Rambhadracharya Court Notice: जगद्गुरु स्वामी रामभद्राचार्य की ओर से ब्राह्मणों की उपजातियों को लेकर की गई कथित टिप्पणी का विवाद अब अदालत तक पहुंच गया है। प्रयागराज की ACJM-8 अदालत ने शिकायतकर्ता सुरेश चंद्र उपाध्याय की याचिका पर मामले को दर्ज करने का आदेश दिया है। अदालत ने स्वामी रामभद्राचार्य को नोटिस जारी करते हुए अगली सुनवाई के लिए 12 अक्टूबर की तारीख तय की है।
मामला खास तौर पर ‘उपाध्याय’ समुदाय को लेकर की गई कथित टिप्पणी से जुड़ा है। इससे पहले इसी विवाद को लेकर इलाहाबाद हाईकोर्ट में भी याचिका दाखिल की गई थी। हालांकि हाईकोर्ट ने सीधे एफआईआर दर्ज कराने की मांग वाली याचिका को खारिज करते हुए याची को कानून में उपलब्ध वैधानिक रास्ता अपनाने की छूट दी थी।
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Rambhadracharya Court Notice: ‘छोटे ब्राह्मण’ कहे जाने पर शुरू हुआ विवाद
विवाद की शुरुआत रामभद्राचार्य की उस कथित टिप्पणी से जुड़ी है, जिसमें त्रिगुणायत, उपाध्याय और दीक्षित जैसे ब्राह्मण उपनामों या समुदायों को ‘छोटे ब्राह्मण’ कहे जाने का मुद्दा सामने आया था। इसके बाद टिप्पणी को लेकर विवाद बढ़ा और सोशल मीडिया पर भी इसे लेकर चर्चा हुई।
बाद में एक इंटरव्यू में रामभद्राचार्य ने अपनी टिप्पणी का संदर्भ स्पष्ट करते हुए कहा था कि उन्होंने यह बात सरयू-पारीण परंपरा के संदर्भ में कही थी। उनके अनुसार, पुराने समय में जो लोग बच्चों से धन लेकर उन्हें पढ़ाते थे, उन्हें उस संदर्भ में ‘छोटे ब्राह्मण’ कहा जाता था। उन्होंने यह भी कहा था कि अब जब उस अर्थ में धन लेकर पढ़ाने की बात नहीं है, तो उन्हें ‘छोटा’ कहना उचित नहीं है।
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हाईकोर्ट में भी दाखिल हुई थी याचिका
इसी विवाद से जुड़े एक अन्य मामले में वाराणसी निवासी अधिवक्ता रमेश उपाध्याय ने रामभद्राचार्य के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराने की मांग करते हुए इलाहाबाद हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया था।
याचिका में आरोप लगाया गया था कि रामभद्राचार्य की कथित टिप्पणियों से उपाध्याय समुदाय के लोगों को अपमान और मानसिक पीड़ा हुई। याचिका में धार्मिक व्यक्तित्वों और शंकराचार्यों के संबंध में की गई कथित टिप्पणियों का भी उल्लेख किया गया था।
हाईकोर्ट ने अपनाने को कहा था वैधानिक रास्ता
सितंबर 2026 में इलाहाबाद हाईकोर्ट ने एफआईआर दर्ज कराने की मांग वाली याचिका खारिज कर दी थी। कोर्ट ने कहा था कि यदि पुलिस एफआईआर दर्ज नहीं करती है तो पीड़ित व्यक्ति को पहले भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS) की धारा 173(4) और 175(3) के तहत उपलब्ध कानूनी उपाय अपनाने चाहिए और मजिस्ट्रेट के समक्ष जाना चाहिए।
कोर्ट ने याची को कानून के अनुसार उचित उपाय अपनाने की स्वतंत्रता भी दी थी। इसके बाद अब प्रयागराज की निचली अदालत में सुरेश चंद्र उपाध्याय की शिकायत पर मामला आगे बढ़ा है।
12 अक्टूबर को होगी अगली सुनवाई
ACJM-8 अदालत के आदेश के बाद मामले में अगली सुनवाई 12 अक्टूबर को होगी। इस दौरान शिकायत में लगाए गए आरोपों और उपलब्ध सामग्री के आधार पर आगे की कानूनी प्रक्रिया पर विचार किया जाएगा।
हालांकि, अदालत की ओर से शिकायत पर कार्रवाई का आदेश दिया जाना आरोपों के साबित होने के बराबर नहीं है। मामले में न्यायिक प्रक्रिया अभी आगे बढ़नी बाकी है।
अब 12 अक्टूबर को होने वाली सुनवाई में अदालत का अगला रुख महत्वपूर्ण होगा।