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BJP’s Punjab Plan: ‘गठबंधन सिर्फ जनता से…’,अकाली दल को BJP का बड़ा झटका! पंजाब में इस नए प्लान पर शुरू हुआ काम
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4 दिन agoon

BJP’s Punjab Plan: पंजाब में 2027 विधानसभा चुनाव (Punjab Assembly Election 2027) को लेकर भारतीय जनता पार्टी ने अपनी तैयारियां तेज कर दी हैं। अकाली दल के साथ गठबंधन की संभावना से भाजपा नेताओं के इनकार के बीच पार्टी अब राज्य में अपने संगठन और सामाजिक समीकरण को मजबूत करने पर जोर देती दिखाई दे रही है। भाजपा की ओर से नशे के मुद्दे को लेकर अभियान चलाया जा रहा है और पार्टी के बड़े नेता लगातार पंजाब का दौरा कर रहे हैं।
हरियाणा के मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी से लेकर उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी तक पंजाब में सक्रिय हैं। नायब सिंह सैनी ने अकाली दल के साथ किसी भी तरह के गठबंधन की संभावना को खारिज करते हुए कहा है कि भाजपा का गठबंधन केवल पंजाब की जनता के साथ है। भाजपा के पंजाब प्रभारी सतीश पूनिया भी पार्टी के 117 विधानसभा सीटों पर अपने दम पर चुनाव लड़ने की बात कह चुके हैं।
BJP’s Punjab Plan: नशे के मुद्दे पर BJP का बड़ा अभियान
भाजपा ने पंजाब में नशे के खिलाफ नशा मुक्त पंजाब यात्रा (Nasha Mukt Punjab Yatra) शुरू की है। पार्टी के मुताबिक इस अभियान का मकसद युवाओं को ड्रग्स (Drugs) से दूर रखने और इस मुद्दे को जन आंदोलन का रूप देना है। यह यात्रा 18 सितंबर से शुरू हुई है और 30 सितंबर को जालंधर में समाप्त होनी है। चार चरणों में निकाली जा रही इन यात्राओं का रूट करीब 4000 किलोमीटर का है और इसे पंजाब की सभी 117 विधानसभा सीटों तक ले जाने की योजना है।
इसी अभियान के दौरान हरियाणा के मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने पंजाब के टांडा में आम आदमी पार्टी सरकार पर निशाना साधा। उन्होंने कहा कि पुरानी सरकारों ने नशे के मुद्दे पर पंजाब में कोई काम नहीं किया और आम आदमी पार्टी की सरकार आने के बाद हालात और खराब हुए हैं।
सैनी ने कहा कि भाजपा का अभियान पंजाब के युवाओं को ड्रग्स से दूर रखने के लिए है। उनके मुताबिक आम आदमी पार्टी ने सत्ता में आने से पहले छह महीने के भीतर पंजाब से ड्रग्स की समस्या खत्म करने, युवाओं को रोजगार देने और न्यूनतम समर्थन मूल्य यानी एमएसपी (MSP) को लेकर वादे किए थे, लेकिन उनके अनुसार ये वादे पूरे नहीं हुए।
हरियाणा के मुख्यमंत्री ने यह भी कहा कि कानून व्यवस्था बनाए रखना किसी भी सरकार का सबसे बड़ा काम होता है, लेकिन उनके आरोप के मुताबिक पंजाब की आम आदमी पार्टी सरकार इसमें विफल रही है। सैनी के ये आरोप राजनीतिक बयान के तौर पर देखे जाने चाहिए, जबकि पंजाब में नशे के मुद्दे पर भाजपा और आम आदमी पार्टी के बीच लगातार आरोप-प्रत्यारोप चल रहे हैं।
अकाली दल से गठबंधन पर BJP का साफ संदेश
पंजाब चुनाव से पहले भाजपा और शिरोमणि अकाली दल (Shiromani Akali Dal) के बीच गठबंधन को लेकर चर्चा होती रही है। हालांकि भाजपा के वरिष्ठ नेता लगातार पार्टी के अकेले चुनाव लड़ने की बात कह रहे हैं।
नायब सिंह सैनी से जब अकाली दल के साथ गठबंधन को लेकर सवाल किया गया तो उन्होंने साफ कहा कि कोई गठबंधन नहीं है और भाजपा का गठबंधन केवल पंजाब की जनता के साथ है। उन्होंने कहा कि भारतीय जनता पार्टी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सरकार के दौरान हुए काम के आधार पर जनता का आशीर्वाद लेने की कोशिश करेगी।
