Dharmendra Pradhan Resignation: केंद्रीय शिक्षा मंत्री (Union Education Minister) पद से धर्मेंद्र प्रधान (Dharmendra Pradhan) के इस्तीफे के दो दिन बाद इस पूरे मामले को लेकर बड़ी जानकारी सामने आई है।
सूत्रों के मुताबिक, सरकार की ओर से बातचीत के दौरान केंद्रीय मंत्री जेपी नड्डा (JP Nadda) और जितेंद्र सिंह (Jitendra Singh) ने कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के सामने धर्मेंद्र प्रधान का मंत्रालय बदलने का प्रस्ताव रखा था।
हालांकि, सीजेपी ने इस प्रस्ताव को स्वीकार नहीं किया और साफ कर दिया था कि वह धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे से कम किसी भी विकल्प पर तैयार नहीं है।
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Dharmendra Pradhan Resignation: CJP की मुख्य मांग थी धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा
जंतर-मंतर (Jantar Mantar) पर कॉकरोच जनता पार्टी (CJP Protest) के प्रदर्शन और देशभर के युवाओं के जुड़ने के बाद पेपर लीक (Paper Leak) के मुद्दे पर सरकार ने कई बड़े कदम उठाए। राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी (NTA) में व्यापक सुधार (NTA Reform), 47 अधिकारियों की सेवा समाप्ति (Termination Of 47 Officers), एंटी पेपर लीक संशोधन बिल (Anti Paper Leak Amendment Bill) लाने की तैयारी और पेपर लीक मामलों की फास्ट ट्रैक कोर्ट (Fast Track Court) में सुनवाई जैसे फैसले इसी आंदोलन के दौरान लिए गए।
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लेकिन इन सभी फैसलों के बीच सबसे बड़ा और अप्रत्याशित फैसला केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा माना गया। सीजेपी के आंदोलन में शुरुआत से ही यह प्रमुख मांग रही थी कि पेपर लीक मामले की जिम्मेदारी लेते हुए धर्मेंद्र प्रधान को पद छोड़ना चाहिए। आखिरकार सरकार ने बीते शनिवार को इस मांग को स्वीकार कर लिया और धर्मेंद्र प्रधान ने शिक्षा मंत्री पद से इस्तीफा दे दिया।
पहले दिया था मंत्रालय बदलने का प्रस्ताव
सूत्रों के अनुसार, धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे से पहले सरकार की ओर से बातचीत का रास्ता अपनाया गया था। इस दौरान सरकार के वार्ताकारों ने सीजेपी के सामने प्रस्ताव रखा था कि धर्मेंद्र प्रधान का मंत्रालय बदला जा सकता है।
केंद्रीय मंत्री जेपी नड्डा और जितेंद्र सिंह ने बातचीत के दौरान यह विकल्प रखा था कि किसी मंत्री को पद से हटाना या विभाग बदलना प्रधानमंत्री (Prime Minister) का विशेषाधिकार होता है। सरकार की ओर से यह तर्क दिया गया था कि मंत्रालय बदलना भी एक बड़ा कदम हो सकता है।
हालांकि, सीजेपी ने इस प्रस्ताव को पूरी तरह खारिज कर दिया। संगठन की ओर से साफ कहा गया कि धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे के अलावा कोई दूसरा विकल्प स्वीकार नहीं किया जाएगा। इसके बाद आखिरकार धर्मेंद्र प्रधान को शिक्षा मंत्री पद से इस्तीफा देना पड़ा।
क्या नई भूमिका में नजर आएंगे प्रधान?
वहीं अब बड़ा सवाल यह है कि धर्मेंद्र प्रधान की आगे क्या भूमिका होगी। धर्मेंद्र प्रधान ओडिशा बीजेपी (Odisha BJP) के मजबूत नेताओं में गिने जाते हैं और केंद्र की राजनीति में भी उनकी अहम भूमिका रही है।
हाल के समय में धर्मेंद्र प्रधान ने कई चुनावी जिम्मेदारियां संभाली हैं। बिहार विधानसभा चुनाव (Bihar Assembly Election) में वह प्रभारी रहे थे। इसके बाद पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव (West Bengal Assembly Election) में ममता बनर्जी की भवानीपुर सीट से जुड़े चुनावी मुकाबले में शुभेंदु अधिकारी की जीत के पीछे भी उनकी रणनीति को अहम माना गया था।
वर्ष 2024 के लोकसभा चुनाव (Lok Sabha Election 2024) में बीजेपी को झटका लगने के बाद हरियाणा विधानसभा चुनाव (Haryana Assembly Election) में धर्मेंद्र प्रधान को प्रभारी बनाया गया था। इस चुनाव में बीजेपी की जीत में उन्होंने अहम भूमिका निभाई थी।
इससे पहले भी धर्मेंद्र प्रधान उत्तर प्रदेश (Uttar Pradesh), मध्य प्रदेश (Madhya Pradesh), उत्तराखंड (Uttarakhand) और कर्नाटक (Karnataka) जैसे राज्यों में चुनाव प्रभारी की जिम्मेदारी संभाल चुके हैं। इन राज्यों में बीजेपी की चुनावी रणनीति तैयार करने में उनकी भूमिका रही है। उत्तरप्रदेश पर्यटन
इस्तीफे के बाद धर्मेंद्र प्रधान का पहला रिएक्शन
शिक्षा मंत्री पद से इस्तीफा देने के बाद सोमवार को धर्मेंद्र प्रधान की पहली प्रतिक्रिया सामने आई। संसद पहुंचने के दौरान कांग्रेस नेता जयराम रमेश (Jairam Ramesh) ने उनसे मुलाकात की और सहानुभूति जताते हुए कहा, “इट हैपन्स”।
इस पर धर्मेंद्र प्रधान ने जवाब दिया, “नथिंग हैपन्ड”। इसके बाद उन्होंने जयराम रमेश से कहा, “आई एम ए स्ट्रीट फाइटर। नॉट एन एसी रूम एक्टिविस्ट”।
धर्मेंद्र प्रधान का यह बयान उनके राजनीतिक अंदाज को दिखाने वाला माना जा रहा है। इस्तीफे के बाद पहली बार संसद भवन पहुंचे धर्मेंद्र प्रधान का एनडीए सांसदों (NDA MPs) ने स्वागत किया। इस दौरान उनके चेहरे पर मुस्कान नजर आई।
एक सांसद ने इस मौके पर कहा कि यह पहली बार है जब किसी मंत्री ने बिना किसी आरोप के इस्तीफा दिया है। उन्होंने कहा कि धर्मेंद्र प्रधान ने राजनीतिक जिम्मेदारी लेते हुए यह कदम उठाया है।
CJP आंदोलन का असर
जंतर-मंतर पर लंबे समय तक चले कॉकरोच जनता पार्टी के प्रदर्शन ने पेपर लीक के मुद्दे को राष्ट्रीय स्तर पर चर्चा में ला दिया। आंदोलन के दौरान युवाओं की बड़ी भागीदारी देखने को मिली। शहरऔर स्थानीय मार्गदर्शिका
सरकार की ओर से एनटीए में बदलाव, पेपर लीक रोकने के लिए कानून बनाने की दिशा में कदम, अधिकारियों पर कार्रवाई और फास्ट ट्रैक कोर्ट में मामलों की सुनवाई जैसे फैसले लिए गए। इसके बाद धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा इस पूरे आंदोलन का सबसे बड़ा राजनीतिक असर माना जा रहा है।