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Parliament Monsoon Session 2026: PM मोदी का ड्रीम मिशन पूरा करने अमित शाह ने कसी कमर! मानसून सत्र में पास होंगे ये 2 बड़े बिल, समझें सीटों का पूरा गणित

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Parliament Monsoon Session 2026: देश के राजनीतिक गलियारों में इस समय भारी हलचल है। संसद का आगामी मानसून सत्र 21 जुलाई से शुरू होने जा रहा है। सूत्रों के मुताबिक, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गृह मंत्री अमित शाह इस सत्र में दो ऐतिहासिक विधेयक महिला आरक्षण बिल (Women Reservation Bill) और परिसीमन बिल (Delimitation Bill) को दोबारा संसद के पटल पर रख सकते हैं। इस महामुकाबले से पहले विपक्षी गठबंधन (I.N.D.I.A.) के भीतर बड़े उलटफेर के संकेत मिलने लगे हैं। छुट्टियांव मौसमी आयोजन

Parliament Monsoon Session 2026: परिसीमन बिल पर शरद पवार गुट के बदले सुर

इस संवेदनशील मुद्दे पर कांग्रेस और राहुल गांधी को बड़ा झटका लग सकता है। राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (NCP) प्रमुख शरद पवार की बेटी और सांसद सुप्रिया सुले ने परिसीमन बिल को लेकर एक बड़ा बयान दिया है, जिससे विपक्षी खेमा हैरान है।

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सुप्रिया सुले ने कुछ शर्तों के साथ इस बिल को समर्थन देने के संकेत दिए हैं

क्या है सुप्रिया सुले की मांग? सुप्रिया सुले का कहना है कि अगर केंद्र सरकार परिसीमन पर ‘50% फॉर्मूला’ लाती है, तो उनकी पार्टी इस पर सकारात्मक विचार करेगी।

क्या है 50% फॉर्मूला? इसके तहत राज्यों में सीटों का निर्धारण केवल आबादी के अनुपात में नहीं होगा, बल्कि सीधे तौर पर लोकसभा की कुल सीटों में 50 प्रतिशत की बढ़ोतरी कर दी जाएगी।

गृह मंत्री अमित शाह ने पहले ही विपक्ष को भरोसा दिया था कि सरकार इसे लिखित में देने के लिए तैयार है। ऐसे में माना जा रहा है कि शरद पवार की पार्टी संसद में सरकार के पक्ष में खड़ी हो सकती है।

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महाराष्ट्र की राजनीति में आधी रात का घटनाक्रम राजनीति

शरद पवार की पार्टी के इस बदलते रुख के पीछे महाराष्ट्र में ताबड़तोड़ बैठकें हुई हैं।

मुंबई में शरद पवार गुट के प्रदेश अध्यक्ष जयंत पाटिल ने अचानक उपमुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस से मुलाकात की।

इसके तुरंत बाद अजीत पवार गुट के प्रफुल्ल पटेल और सुनील तटकरे भी फडणवीस से मिले।

ठीक इसी समय दिल्ली में गृह मंत्री अमित शाह और महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे के बीच एक उच्च स्तरीय बैठक हुई, जिसमें उद्धव गुट को छोड़कर आए 6 बागी सांसद भी मौजूद थे।

क्या सरकार के पास है 2/3 बहुमत?

संविधान संशोधन बिल (Constitutional Amendment Bill) को पास कराने के लिए सरकार को लोकसभा में दो-तिहाई बहुमत यानी कम से कम 360 सांसदों के समर्थन की जरूरत होगी। मौजूदा राजनीतिक समीकरणों के आधार पर नंबर गेम कुछ इस प्रकार दिखाई दे रहा है.

आखिर देश में परिसीमन (Delimitation) की जरूरत क्यों है?

सरल शब्दों में कहें तो परिसीमन का मतलब है देश की आबादी के हिसाब से लोकसभा क्षेत्रों की सीमाओं को दोबारा तय करना।

सीटों में बढ़ोतरी: नए बिल के लागू होने के बाद देश में लोकसभा सीटों की संख्या मौजूदा 543 से बढ़कर 815 से 850 के बीच हो जाएगी। इसके बाद ही महिलाओं के लिए 33% आरक्षण जमीन पर लागू हो पाएगा।

आबादी का बढ़ता बोझ: साल 1971 में जब देश की आबादी 55 करोड़ थी, तब 1 सांसद पर 10 लाख की आबादी का प्रतिनिधित्व था। आज 2026 में देश की आबादी बढ़कर 145 करोड़ हो चुकी है, जिसके चलते वर्तमान में 1 सांसद पर 26 लाख की भारी आबादी का बोझ है।

मानसून सत्र में पेश हो सकते हैं ये 2 बड़े संविधान संशोधन बिल

मोदी सरकार इस सत्र में विपक्ष के सामने दोतरफा रणनीति के तहत 2 बड़े कानून ला सकती है:

130वां संविधान संशोधन बिल: इसके तहत यदि कोई प्रधानमंत्री, मुख्यमंत्री या मंत्री 30 दिन से अधिक समय तक जेल में रहता है, तो उसे तुरंत पद से हटा दिया जाएगा।

131वां संशोधन बिल: इसके जरिए पहले से पारित हो चुके 33% महिला आरक्षण को सीधे परिसीमन (Delimitation) की प्रक्रिया से लिंक कर दिया जाएगा।

विपक्ष के लिए इस बार इन बिलों का विरोध करना भारी पड़ सकता है, क्योंकि आगामी राज्यों के विधानसभा चुनावों से ठीक पहले उन पर ‘महिला विरोधी’ और ‘भ्रष्टाचार समर्थक’ होने का ठप्पा लगने का खतरा रहेगा।

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