इससे पहले पंजाब प्रभारी सतीश पूनिया भी कह चुके हैं कि भाजपा 2027 के विधानसभा चुनाव में राज्य की सभी 117 सीटों पर अपने दम पर चुनाव लड़ेगी। उन्होंने पार्टी के संगठन को बूथ स्तर तक मजबूत करने की बात भी कही थी।
पुष्कर सिंह धामी ने भी AAP पर साधा निशाना
भाजपा के पंजाब अभियान में दूसरे राज्यों के मुख्यमंत्री और बड़े नेता भी सक्रिय हैं। उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने भी आम आदमी पार्टी की सरकार पर निशाना साधा है।
धामी ने आरोप लगाया कि पंजाब सरकार की नाकामी के कारण राज्य में ड्रग्स की समस्या बढ़ी है। उन्होंने कहा कि भाजपा सत्ता में आने के बाद इस समस्या का समाधान करेगी और ‘उभरता पंजाब’ बनाकर राज्य की खोई हुई शान वापस लाने का प्रयास करेगी।
भाजपा की ओर से पंजाब में नशे को लेकर चलाया जा रहा अभियान अब पार्टी के चुनावी संपर्क और संगठनात्मक गतिविधियों का भी अहम हिस्सा बन गया है। हालांकि भाजपा इसे नशे के खिलाफ सामाजिक अभियान के तौर पर पेश कर रही है।
सामाजिक समीकरण साधने पर भी जोर
अकाली दल के साथ गठबंधन की संभावना से दूरी बनाने के साथ ही भाजपा ने पंजाब में सामाजिक समीकरण (Social Equation) साधने पर भी ध्यान बढ़ाया है। पार्टी संगठन में अलग-अलग सामाजिक समूहों को प्रतिनिधित्व देने की कोशिश कर रही है।
पंजाब भाजपा प्रभारी सतीश पूनिया राजस्थान से आने वाले प्रमुख जाट नेता हैं। उनके साथ सह प्रभारी अलका गुर्जर और दिल्ली के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष वीरेंद्र सचदेवा भी संगठन में जिम्मेदारी संभाल रहे हैं।
पंजाब की राजनीति में सामाजिक और धार्मिक समीकरण काफी महत्वपूर्ण माने जाते हैं। दिए गए आंकड़ों के मुताबिक राज्य की करीब 55 फीसदी आबादी सिख है। ऐसे में भाजपा के सामने संगठन विस्तार के साथ अलग-अलग सामाजिक समूहों तक अपनी पहुंच बढ़ाने की चुनौती भी है।
हिंदू वोट बैंक पर भी नजर
भाजपा ने गैर-सिख हिंदू समुदाय के बीच अपनी पहुंच बढ़ाने की रणनीति भी बरकरार रखी है। पार्टी से जुड़े नेताओं और रणनीतिकारों का मानना है कि पंजाब में बदलाव का माहौल है और पिछली बार आम आदमी पार्टी को इसका फायदा मिला था।
पार्टी के स्तर पर तरुण चुग, सुनील जाखड़, विजय सांपला और राघव चड्ढा जैसे नेता जमीनी स्तर पर काम कर रहे हैं। इनके जरिए भाजपा गैर-सिख हिंदू समुदाय के साथ अपना संपर्क मजबूत करने की कोशिश कर रही है।
117 सीटों पर अकेले चुनाव की तैयारी
पंजाब विधानसभा में कुल 117 सीटें हैं और भाजपा के मौजूदा रुख के मुताबिक पार्टी इन सभी सीटों पर अपने संगठन को मजबूत करने की तैयारी कर रही है। सतीश पूनिया पहले ही स्पष्ट कर चुके हैं कि भाजपा सभी 117 सीटों पर अपने दम पर चुनाव लड़ने की तैयारी कर रही है।
इसी के साथ पार्टी ने राज्य में बड़े नेताओं की सक्रियता बढ़ाई है। नशा मुक्त पंजाब यात्रा के जरिए अलग-अलग इलाकों में पहुंच बनाई जा रही है, वहीं संगठनात्मक स्तर पर सामाजिक समीकरण और जमीनी नेटवर्क मजबूत करने पर जोर है।
ऐसे में पंजाब चुनाव से पहले भाजपा की रणनीति में फिलहाल तीन चीजें प्रमुख रूप से दिखाई दे रही हैं। अकाली दल से दूरी बनाए रखना, नशे के मुद्दे को बड़े अभियान के तौर पर उठाना और अलग-अलग सामाजिक समूहों के बीच संगठन का विस्तार करना। 2027 के चुनाव से पहले पार्टी की यही तैयारियां आने वाले समय में पंजाब की राजनीति में उसके अभियान की दिशा तय करेंगी।
