राष्ट्रीय समाचार

allahabad high court: ‘ये थानेदार सिपाही के लायक भी नहीं… झूठों का झुंड’, HC ने यूपी के इन SP-SHO को जमकर सुनाया

Published

on

allahabad high court: इलाहाबाद हाई कोर्ट का उत्तर प्रदेश के सरकारी अफसरों को फटकार लगाने का सिलसिला जारी है. इस बार कोर्ट ने देवरिया के पुलिस कप्तान (SP) अभिजीत आर शंकर और एक थानेदार (SHO) को निशाने पर लिया. थाने की CCTV फुटेज ना होने से नाराज कोर्ट ने SP और SHO पर 5-5 लाख रुपये हर्जाना ठोकने तक की चेतावनी दे डाली. कोर्ट ने गैर-कानूनी हिरासत में रखे गए चार लोगों को 65,000 रुपये का मुआवजा देने का आदेश दिया. यह रकम SHO से वसूली जाएगी.

बुधवार, 9 सितंबर को जस्टिस अतुल श्रीधरन और जस्टिस दिवेश चंद्र सामंत ने CCTV कैमरों पर पुलिस अधिकारियों के जवाब पर नाराजगी जताई. कोर्ट में गैर-कानूनी हिरासत में लोगों को रखने का मामला आया, जिसके सबूत के तौर पर थाने का CCTV फुटेज चाहिए था, लेकिन पुलिस कोर्ट को फुटेज नहीं दे सकी. पुलिस ने CCTV कैमरा सिस्टम फेल होने, और हिरासत के समय की फुटेज ना होने जैसी बातें बताईं.

allahabad high court: कोर्ट ने बोला- ‘झूठों का झुंड’

कोर्ट के सामने हिरासत के समय का CCTV रिकॉर्ड पेश नहीं किया गया. लीगल वेबसाइट लाइव लॉ की रिपोर्ट के मुताबिक, पुलिस अधिकारियों की बातें सुनकर जस्टिस अतुल श्रीधरन ने अफसरों को ‘झूठों का झुंड’ तक करार दिया. जस्टिस श्रीधरन ने ऐसा तब कहा जब उन्होंने SHO से उन हालात के बारे में पूछा, जिनमें कथित तौर पर CCTV सिस्टम ने काम करना बंद कर दिया था और बाद में उसे ठीक किया गया था.

यह भी पढ़ें-Ammy Virk Convoy Attacked: एमी विर्क को जान से मारने की कोशिश, चलाई 7 गोलियाँ, जाने इनके परिवार और नेटवर्थ के बारे में

याचिका दायर करने वालों ने आरोप लगाया कि देवरिया के गौरीगंज थाने में उन्हें 13 अप्रैल 2026 से 23 अप्रैल 2026 के बीच गैर-कानूनी हिरासत में रखा गया. पुलिस से CCTV रिकॉर्ड मांगा गया. पुलिस ने हिरासत के पूरे समय तक का CCTV सिस्टम फेल बताया.

मुआवाजा देने का आदेश

इस पर कोर्ट ने उत्तर प्रदेश सरकार को निर्देश दिया कि वो मामले के तीन याचिकाकर्ताओं में हरेक को 20,000 रुपये और एक याचिकाकर्ता को 5,000 रुपये अदा करे. यह पैसा उन्हें अलग-अलग समय तक गैर-कानूनी हिरासत में रखने के लिए दिया जाएगा. कोर्ट ने निर्देश दिया कि कुल 65,000 रुपये का मुआवजा SHO की सैलरी से वसूला जाएगा.

हाई कोर्ट ने CCTV को लेकर थानेदार का पीछा नहीं छोड़ा. SHO से पूछा,

“अगर कैमरा 14 अप्रैल से काम कर रहा था, तो रिकॉर्डिंग कहां है? आप 2 महीने तक SHO थे. रिकॉर्डिंग कहां है?”

