तेल हमेशा सहारा नहीं बनेगा। इसलिए आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, डेटा सेंटर्स, टूरिज़्म और माइनिंग जैसे सेक्टर्स पर जोर दिया जा रहा है। (Saudi Arabia Economy) विदेशियों को प्रॉपर्टी खरीदने की अनुमति भी इसी रणनीति का हिस्सा है।
क्या सऊदी कंगाल हो रहा है?
जवाब है नहीं। (Saudi Arabia Economy) सऊदी अरब आज भी अमीर है, लेकिन यह साफ हो चुका है कि पैसा असीम नहीं है। अब खर्च सोच-समझकर करना पड़ रहा है और अपने ही रईस नागरिकों से मदद मांगनी पड़ रही है। यही सऊदी अरब की बदलती आर्थिक हकीकत है।