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Bihar cabinet expansion 2026: बिहार में बड़ा उलटफेर करेगी सम्राट सरकार! कई दिग्गज नेताओं की छुट्टी तय, 9 नए चेहरों पर लगेगा दांव, NDA का ‘सुपर फॉर्मूला’ तैयार

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Bihar cabinet expansion 2026: बिहार की सियासत में इन दिनों सबसे बड़ा सवाल यही है कि सम्राट चौधरी की नई सरकार का ‘कुनबा’ कब बढ़ेगा। 15 अप्रैल को जब नीतीश कुमार के इस्तीफे के बाद सम्राट चौधरी ने मुख्यमंत्री पद की शपथ ली थी, तब से ही मंत्रिमंडल विस्तार को लेकर कयासों का बाजार गर्म है। अब एनडीए सूत्रों से बड़ी खबर सामने आ रही है कि मई के पहले हफ्ते में बिहार को उसके नए मंत्री मिल जाएंगे। (Bihar cabinet expansion 2026) बताया जा रहा है कि पश्चिम बंगाल समेत पांच राज्यों के चुनावी नतीजे 4 मई को आने वाले हैं, और ठीक उसके बाद बिहार में कैबिनेट विस्तार की प्रक्रिया पूरी कर ली जाएगी। इस विस्तार में भाजपा, जदयू, लोजपा-आर, हम और रालोमो के बीच पदों के बंटवारे को लेकर माथापच्ची अब अंतिम दौर में है।

Bihar cabinet expansion 2026: पुराने चेहरों पर भरोसा या नए ‘योद्धाओं’ की एंट्री?

बिहार की नई सरकार के गठन के समय ही एनडीए के बड़े नेताओं ने साफ कर दिया था कि राज्य में सिर्फ सत्ता का चेहरा बदला है, सरकार का स्वरूप और काम करने का तरीका वही रहेगा। सूत्रों की मानें तो सम्राट कैबिनेट का स्वरूप काफी हद तक पिछली नीतीश सरकार जैसा ही रहने वाला है। (Bihar cabinet expansion 2026) जिस पार्टी के पास पहले जितने मंत्री पद थे, इस बार भी लगभग वही समीकरण रहने की उम्मीद है। हालांकि, भाजपा और जदयू के बीच एक-दो सीटों का हेर-फेर हो सकता है। (Bihar cabinet expansion 2026) सबसे दिलचस्प बात यह है कि पिछली सरकार में जदयू के पास मुख्यमंत्री का पद था, लेकिन अब कमान भाजपा के पास है। ऐसे में जदयू को दो डिप्टी सीएम के पदों के साथ कुछ नए विभाग मिल सकते हैं।

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क्यों फंसा है पेंच और क्यों जरूरी है विस्तार?

फिलहाल बिहार की सरकार केवल तीन ‘इंजनों’ के भरोसे चल रही है मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी और दो डिप्टी सीएम विजय सिन्हा व बिजेंद्र यादव। सरकार के सभी विभागों की जिम्मेदारी इन्हीं तीन कंधों पर है। (Bihar cabinet expansion 2026) प्रशासनिक काम में तेजी लाने और आगामी योजनाओं को समय पर पूरा करने के लिए मंत्रिमंडल का विस्तार अनिवार्य हो गया है। नीतीश सरकार के समय कैबिनेट में 27 सदस्य थे, जबकि बिहार में मुख्यमंत्री समेत कुल 36 मंत्री बनाए जा सकते हैं। इसका मतलब है कि नई कैबिनेट में लगभग 9 नए पदों को भरने की गुंजाइश अभी बाकी है। इसी ‘खाली जगह’ को भरने के लिए सभी सहयोगी दलों के बीच जोड़-तोड़ जारी है।

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गठबंधन का गणित: किस पार्टी को क्या मिलेगा?

अगर पुराने फॉर्मूले पर नजर डालें, तो भाजपा के पास सबसे ज्यादा 14 मंत्री थे। जदयू के पास मुख्यमंत्री के अलावा 8 मंत्री थे, जबकि चिराग पासवान की लोजपा-आर से दो मंत्री बनाए गए थे। जीतन राम मांझी की पार्टी ‘हम’ और उपेंद्र कुशवाहा की ‘रालोमो’ से एक-एक मंत्री शामिल थे। (Bihar cabinet expansion 2026) इस बार चर्चा है कि जदयू अपने उन पदों को भर सकता है जो पिछली बार खाली रह गए थे। इससे नीतीश कुमार की पार्टी में कुछ नए चेहरों को मौका मिल सकता है। लोजपा-आर, हम और रालोमो में पुराने मंत्रियों के ही रिपीट होने की प्रबल संभावना है, क्योंकि इन दलों में नेतृत्व को लेकर कोई दुविधा नहीं है।

मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी के लिए सबसे बड़ी चुनौती भाजपा के भीतर सामाजिक और जातिगत समीकरणों को संतुलित करना है। भाजपा के कोटे से कुछ पुराने मंत्रियों को बदला जा सकता है ताकि नए और ऊर्जावान चेहरों को जगह मिले। (Bihar cabinet expansion 2026) खासकर 2027 के विधानसभा चुनावों को ध्यान में रखते हुए भाजपा हर वर्ग को कैबिनेट में प्रतिनिधित्व देना चाहती है। नितिन नवीन के राष्ट्रीय अध्यक्ष बनने के बाद एक पद पहले ही खाली हो चुका है, जिस पर किसी बड़े चेहरे की तलाश है। कुल मिलाकर, भाजपा इस बार ‘नो रिस्क’ की नीति पर चल रही है और केवल उन लोगों को मौका देना चाहती है जिनकी जमीन पर पकड़ मजबूत हो।

4 मई के नतीजों का इंतजार

बिहार की जनता और राजनेताओं की नजरें अब 4 मई पर टिकी हैं। बंगाल चुनाव के नतीजों का असर बिहार की राजनीति के मिजाज पर भी पड़ेगा। जैसे ही चुनावी शोर थमेगा, बिहार में शपथ ग्रहण समारोह की तैयारियां शुरू हो जाएंगी। क्या सम्राट चौधरी अपनी टीम में कोई बड़ा ‘सरप्राइज’ देंगे या फिर पुरानी टीम के साथ ही आगे बढ़ेंगे? यह अगले कुछ दिनों में साफ हो जाएगा। फिलहाल, बिहार के राजनीतिक गलियारों में ‘मई की गर्मी’ शपथ ग्रहण की आहट के साथ और बढ़ गई है।

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