West Bengal SIR Report: पश्चिम बंगाल की राजनीति इन दिनों सियासी पारा चढ़ा हुआ है। कारण है स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) यानी मतदाता सूची के विशेष पुनरीक्षण की पहली रिपोर्ट, जिसने मुख्यमंत्री ममता बनर्जी और उनकी पार्टी तृणमूल कांग्रेस (TMC) की रातों की नींद उड़ा दी है। (West Bengal SIR Report) चुनाव आयोग द्वारा कराए जा रहे इस संवैधानिक अभ्यास के अन्तर्गत राज्य में लाखों मतदाताओं के नाम ड्राफ्ट वोटर लिस्ट से हटाए गए हैं, जिनमें सबसे बड़ा और करारा झटका खुद ममता बनर्जी के गढ़, ‘भवानीपुर’ से लगा है।
West Bengal SIR Report: 12 राज्यों में SIR, लेकिन बंगाल में सबसे ज़ोरदार हंगामा क्यों?
देश के 12 राज्यों में SIR की प्रक्रिया जारी है, लेकिन इन दिनों जितना राजनीतिक हंगामा पश्चिम बंगाल में देखने को मिल रहा है, उतना देश में कहीं और नहीं। शुरुआत से ही ममता बनर्जी इस प्रक्रिया का कड़ा विरोध करती नजर आईं। (West Bengal SIR Report: SIR रिपोर्ट देख चीख उठीं ममता बनर्जी… बंगाल के ‘गढ़’ में कटे भारी संख्या में नाम! TMC में सियासी घमासान जारी, 2026 में पलटेगा खेल?) उन्होंने सड़क पर उतरकर जमकर आंदोलन किया और यहां तक कह दिया कि वह इस प्रक्रिया को किसी भी हाल में “होने नहीं देंगी।” अब जब यह मामला सुप्रीम कोर्ट तक पहुंच चुका है, तो शीर्ष अदालत ने भी पूरी तरह से स्पष्ट कर दिया कि SIR एक संवैधानिक प्रक्रिया है और इसे किसी भी हाल में रोका नहीं जा सकता।
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58 लाख नाम कटने की रिपोर्ट से बढ़ी बेचैनी
एक रिपोर्ट के अनुसार, पश्चिम बंगाल में तकरीबन 58 लाख मतदाताओं के नाम सूची से हटाए जा चुके हैं। इनमें डुप्लीकेट एंट्री, दो जगह नाम दर्ज होना, मृत्यु हो जाना या लंबे वक़्त से अनुपस्थित होने जैसे कारण बताए गए हैं। इसके अलावा करीब 12 लाख ऐसे मतदाता बताए जा रहे हैं जिन्होंने SIR फॉर्म ही जमा नहीं किया। हालांकि चुनाव आयोग ने स्पष्टकर कर दिया है कि यह अभी ड्राफ्ट लिस्ट है और दावे-आपत्तियों की प्रक्रिया के दौरान सही मतदाताओं के नाम फिर से जोड़े जा सकते हैं।
भवानीपुर में 45,000 नाम कटे, हिला उठा ममता का गढ़!
सबसे बड़ा राजनीतिक झटका भवानीपुर विधानसभा सीट से लगा है, जहां से ममता बनर्जी खुद विधायक हैं। यहां तकरीबन 45,000 मतदाताओं के नाम ड्राफ्ट सूची से काट दिए गए हैं। (West Bengal SIR Report) यह संख्या इसलिए भी चौंकाने वाली है क्योंकि भवानीपुर को TMC का ‘अभेद्य किला’ माना जाता रहा है। रिपोर्ट के बाद ममता बनर्जी ने पार्टी कार्यकर्ताओं को आदेश दिए कि वे घर-घर जाकर जांच करें कि किसी वैध मतदाता का नाम कहीं तो नहीं छूट गया।
“फॉर्म भरना जमीन पर नाक रगड़ने से भी बदतर”
SIR को लेकर ममता बनर्जी के तीखे बयान भी लगातार विवादों में रहे हैं। (West Bengal SIR Report) उन्होंने पहले ही सार्वजनिक तौर पर कह दिया है कि यदि उन्हें फॉर्म भरना पड़ा तो “जमीन पर नाक रगड़ना बेहतर लगेगा।” हालांकि चुनाव आयोग ने साफ़ किया है कि प्रधानमंत्री, मुख्यमंत्री और अन्य संवैधानिक पदों पर बैठे लोगों को “मार्क्ड इलेक्टर” की श्रेणी में रखा जाता है और उनके वोट फॉर्म न भरने से नहीं कटते।
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अल्पसंख्यक बहुल इलाकों पर कड़ी नजर
भवानीपुर के कुछ नगर निगम वार्ड, विशेषकर 70, 72 और 77, में भारी संख्या में नाम कटने की बात सामने आई है। वार्ड 77 अल्पसंख्यक बहुल क्षेत्र माना जाता है, जिस पर जांच के दौरान खासतौर से ध्यान दिया गया। (West Bengal SIR Report) भवानीपुर और आसपास वाले इलाकों में उत्तर प्रदेश, बिहार और ओडिशा मूल के निवासियों की संख्या भी बहुत है, जिनके दस्तावेजों की कड़ी जांच की गई।
24 परगना में सबसे अधिक नाम हाटए गए
आपको बता दे, पूरे राज्य में यदि सबसे अधिक नाम कटने की बात करें तो 24 परगना जिला शीर्ष पर है, जहां तकरीबन 8 लाख मतदाताओं के नाम ड्राफ्ट सूची से काटे गए हैं। (West Bengal SIR Report) विपक्ष का आरोप है कि यह वही इलाका है जहां लंबे वक़्त से फर्जी दस्तावेज और अवैध घुसपैठ को लेकर सवाल उठते रहे हैं।
TMC का बड़ा आरोप
TMC ने आरोप लगाया है कि भारी संख्या में मतदाताओं को मृत, स्थानांतरित या अनुपस्थित दिखाकर सूची से हटाया गया। वहीं चुनाव आयोग का इसपर साफ कहना है कि जनवरी महीने तक दावे और आपत्तियों की प्रक्रिया जारी रहेगी और जिनके पास वैध दस्तावेज होंगे, उनके नाम अंतिम मतदाता सूची में अवश्य जोड़े जाएंगे। अंतिम वोटर लिस्ट फरवरी में प्रकाशित की जाएगी।
सियासी मायने ?
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि SIR के माध्यम से यदि बड़ी संख्या में फर्जी या डुप्लीकेट वोट हटते हैं, तो इसका सबसे बड़ा प्रभाव आगामी 2026 के विधानसभा चुनाव पर पड़ेगा। (West Bengal SIR Report) यही कारण है कि मौजूदा वक़्त में ममता बनर्जी इतनी आक्रामक नजर आ रही हैं। विपक्ष का दावा है कि यह प्रक्रिया ‘खेला’ नहीं बल्कि मतदाता सूची की शुद्धता के लिए बड़ा और महत्वपूर्ण कदम है।
फिलहाल सबकी नजरें अंतिम रिपोर्ट पर टिकी हैं। क्या दावे-आपत्तियों के बाद बड़ी संख्या में नाम वापस जुड़ेंगे या ममता बनर्जी की मुश्किलें और बढ़ेंगी ? यह आने वाले सप्ताह में पूरी तरह साफ़ हो जाएगा।