SHO ने बताया कि 12 अप्रैल को CCTV सिस्टम में खराबी आ गई. कोर्ट ने पूछा कि क्या CCTV सिस्टम की मरम्मत को जनरल डायरी (GD) में दर्ज किया गया. SHO ने कहा कि ऐसी कोई GD एंट्री नहीं की गई. इस बीच, SP ने कोर्ट को बताया कि उन्हें CCTV कैमरा काम नहीं करने की जानकारी नहीं दी गई थी.

देवरिया SP को फटकार

इसके बाद हाई कोर्ट ने पुलिस कप्तान से ही पूछ लिया. देवरिया SP अभिजीत आर शंकर से जवाब तलब किया गया. कोर्ट ने उनसे पूछा कि CCTV की लापरवाही को लेकर क्या उन्होंने SHO के खिलाफ कोई कार्रवाई की. इस पर SP ने सीधे कोर्ट से माफी मांगी. तब जस्टिस अतुल श्रीधरन ने कहा,

यह भी पढ़ें-Deepika Padukone Maternity Photoshoot: 2 साल की हुई दुआ, रणवीर सिंह ने शेयर की हैप्पी फैमिली फोटो

“कोर्ट से माफी मत मांगो, जनता से माफी मांगो.”

जस्टिस श्रीधरन ने कहा,

“लगाएं क्या 5-5 लाख रुपये का कंपनसेशन आप दोनों पर?”

‘ये SHO सिपाही रहने के काबिल नहीं’

कोर्ट ने SP से SHO के खिलाफ कार्रवाई के बारे में आगे पूछा,

“क्या आपने उन्हें सस्पेंड किया, उनकी नौकरी खत्म की? एक SHO जो GD इन्क्वायरी तक नहीं बना सकता, उसे टर्मिनेट कर देना चाहिए. वो सिपाही रहने के काबिल भी नहीं.”

SP को फटकार लगी कि जब SHO को गलती सामने आ गई, तो उनके खिलाफ कार्रवाई क्यों नहीं हुई. SHO को सजा क्यों नहीं दी गई. SP ने कोर्ट को बताया कि SHO को हटाकर क्राइम ब्रांच भेज दिया गया. उनके जवाब से कोर्ट संतुष्ट नहीं हुआ.

इलाहाबाद हाई कोर्ट ने यह भी गौर किया कि हलफनामे में सुप्रीम कोर्ट के उस आदेश का जिक्र था, जिसके तहत पुलिस थानों में CCTV कवरेज जरूरी है. इसमें बताया गया कि उत्तर प्रदेश सरकार ने देवरिया जिले के पुलिस स्टेशनों के लिए 46.46 लाख रुपये जारी किए थे. हलफनामे में रकम जारी करने की तारीख नहीं थी.

कोर्ट ने इस बात पर भी गौर किया कि SP ने आगे जो कार्रवाई की, उसकी तारीख 14 अगस्त 2026 थी. माने, ये कार्रवाई हाई कोर्ट के 4 अगस्त के आदेश के बाद की गई. इस पर कोर्ट ने कहा,

“पहली नजर में ऐसा लगता है कि इस कोर्ट में दाखिल याचिका पर 4 अगस्त 2026 को आए आदेश के जवाब में जिले के अधिकारियों ने एक्शन लेना शुरू किया.”

हाई कोर्ट ने SP को 4 अगस्त से पहले की गई कार्रवाई के बारे में बताने के लिए कोर्ट में निजी तौर पर मौजूद रहने का निर्देश दिया था. कोर्ट ने यह भी सवाल उठाया कि CCTV का काम पूरा हुए बिना ही इसकी जिम्मेदार एजेंसी का पूरा पैसा दे दिया गया, जबकि ऐसी एजेंसी को ब्लैकलिस्ट किया जाना चाहिए था.

Leave a Reply

आपका ईमेल पता प्रकाशित नहीं किया जाएगा. आवश्यक फ़ील्ड चिह्नित हैं *

Trending

Exit mobile version