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TTP attack Pakistan: लो हो गई बड़े युद्ध की शुरुआत! Pak सुरक्षाकर्मियों की मौत से बौखलाए CDF मुनीर, अब TTP की खैर नहीं…

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TTP attack Pakistan: खैबर पख्तूनख्वां पर सोमवार की सुबह एक बार फिर धमाकों की गूंज सुनाई दी। कुर्रम जिले में तहरीक–ए–तालिबान पाकिस्तान यानी TTP ने पाकिस्तानी सुरक्षाबलों पर लगातार दो हमलों को अंजाम देकर देश को हिला दिया। यह हमला ऐसे समय हुआ है, जब पाकिस्तान की सेना को नेतृत्व देने के लिए फील्ड मार्शल आसिम मुनीर ने नए CDF के रूप में कमान संभाली है। देश नई उम्मीदों और नई योजनाओं की राह देख ही रहा था कि हिंसा ने फिर सिर उठा लिया।

TTP attack Pakistan: कुर्रम में दो हमले, छह सुरक्षाकर्मी ढेर

रिपोर्ट के मुताबिक, कुर्रम के मनाटो इलाके में TTP ने सुरक्षाबलों की टीम पर घात लगाकर हमला किया। पहले हमला हुआ और उसके तुरंत बाद दूसरा। इन दोनों हमलों में पाक सुरक्षाबलों को भारी नुकसान हुआ। (TTP attack Pakistan) छह जवान मौके पर ही मारे गए, जबकि चार गंभीर रूप से घायल बताए जा रहे हैं। घायलों को नजदीकी सैन्य अस्पताल में भर्ती कराया गया, जहां उनका इलाज जारी है।

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CDF मुनीर के सामने बड़ी परीक्षा

हमले का समय बेहद ध्यान देने योग्य है। पाकिस्तान को उसका पहला चीफ ऑफ डिफेंस फोर्सेज मिला और उसके अगले दिन TTP ने अपनी मौजूदगी का संकेत दे दिया। (TTP attack Pakistan) यह घटना एक तरह से नए सैन्य नेतृत्व को खुली चुनौती है। आसिम मुनीर ने पद संभालते ही कहा था कि पाकिस्तान शांति चाहता है, लेकिन सीमाई सुरक्षा और संप्रभुता पर कोई समझौता नहीं होगा। अब TTP के हमलों ने उनके लिए पहले ही दिन संघर्ष की जमीन तैयार कर दी है।

कभी शांत नहीं रहा खैबर पख्तूनख्वां

यह क्षेत्र पाकिस्तान की सुरक्षा एजेंसियों के लिए लंबे समय से सिरदर्द बना हुआ है। नॉर्थ वजीरिस्तान में बीते दिनों सरकारी अफसर के काफिले पर हमला हुआ था, जिसमें पांच लोग मारे गए थे। (TTP attack Pakistan) उससे पहले भी पुलिस चौकियों और सैन्य काफिलों पर अनेक हमले दर्ज हुए। खैबर पख्तूनख्वां की भूगोल और जनजातीय संरचना TTP जैसे संगठनों को छिपने और regroup करने में मदद देती है। यही वजह है कि यहां हिंसा कभी पूरी तरह खत्म नहीं हुई।

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अफगानिस्तान से तनाव और TTP की जड़ें

पाकिस्तान लगातार दावा करता रहा है कि TTP के लड़ाके अफगानिस्तान में पनाह लेते हैं और वही से हमलों की योजना बनाकर वापस आते हैं। अफगान तालिबान इन आरोपों को नकारते रहे हैं, लेकिन पाकिस्तान इस बात पर अडिग है कि काबुल TTP को संरक्षण दे रहा है। (TTP attack Pakistan) फिलहाल हालात इस कदर बिगड़ चुके हैं कि पिछले कुछ महीनों में पाक–अफगान सीमा पर बार–बार फायरिंग और गोलाबारी दर्ज हुई है। यह तनाव दो देशों के बीच संवाद को कम कर रहा है और पाकिस्तान को घरेलू मोर्चे पर सुरक्षा खर्च बढ़ाना पड़ रहा है।

अगला कदम क्या?

अब नजर इस बात पर है कि नव नियुक्त CDF आसिम मुनीर क्या रणनीति अपनाते हैं। क्या सेना फिर बड़े अभियान की ओर बढ़ेगी? या सरकार सीमा पार संवाद पर जोर देगी?

पर एक बात तय है कि खैबर पख्तूनख्वां की पहाड़ियों में उठते विस्फोट यह दिखा रहे हैं कि TTP की चुनौती खत्म नहीं हुई है, बल्कि और तेज हो चुकी है।

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