TMC Rebel MLAs Disqualification: पश्चिम बंगाल में नंदीग्राम और रेजीनगर सीटों पर होने वाले महत्वपूर्ण उपचुनाव और आगामी नगर निकाय चुनावों से पहले राज्य की राजनीति में एक बार फिर बड़ा भूचाल आ गया है। पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी की अगुवाई वाली तृणमूल कांग्रेस (TMC) से बगावत करने वाले नेताओं की मुश्किलें अब लगातार बढ़ती नजर आ रही हैं। खबर है कि बागी गुट के कम से कम 10 प्रमुख विधायकों को पश्चिम बंगाल विधानसभा सचिवालय की तरफ से कारण बताओ नोटिस थमाया गया है। ममता बनर्जी के वफादार खेमे ने विधानसभा अध्यक्ष से मांग की थी कि दलबदल कानून के तहत इन बागी विधायकों को अयोग्य ठहराया जाए। इसके साथ ही विधायकों की सदस्यता रद्द करने का यह विवाद अब देश की सर्वोच्च अदालत यानी सुप्रीम कोर्ट के दरवाजे तक भी पहुंच चुका है।
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TMC Rebel MLAs Disqualification: बागी विधायकों को 10 दिन का अल्टीमेटम
विधानसभा सचिवालय से नोटिस पाने वाले बागी विधायकों को 10 दिनों के भीतर अपना औपचारिक जवाब दाखिल करने का सख्त निर्देश दिया गया है। नोटिस पाने वाले नेताओं में बागी गुट के प्रमुख चेहरा ऋतब्रत बनर्जी के अलावा पूर्व मंत्री अरूप रॉय, फिरहाद हकीम, संदीपन साहा, अखरुजमान अंसारी, शिउली साहा, सबीना यास्मीन, बिप्लब मित्रा, जावेद खान और रथिन घोष जैसे बड़े नाम शामिल हैं। इस नोटिस के मिलते ही बागी खेमे में हलचल तेज हो गई है। विधायक अखरुजमान अंसारी ने कहा कि वे पार्टी के भीतर इस कानूनी नोटिस पर गंभीरता से चर्चा करेंगे और समय रहते विधानसभा अध्यक्ष को अपना उचित जवाब सौंपेंगे। उल्लेखनीय है कि वरिष्ठ टीएमसी नेता शोभनदेव चट्टोपाध्याय ने 7 जुलाई को ही विधानसभा अध्यक्ष रथिन बोस को पत्र लिखकर इन सभी बागी नेताओं की सदस्यता रद्द करने की मांग की थी।
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असली TMC कौन?
यह नोटिस ऐसे समय में आया है जब चुनाव आयोग (EC) के सामने ‘असली टीएमसी’ और पार्टी के चुनाव चिह्न को लेकर घमासान जारी है। आयोग ने ममता बनर्जी को इस विवाद पर अपना जवाब दाखिल करने के लिए 16 अक्टूबर तक का अंतिम अल्टीमेटम दिया है। पार्टी सांसद कल्याण बनर्जी ने जानकारी दी है कि आयोग ने 16 और 17 सितंबर को दोनों पक्षों को दिल्ली स्थित निर्वाचन सदन में सुनवाई के लिए बुलाया है। अगर जरूरत पड़ी तो 17 सितंबर की शाम तक अंतिम सुनवाई पूरी करके चुनाव आयोग दल के नाम और निशान पर अपना अंतरिम या अंतिम फैसला सुना सकता है। इससे पहले 12 सितंबर को आयोग ने ऋतब्रत बनर्जी के बागी गुट से अतिरिक्त दस्तावेज मांगे थे, जिस दौरान ममता गुट के डेरेक ओब्रायन, सागरिका घोष और साकेत गोखले जैसे शीर्ष सांसद भी वहां मौजूद रहे।
लोकसभा में भी बड़ा झटका
सदन के भीतर ही नहीं, बल्कि संसद में भी टीएमसी बड़े विभाजन का सामना कर रही है। लोकसभा में टीएमसी के पास कुल 27 सांसद थे, जिनमें से 20 बागी सांसदों ने अलग होकर ‘नेशनल सिटिजन्स पार्टी ऑफ इंडिया’ (NCPI) नाम के दल में अपना विलय कर लिया था, जिससे ममता खेमे के पास महज 7 सांसद रह गए हैं। इसी बीच बागी सांसद जगदीशचंद्र बसुनिया के इस दावे से खलबली मच गई थी कि दुर्गा पूजा के आसपास 17 बागी सांसद भाजपा में शामिल हो सकते हैं। हालांकि, बागी गुट के अन्य नेताओं और खुद भारतीय जनता पार्टी ने इस दावे की हवा निकालते हुए साफ कर दिया है कि ऐसा कोई विलय नहीं होने जा रहा है। बहरहाल, विधायकी रद्द होने के खतरे और चुनाव आयोग के रुख ने ममता बनर्जी को छोड़ने वाले बागी नेताओं की रातों की नींद उड़ा दी है।