Lucknow: उत्तर प्रदेश की राज्यपाल आनंदीबेन पटेल द्वारा केजीएमयू (KGMU) और एसजीपीजीआई (SGPGI) से जुड़े कथित धर्मांतरण मामलों का संज्ञान लिए जाने के बाद इस मुद्दे पर विभिन्न वर्गों की प्रतिक्रियाएं सामने आ रही हैं। राज्यपाल की ओर से मेडिकल और डेंटल कॉलेजों में धर्मांतरण रोकथाम केंद्र बनाए जाने के निर्देशों के बीच मुस्लिम समुदाय और शिया धर्मगुरुओं ने भी अपनी राय व्यक्त की है।
जबरन धर्मांतरण इस्लाम में स्वीकार्य नहीं: सैयद सैफ अब्बास
शिया धर्मगुरु सैयद सैफ अब्बास ने आईएएनएस से बातचीत में कहा कि इस्लाम जबरन धर्मांतरण की निंदा करता है और किसी भी व्यक्ति को मजबूर करके धर्म परिवर्तन कराने की अनुमति नहीं देता। उन्होंने कहा कि शैक्षणिक संस्थानों में धर्मांतरण से जुड़े मामलों की चर्चाएं सामने आ रही हैं, लेकिन ऐसे मामलों की निष्पक्ष और गंभीर जांच आवश्यक है।
उन्होंने कहा कि कई बार पहले लोगों के बीच दोस्ती होती है, लेकिन जब संबंधों में किसी कारणवश विवाद या मतभेद उत्पन्न होता है तो धर्मांतरण के आरोप लगाए जाने लगते हैं। ऐसे में किसी भी निष्कर्ष पर पहुंचने से पहले तथ्यों की जांच जरूरी है।
जांच समिति के गठन पर जताई सहमति
सैयद सैफ अब्बास ने कहा कि यदि राज्यपाल ने शैक्षणिक संस्थानों में संभावित गड़बड़ियों को रोकने और मामलों की जांच के लिए कोई समिति या व्यवस्था बनाने का निर्णय लिया है तो उस पर किसी को आपत्ति नहीं होनी चाहिए। उन्होंने कहा कि गठित समिति को गंभीरता से यह जांच करनी चाहिए कि मामला वास्तव में धर्मांतरण का है या इसके पीछे कोई अन्य कारण मौजूद हैं।
धर्मांतरण और लव जिहाद के आरोपों पर उठाए सवाल
धर्मांतरण और लव जिहाद से जुड़े मामलों पर प्रतिक्रिया देते हुए सैयद सैफ अब्बास ने कहा कि कई बार वर्षों पुराने वैवाहिक संबंधों में भी बाद में इस प्रकार के आरोप लगाए जाते हैं। उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा कि एक व्यक्ति की शादी 20 वर्ष पहले हुई थी, लेकिन बाद में महिला ने यह दावा किया कि उसे यह जानकारी नहीं थी कि उसका पति मुस्लिम है।
उन्होंने कहा कि मित्रता, प्रेम और विवाह जैसे संबंध स्थापित हो जाते हैं, लेकिन जब किसी कारण से विवाद उत्पन्न होता है तो धर्मांतरण के आरोप सामने आने लगते हैं। इसलिए प्रत्येक मामले की स्वतंत्र और निष्पक्ष जांच होनी चाहिए।
“दीन में कोई जबरदस्ती नहीं” : यासूब अब्बास
वहीं शिया धर्मगुरु यासूब अब्बास ने राज्यपाल के कदम का समर्थन करते हुए कहा कि यदि प्रदेश के हित में कोई पहल की जा रही है तो उसमें कोई बुराई नहीं है। उन्होंने कहा कि धर्मांतरण से जुड़े कई मामले सामने आ रहे हैं और ऐसे मामलों को देखते हुए प्रशासनिक स्तर पर कदम उठाना उचित है।
यासूब अब्बास ने कहा कि कोई भी धर्म जबरन धर्म परिवर्तन का समर्थन नहीं करता। इस्लाम की शिक्षा का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि “दीन में कोई जबरदस्ती नहीं है” और जहां जबरदस्ती होती है, वहां धर्म की वास्तविक भावना नहीं रहती। उन्होंने कहा कि यदि बढ़ते मामलों को देखते हुए सरकार या राज्यपाल की ओर से कोई कदम उठाया जा रहा है तो उसे गलत नहीं कहा जा सकता।
राज्यपाल के संज्ञान के बाद तेज हुई चर्चा
उत्तर प्रदेश की राज्यपाल आनंदीबेन पटेल द्वारा KGMU और SGPGI से जुड़े कथित धर्मांतरण मामलों का संज्ञान लेने और मेडिकल व डेंटल कॉलेजों में धर्मांतरण रोकथाम केंद्र स्थापित करने के निर्देशों के बाद इस विषय पर बहस तेज हो गई है। इस बीच शिया धर्मगुरुओं ने एक ओर जबरन धर्मांतरण की निंदा की है, वहीं दूसरी ओर सभी मामलों की निष्पक्ष, तथ्यों पर आधारित और गंभीर जांच की आवश्यकता पर जोर दिया है