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TMC Turmoil: NCPI की नई मुखिया बनी काकोली घोष, जल्द थाम सकती हैं NDA का दामन, 20 बागियों ने हिलाई TMC की नींव

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TMC Turmoil: पश्चिम बंगाल की राजनीति में आए बड़े भूचाल ने दिल्ली तक की सियासी दीवारें हिला दी हैं। तृणमूल कांग्रेस के भीतर सुलग रही बगावत की आग अब बड़े धमाके के साथ सामने आई है। ममता बनर्जी के खेमे से टूटे 20 सांसदों ने दलबदल कानून से बचने के लिए बहुत बड़ा दांव खेला है। इन बागी सांसदों ने एक बिल्कुल गुमनाम राजनैतिक दल, नेशनलिस्ट सिटीजन्स पार्टी ऑफ इंडिया एनसीपीआई में खुद का विलय कर लिया है। इतना ही नहीं, बागियों ने अब इस पार्टी पर पूरी तरह अपना कब्जा जमा लिया है। ममता बनर्जी की करीबी चार बार की सांसद काकोली घोष दस्तीदार को इसकी कमान सौंपकर राष्ट्रीय अध्यक्ष बनाया गया है।

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TMC Turmoil: ऐसे पलटी सत्ता की बाजी

इस उलटफेर की पटकथा बेहद होशियारी से लिखी गई। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार बागी गुट और एनसीपीआई के बीच पहले ही अंदरूनी समझौता हो चुका था। (TMC Turmoil) काकोली घोष की ताजपोशी से ठीक दो दिन पहले पार्टी की पुरानी अध्यक्ष शेवली कुंडू ने अपने पद से त्यागपत्र दे दिया था। इसके बाद तीस मई को काकोली घोष को सर्वसम्मति से नया मुखिया चुन लिया गया। रविवार को इस पूरे गुट ने लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला से मुलाकात की। सांसदों ने स्पीकर को इस विलय के दस्तावेज सौंपे, जिसके बाद से यह छोटी सी पार्टी अचानक सुर्खियों में छा गई है।

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अभिषेक बनर्जी से नाराजगी बनी बड़ी वजह

तृणमूल कांग्रेस के भीतर इतनी बड़ी टूट की मुख्य वजह ममता बनर्जी के भतीजे और पार्टी के अघोषित वारिस अभिषेक बनर्जी को माना जा रहा है। बागी नेताओं का आरोप है कि अभिषेक बनर्जी का बर्ताव बेहद घमंडी हो चुका है। (TMC Turmoil) उन्होंने पार्टी के पुराने और अनुभवी नेताओं को पूरी तरह से किनारे लगा दिया था। इसी मनमानी और अपमान की वजह से सांसदों में काफी समय से गुस्सा खौल रहा था, जो आखिरकार इस ऐतिहासिक बगावत के रूप में बाहर आया।

पर्दे के पीछे से भाजपा की रणनीति

इस पूरे राजनैतिक खेल में भारतीय जनता पार्टी भले ही सामने आकर कुछ नहीं बोल रही है, लेकिन पर्दे के पीछे से उसका पूरा वरदहस्त बागियों को मिला हुआ है। पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी, केंद्रीय मंत्री भूपेंद्र यादव और वरिष्ठ सांसद निशिकांत दुबे ने इस पूरे घटनाक्रम में रणनीतिकार की भूमिका निभाई है। (TMC Turmoil) बागी गुट की गोपनीय बैठकें सीधे केंद्रीय मंत्री भूपेंद्र यादव के दिल्ली आवास पर हुईं, जहां आगे का खाका तैयार किया गया।

लोकसभा अध्यक्ष को सौंपे गए पत्र में इन 20 सांसदों ने एक और बड़ा धमाका किया है। उन्होंने खुद को भाजपा के नेतृत्व वाले एनडीए गठबंधन का हिस्सा घोषित कर दिया है। (TMC Turmoil) सांसदों ने मांग की है कि चूंकि वे अब तक विपक्ष की कतारों में बैठते थे, इसलिए अब उनके नए राजनैतिक झुकाव को देखते हुए उन्हें सत्तापक्ष यानी एनडीए के साथ नई सीटें आवंटित की जाएं।

क्या है NCPI और आगे की राह

जिस एनसीपीआई को रातों-रात इतनी बड़ी ताकत मिली है, उसका इतिहास बेहद छोटा है। जनवरी दो हजार तेईस में पंजीकृत इस पार्टी का दफ्तर हावड़ा के सांकराइल में है। यह चुनाव आयोग की छोटी पार्टियों में से एक है जिसका कोई खास वजूद नहीं था। (TMC Turmoil) साल दो हजार तेईस के त्रिपुरा चुनाव में इसके एक उम्मीदवार को सिर्फ पांच सौ छतीस वोट मिले थे। लेकिन अब छह बार के वरिष्ठ सांसद सुदीप बंद्योपाध्याय के भी शामिल होने से इसकी ताकत बढ़ गई है। यदि स्पीकर ओम बिरला इस विलय को हरी झंडी दे देते हैं, तो संसद में कोई खाता न रखने वाली यह छोटी सी पार्टी अचानक देश की पांचवीं सबसे बड़ी पार्टी बनेगी और एनडीए में भाजपा के बाद दूसरा सबसे बड़ा दल बनकर इतिहास रच देगी।

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