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Ayodhya Ram Mandir: कौन हैं SIT प्रमुख? 420 की FIR को लेकर Akhilesh Yadav ने खोली थी पोल, जानें पूरा मामला

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Ayodhya Ram Mandir: अयोध्या राम मंदिर दान मामले की जांच कर रही विशेष जांच टीम (SIT) के प्रमुख IAS अधिकारी विजय विश्वास पंत इन दिनों राजनीतिक विवाद के केंद्र में हैं। समाजवादी पार्टी प्रमुख अखिलेश यादव ने SIT की निष्पक्षता पर सवाल उठाए थे जिसके बाद राम मंदिर में कथित दान घोटाले की जांच कर रही विशेष जांच टीम (SIT) अब खुद सवालों के घेरे में आ गई है। SIT का नेतृत्व कर रहे 2004 बैच के IAS अधिकारी और लखनऊ मंडलायुक्त विजय विश्वास पंत का नाम एक पुराने धोखाधड़ी और फर्जीवाड़े के मामले में सामने आया है। वर्ष 2019 में दर्ज इस FIR में पंत समेत पश्चिमी उत्तर प्रदेश विद्युत वितरण निगम (WEDC) के 14 अधिकारियों को आरोपी बनाया गया था। डेमोग्राफ़िक्स

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रिपोर्ट के अनुसार, मामला उस समय का है जब विजय विश्वास पंत WEDC के प्रबंध निदेशक (MD) पद पर तैनात थे। उन पर आरोप है कि उनके कार्यकाल के दौरान विभागीय रिकॉर्ड में कथित हेरफेर और भुगतान से जुड़े विवाद को लेकर पुलिस केस दर्ज हुआ था। हालांकि, शिकायत के मुख्य आरोप अन्य अधिकारियों के खिलाफ बताए गए हैं और पंत की भूमिका पर अंतिम निष्कर्ष अभी जांच के अधीन है।

Ayodhya Ram Mandir: 2019 में दर्ज हुई थी धोखाधड़ी और फर्जीवाड़े की FIR

मेरठ के परीक्षितगढ़ थाने में फरवरी 2019 में दर्ज FIR में भारतीय दंड संहिता की धारा 420 (धोखाधड़ी) और 465 (जालसाजी) के तहत मामला दर्ज किया गया था। यह शिकायत बिजली विभाग के ठेकेदार शिवकुमार शर्मा ने दर्ज कराई थी।

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शर्मा की फर्म दुर्गा इलेक्ट्रिकल्स को वर्ष 2007 में अंबेडकर ग्राम विकास योजना के तहत तीन गांवों में विद्युतीकरण का काम मिला था। ठेकेदार का आरोप था कि काम पूरा होने के बाद भी विभागीय अधिकारियों ने भुगतान रोक दिया और सरकारी दस्तावेजों में बदलाव कर काम की वास्तविक मात्रा को कम दिखाया गया।

शिकायतकर्ता ने आरोप लगाया कि अधिकारियों ने रिकॉर्ड में करेक्शन फ्लूड और ओवरराइटिंग का इस्तेमाल किया, जिससे भुगतान की राशि प्रभावित हुई। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि भुगतान जारी करने के बदले कमीशन की मांग की गई और विरोध करने पर उन्हें परेशान किया गया।

जांच पर भी उठ चुके हैं सवाल

यह मामला पिछले कई वर्षों से कानूनी प्रक्रिया में उलझा हुआ है। पुलिस ने इस केस को बंद करने की कोशिश दो बार की, लेकिन अदालत ने दोनों बार जांच में खामियां बताते हुए क्लोजर रिपोर्ट खारिज कर दी। मेरठ के मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट (CJM) की अदालत ने मार्च 2021 में पहली क्लोजर रिपोर्ट को खारिज करते हुए दोबारा जांच के आदेश दिए थे। इसके बाद पुलिस ने फिर जांच की, लेकिन दूसरी रिपोर्ट भी अदालत की कसौटी पर खरी नहीं उतरी।

22 मार्च 2023 को अदालत ने दूसरी क्लोजर रिपोर्ट को भी खारिज कर दिया और जांच में गंभीर लापरवाही का उल्लेख करते हुए वरिष्ठ अधिकारी स्तर से जांच कराने का निर्देश दिया। अदालत ने कहा था कि जांच में कई महत्वपूर्ण पहलुओं की अनदेखी की गई। दस्तावेजों की वैज्ञानिक जांच नहीं कराई गई और कई जरूरी गवाहों के बयान भी दर्ज नहीं किए गए।

SIT प्रमुख पर विपक्ष का हमला

विजय विश्वास पंत का नाम पुराने मामले में सामने आने के बाद विपक्ष ने योगी सरकार पर निशाना साधना शुरू कर दिया है। कांग्रेस ने आरोप लगाया कि जिस अधिकारी पर खुद धोखाधड़ी और फर्जीवाड़े का मामला लंबित है, उसे राम मंदिर जैसे संवेदनशील मामले की जांच की जिम्मेदारी देना कई सवाल खड़े करता है। कांग्रेस नेता सुरेंद्र राजपूत ने कहा कि राम मंदिर दान मामले में पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए निष्पक्ष जांच जरूरी है, लेकिन SIT के नेतृत्व को लेकर ही सवाल खड़े हो गए हैं।

वहीं, समाजवादी पार्टी प्रमुख अखिलेश यादव ने भी SIT की विश्वसनीयता पर हमला बोला। उन्होंने कहा कि जब जांच टीम से जुड़े व्यक्ति पर ही FIR दर्ज हो तो ऐसी जांच की निष्पक्षता पर सवाल उठना स्वाभाविक है।

पुलिस बोली- पुराने मामले की जांच जारी

मेरठ के डिप्टी एसपी विश्व ज्योति राय, जो इस पुराने मामले की जांच कर रहे हैं, ने कहा कि मामले में अभी विवेचना जारी है। पुलिस अधिकारी ने बताया कि जांच प्रक्रिया पूरी नहीं हुई है और मामले से जुड़े लोगों से साक्ष्य मांगे जा रहे हैं।

राम मंदिर दान मामले में अंतिम रिपोर्ट का इंतजार

विजय विश्वास पंत की अध्यक्षता वाली SIT अयोध्या राम मंदिर में कथित दान गड़बड़ी की जांच कर रही है। SIT ने अपनी प्रारंभिक रिपोर्ट उत्तर प्रदेश सरकार को सौंप दी है, जबकि अंतिम रिपोर्ट जुलाई 2026 के अंत तक आने की उम्मीद है।

अब निगाहें SIT की अंतिम रिपोर्ट पर हैं। वहीं, विजय विश्वास पंत से जुड़े पुराने मामले को लेकर उठ रहे राजनीतिक सवालों ने इस जांच को और अधिक चर्चा में ला दिया है। फिलहाल बड़ा सवाल यही है कि क्या पुराने मामले का असर राम मंदिर दान जांच की विश्वसनीयता पर पड़ेगा या SIT अपनी रिपोर्ट के जरिए उठ रहे सवालों का जवाब दे पाएगी।

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