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Sheikh Hasina Bangladesh Comeback: शेख हसीना की ‘पावरफुल’ वापसी! बांग्लादेश चुनाव से पहले मिले 4 संकेत, हिल जाएगी यूनुस सरकार की नींव

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Sheikh Hasina Bangladesh Comeback: बांग्लादेश में जारी राजनीतिक अस्थिरता और हिंसा के बीच पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना और उनकी पार्टी आवामी लीग की वापसी को लेकर चर्चाएं तेज हो गई हैं। अगस्त 2024 में तख्तापलट के बाद शेख हसीना को सत्ता से बेदखल कर दिया गया था और उनकी पार्टी आवामी लीग पर प्रतिबंध लगा दिया गया था।

हालांकि, हाल के घटनाक्रम यह संकेत दे रहे हैं कि बांग्लादेश की राजनीति में एक बार फिर बड़ा बदलाव संभव है और आवामी लीग को आगामी चुनावों में हिस्सा लेने की अनुमति मिल सकती है। (Sheikh Hasina Bangladesh Comeback) इस पूरे घटनाक्रम की पटकथा ढाका में ही लिखी जा रही है। बांग्लादेश की सबसे पुरानी और प्रभावशाली राजनीतिक पार्टियों में शामिल आवामी लीग करीब 23 वर्षों तक सत्ता में रही है। देश में आज भी पार्टी का मजबूत जनाधार मौजूद है। मौजूदा हालात में शेख हसीना की वापसी की चर्चा चार प्रमुख वजहों से जोर पकड़ रही है।

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पहली वजह है हालिया हिंसा, जिसने कट्टरपंथी नेताओं को भी चिंता में डाल दिया है। चुनाव की घोषणा के तुरंत बाद इकबाल मंच के नेता उस्मान हादी की हत्या ने पूरे देश को झकझोर दिया। हादी को शेख हसीना का कट्टर विरोधी माना जाता था। (Sheikh Hasina Bangladesh Comeback) उनकी हत्या के बाद भड़की हिंसा से सरकार की स्थिति कमजोर हुई है। जमात-ए-इस्लामी के अमीर, एनसीपी के प्रमुख और बीएनपी के वरिष्ठ नेताओं तक को टारगेट किलिंग का डर सताने लगा है। कई नेताओं ने सुरक्षा की मांग की है और सरकार ने चुनाव लड़ने वाले उम्मीदवारों को हथियार लाइसेंस देने का फैसला किया है। इस बदले माहौल में शेख हसीना के कट्टर विरोधी एनसीपी प्रमुख नाहिद इस्लाम तक ने कहा है कि यदि आवामी लीग को चुनाव लड़ने दिया जाता है तो उन्हें आपत्ति नहीं होगी, बशर्ते शेख हसीना खुद चुनाव में न उतरें। बीएनपी ने भी आवामी लीग की भागीदारी पर आपत्ति नहीं जताई है।

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दूसरी अहम वजह न्यायपालिका में आया बदलाव है। अब तक शेख हसीना के खिलाफ मामलों में अंतरिम सरकार को न्यायपालिका का समर्थन मिलता रहा था, लेकिन हालिया नियुक्तियों से रुख बदलता नजर आ रहा है। (Sheikh Hasina Bangladesh Comeback) शेख हसीना के करीबी माने जाने वाले जुबैर रहमान को नया चीफ जस्टिस बनाए जाने के बाद अदालतों का रुख संतुलित हुआ है। हाल ही में एक सुनवाई के दौरान जज ने सरकार के वकील को फटकार लगाते हुए स्पष्ट किया कि बिना पूरी सुनवाई के कोई फैसला नहीं सुनाया जाएगा। (Sheikh Hasina Bangladesh Comeback) तीसरी वजह अंतरराष्ट्रीय दबाव है। अमेरिका, चीन, रूस और भारत जैसे प्रभावशाली देशों ने बांग्लादेश में शांतिपूर्ण और समावेशी चुनाव कराने की अपील की है। वैश्विक समुदाय का मानना है कि आवामी लीग को बाहर रखकर निष्पक्ष चुनाव संभव नहीं है।

चौथी और अहम वजह यह है कि शेख हसीना के साथ पहले चुनाव लड़ चुकी 14 पार्टियों ने फिर से एक मजबूत गठबंधन तैयार कर लिया है। ये दल 300 सीटों पर सक्रिय हो चुके हैं और सत्ता के लिए जरूरी 151 सीटों के लक्ष्य के साथ मैदान में उतरने की तैयारी कर रहे हैं। (Sheikh Hasina Bangladesh Comeback) इन सभी संकेतों से साफ है कि बांग्लादेश की राजनीति में शेख हसीना और आवामी लीग की वापसी अब केवल अटकल नहीं, बल्कि एक संभावित हकीकत बनती जा रही है।

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