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West Bengal election 2026: उत्तर से दक्षिण तक बुआ-भतीजा कब्ज़ा! BJP के गले की फांस बनी TMC, समझिए कैसे

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West Bengal election 2026: पश्चिम बंगाल की सियासी बिसात पर 2026 के विधानसभा चुनाव का बिगुल फुंक चुका है। इस बार तृणमूल कांग्रेस (TMC) और भारतीय जनता पार्टी (BJP) के बीच मुकाबला केवल सत्ता की कुर्सी का नहीं, बल्कि साख और वर्चस्व की आखिरी लड़ाई जैसा नजर आ रहा है। चुनावी तारीखों के एलान के साथ ही टीएमसी सुप्रीमो ममता बनर्जी ने अपनी ‘रणनीतिक चाल’ चल दी है। उन्होंने पूरे बंगाल को दो हिस्सों में बांटकर खुद उत्तर की कमान संभाली है, तो दक्षिण की जिम्मेदारी अपने भरोसेमंद सिपहसालार और भतीजे अभिषेक बनर्जी को सौंपी है।

उत्तर बंगाल का ‘चक्रव्यूह’

उत्तर बंगाल, जो पिछले कई चुनावों से भाजपा का अभेद्य किला बना हुआ है, इस बार ममता बनर्जी के निशाने पर है। 2019 के लोकसभा और 2021 के विधानसभा चुनावों में भाजपा ने यहां अलीपुरद्वार, जलपाईगुड़ी और दार्जिलिंग जैसे जिलों में शानदार प्रदर्शन किया था। इसी ‘भगवा गढ़’ में सेंध लगाने के लिए मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने खुद हुंकार भरी है। वे 24 मार्च 2026 से अलीपुरद्वार के परेड ग्राउंड में मेगा रैली के जरिए अपने अभियान की शुरुआत कर रही हैं। इसके बाद 25 और 26 मार्च को वे नक्सलबारी, जलपाईगुड़ी और दार्जिलिंग के इलाकों में रोड शो और जनसभाएं करेंगी। संदेश साफ है—दीदी अब भाजपा के घर में घुसकर चुनौती देने को तैयार हैं।

दक्षिण में अभिषेक का ‘शक्ति प्रदर्शन’

जहां बुआ उत्तर में भाजपा के पसीने छुड़ाएंगी, वहीं पार्टी के राष्ट्रीय महासचिव अभिषेक बनर्जी दक्षिण बंगाल के मैदान में उतर चुके हैं। दक्षिण बंगाल को टीएमसी का मजबूत आधार माना जाता है, लेकिन भाजपा यहां भी अपनी पैठ बढ़ाने की कोशिश में है। अभिषेक बनर्जी ने 24 मार्च को दक्षिण 24 परगना के ‘पाथरप्रतिमा’ से अपना अभियान शुरू किया है। इसके बाद वे मेदिनीपुर के बेल्ट—दाशपुर, केशियारी और नारायणगढ़ जैसे संवेदनशील इलाकों में रैलियां करेंगे। दिलचस्प बात यह है कि अभिषेक 25 मार्च को नंदीग्राम में कार्यकर्ताओं की बैठक भी करने वाले हैं, जिसे भाजपा के शुभेंदु अधिकारी का गढ़ माना जाता है।

भाजपा की ‘गली-गली’ रणनीति और नितिन नवीन की एंट्री

टीएमसी के इस ‘बुआ-भतीजा’ फॉर्मूले का मुकाबला करने के लिए भाजपा ने भी अपनी पूरी ताकत झोंक दी है। पार्टी के नए राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन खुद बंगाल के दौरे पर हैं। उन्होंने सिलीगुड़ी और दुर्गापुर में संगठन की महत्वपूर्ण बैठकें की हैं। भाजपा की रणनीति इस बार बड़े भाषणों से ज्यादा ‘बूथ लेवल मैनेजमेंट’ पर है। केंद्रीय मंत्री भूपेंद्र यादव और बंगाल प्रभारी सुनील बंसल के नेतृत्व में भाजपा कार्यकर्ता घर-घर जाकर केंद्रीय योजनाओं का प्रचार कर रहे हैं। भाजपा का पूरा जोर उत्तर बंगाल के अपने आधार को बचाने और दक्षिण बंगाल में सत्ता विरोधी लहर का फायदा उठाने पर है।

291 बनाम 255: प्रत्याशियों की फौज तैयार

ममता बनर्जी ने इस बार बिना किसी देरी के 291 उम्मीदवारों की लिस्ट जारी कर दी है, जबकि 3 सीटें गठबंधन सहयोगी ‘भारतीय गोरखा प्रजातांत्रिक मोर्चा’ (BGPM) के लिए छोड़ी हैं। वहीं भाजपा ने भी अब तक 255 से ज्यादा उम्मीदवारों के नाम घोषित कर दिए हैं, जिनमें सुवेंद्रु अधिकारी, निशीथ प्रमाणिक और रूपा गांगुली जैसे दिग्गज नाम शामिल हैं। 23 और 29 अप्रैल को दो चरणों में होने वाला यह मतदान तय करेगा कि बंगाल की जनता ‘दीदी’ के कल्याणकारी मॉडल पर भरोसा करती है या भाजपा के ‘परिवर्तन’ के नारे पर।

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