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Sunetra Pawar politics 2026: सुनेत्रा पवार ने एक कॉल से हिलाई सियासत! उद्धव को फोन कर फंसाया सियासी पेच, ससुर के नक्से कदम पर बहु

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Sunetra Pawar politics 2026: महाराष्ट्र की सियासत में इन दिनों एक नया चेहरा पूरी धमक के साथ उभर रहा है, और वह नाम है सुनेत्रा पवार का। पति अजित पवार के आकस्मिक निधन के बाद लगे गहरे सदमे से उबरकर सुनेत्रा ने महज दो महीने में साबित कर दिया है कि वे राजनीति की कच्ची खिलाड़ी नहीं हैं। बारामती उपचुनाव के लिए उन्होंने ठीक वैसी ही बिसात बिछाई है, जैसी उनके ससुर शरद पवार दशकों से विरोधियों को मात देने के लिए बिछाते आए हैं। सुनेत्रा ने शिवसेना (UBT) प्रमुख उद्धव ठाकरे को सीधे फोन कर समर्थन मांगकर महाविकास अघाड़ी (MVA) के भीतर एक बड़ा सियासी बम फोड़ दिया है।

Sunetra Pawar politics 2026: उद्धव को फोन और इमोशनल कार्ड

अजित पवार के निधन से खाली हुई बारामती सीट पर 23 अप्रैल को उपचुनाव होना है। इस पारंपरिक गढ़ को बचाने के लिए सुनेत्रा पवार ने ‘इमोशनल इंटेलिजेंस’ का इस्तेमाल किया है। (Sunetra Pawar politics 2026) उन्होंने उद्धव ठाकरे से अपील की है कि पवार और ठाकरे परिवार के पुराने रिश्तों को देखते हुए बारामती में शिवसेना अपना उम्मीदवार न उतारे। (Sunetra Pawar politics 2026) शिवसेना (UBT) के दिग्गज नेता संजय राउत ने इस फोन कॉल की पुष्टि करते हुए कहा कि उद्धव जी और अजित दादा के बीच एक गहरा भावनात्मक बंधन था, और जल्द ही इस पर फैसला लिया जाएगा। सुनेत्रा का यह दांव विपक्ष के भीतर फूट डालने की एक सोची-समझी रणनीति मानी जा रही है।

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ससुर शरद पवार वाली क्लासिक चाल

सुनेत्रा पवार की इस चाल ने महाविकास अघाड़ी के अंदर दरार पैदा कर दी है। एक तरफ शरद पवार गुट (NCP-SP) ने पहले ही कह दिया है कि वे बारामती में उम्मीदवार नहीं उतारेंगे, वहीं दूसरी तरफ कांग्रेस इस सीट पर दावा ठोककर अड़ी हुई है। (Sunetra Pawar politics 2026) महाराष्ट्र कांग्रेस अध्यक्ष हर्षवर्धन सपकल ने तो उम्मीदवारों के इंटरव्यू तक शुरू कर दिए हैं। सुनेत्रा ने सीधे उद्धव ठाकरे से संपर्क साधकर कांग्रेस को गठबंधन में अकेला छोड़ने की कोशिश की है। अगर उद्धव ठाकरे समर्थन दे देते हैं, तो कांग्रेस के लिए अकेले लड़ना और अपनी साख बचाना बेहद मुश्किल हो जाएगा।

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अजित पवार की विरासत और सुनेत्रा की अग्निपरीक्षा

बारामती सिर्फ एक सीट नहीं, बल्कि पवार परिवार का अभेद्य किला है। अजित पवार यहाँ से आठ बार विधायक रहे और 2024 के चुनाव में उन्होंने अपने ही भतीजे को एक लाख से ज्यादा वोटों से हराया था। अब 31 जनवरी को उपमुख्यमंत्री पद की शपथ लेने और NCP की कमान संभालने के बाद सुनेत्रा पवार के लिए यह उपचुनाव उनकी नेतृत्व क्षमता की पहली बड़ी परीक्षा है। (Sunetra Pawar politics 2026) 6 अप्रैल को नामांकन दाखिल करने से पहले उन्होंने जो घेराबंदी की है, उससे साफ है कि वे अपने पति की राजनीतिक विरासत की असली हकदार बनकर उभरना चाहती हैं।

सत्ता और विपक्ष के बीच ‘सांस्कृतिक’ अपील

सिर्फ सुनेत्रा ही नहीं, बल्कि मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस और NCP सांसद सुनील तटकरे ने भी विपक्षी दलों से हाथ जोड़कर अपील की है कि बारामती उपचुनाव को निर्विरोध संपन्न होने दिया जाए। (Sunetra Pawar politics 2026) तटकरे ने कहा कि यह राज्य की महान राजनीतिक संस्कृति को मजबूत करने का मौका है। अब सबकी निगाहें कांग्रेस और उद्धव ठाकरे पर टिकी हैं। क्या सुनेत्रा पवार अपने ससुर शरद पवार की तरह विरोधियों को अपने पक्ष में करने में कामयाब होंगी? अगर वे बिना मुकाबले जीत जाती हैं, तो महाराष्ट्र की राजनीति में ‘पवार पावर’ का एक नया और शक्तिशाली अध्याय शुरू हो जाएगा।

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