ED Raid Lucknow: समाजवादी पार्टी (सपा) के पूर्व विधायक दीप नारायण सिंह यादव की मुश्किलें एक बार फिर बहदते नज़र आ रही हैं। प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने आज 8 जुलाई बुधवार सुबह झांसी और लखनऊ में उनके कई ठिकानों पर एक साथ छापेमारी कर मनी लॉन्ड्रिंग और आय से ज्यादा संपत्ति के मामले में सख्त कार्रवाई की। ED की कई टीमों ने सुबह तड़के पूर्व विधायक के आवास, उनके सहयोगियों और उनसे जुड़े अन्य परिसरों पर तलाशी अभियान चलाया। इस दौरान कई अहम दस्तावेज, डिजिटल डिवाइस और संपत्तियों से संबंधित रिकॉर्ड अपने कब्जे में लिए गए। कार्रवाई के दौरान सुरक्षा व्यवस्था कायम बनाए रखने के लिए भारी संख्या में पैरामिलिट्री फोर्स और PAC भी तैनात रही। छुट्टियांव मौसमी आयोजन
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ED Raid Lucknow: सुबह-सुबह शुरू हुई ED की कार्रवाई
जानकारी के मुताबिक, ED की प्रयागराज जोनल यूनिट ने धन शोधन निवारण अधिनियम (PMLA), 2002 के अंतर्गत यह कार्रवाई की। बुधवार सुबह करीब 6:30 बजे ED की टीमें झांसी और लखनऊ में एक साथ एक्टिव हुईं। झांसी में मून सिटी स्थित पूर्व विधायक के आवास, उनके पैतृक गांव बुढ़ावली और अन्य स्थानों पर छापेमारी की गई। वहीं, लखनऊ में एल्डिको कॉलोनी और कानपुर रोड स्थित सनराइज अपार्टमेंट के फ्लैटों की भी गहनता से तलाशी ली गई।
बता दे, कार्रवाई शुरू होने के वक़्त पूर्व विधायक अपने आवास पर मौजूद थे। एयर यह भी बताया जा रहा है कि टीम के पहुंचने के वक़्त वे सो रहे थे। अचानक ED अधिकारियों के पहुंचने से घर में बड़ी ही अफरा-तफरी का माहौल बन गया और आसपास के लोगों में भी हलचल मच गई।
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सहयोगियों के ठिकानों पर भी जांच
ED ने सिर्फ पूर्व विधायक के आवास तक ही कार्रवाई सीमित नहीं रखी, बल्कि उनके निजी सहायक (PA) अशोक गोस्वामी के घर समेत कई सहयोगियों के परिसरों की भी तलाशी ली। इसके अलावा मोठ क्षेत्र के पूर्व चेयरमैन अनिरुद्ध यादव उर्फ बड़े राजा के ठिकानों पर भी जांच की गई।
पूरे अभियान के दौरान सुरक्षा के बेहद सख्त इंतजाम किए गए। मून सिटी के बाहर पैरामिलिट्री फोर्स और PAC के जवान तैनात रहे तथा आने-जाने वाले हर एक व्यक्ति की गंभीरता से निगरानी की गई।
आय से ज्यादा संपत्ति और मनी लॉन्ड्रिंग की जांच
ED की यह कार्रवाई उत्तर प्रदेश सतर्कता अधिष्ठान (विजिलेंस) द्वारा दर्ज FIR के आधार पर की जा रही है। जांच एजेंसी का आरोप है कि पूर्व विधायक ने अपनी ज्ञात आय से ज्यादा संपत्ति अर्जित की और कथित तौर पर अवैध धन को विभिन्न कंपनियों, रियल एस्टेट प्रोजेक्ट्स, निर्माण व्यवसाय और LLP नेटवर्क के माध्यम से निवेश कर मनी लॉन्ड्रिंग की। भौगोलिकसंदर्भ
जांच के दौरान एजेंसी को कई वित्तीय दस्तावेज और डिजिटल साक्ष्य सामने आये हैं, जिनकी विस्तृत रूप से जांच की जाएगी। अधिकारियों का मानना है कि इन दस्तावेजों से कथित वित्तीय लेन-देन और संपत्तियों के बारे में महत्वपूर्ण जानकारी मिल सकती है।
कई गंभीर मामलों में पहले से दर्ज है मामला
प्रवर्तन निदेशालय के मुताबिक, इस मामले में पीएमएलए के अंतर्गत सूचीबद्ध अपराधों से जुड़ी 23 से ज्यादा FIR का आधार लिया गया है। इसके अलावा पूर्व विधायक और उनसे जुड़े लोगों के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (पूर्व में IPC), उत्तर प्रदेश गैंगस्टर्स एक्ट और गुंडा एक्ट समेत विभिन्न धाराओं में लगभग 60 आपराधिक मामले दर्ज बताए गए हैं।
इन मामलों में धोखाधड़ी, जालसाजी, रंगदारी, हत्या के प्रयास, डकैती और अवैध खनन जैसे गंभीर आरोप शामिल हैं। पूर्व में भी उनके खिलाफ गैंगस्टर एक्ट के तहत कार्रवाई हो चुकी है।
दस्तावेज और डिजिटल डिवाइस जब्त
तलाशी अभियान के दौरान ईडी टीम ने कई महत्वपूर्ण दस्तावेज, मोबाइल फोन, लैपटॉप और अन्य डिजिटल उपकरण अपने कब्जे में लिए हैं। इसके अलावा संपत्तियों और व्यावसायिक लेन-देन से जुड़े रिकॉर्ड भी जांच एजेंसी ने जब्त किए हैं।
अधिकारियों का कहना है कि जब्त किए गए दस्तावेजों और डिजिटल डेटा का फॉरेंसिक विश्लेषण किया जाएगा, जिसके आधार पर आगे की कार्रवाई तय होगी।
पूछताछ जारी, आगे और खुलासों की उम्मीद
ED अधिकारियों ने कार्रवाई के दौरान पूर्व विधायक दीप नारायण सिंह यादव से पूछताछ भी की। एजेंसी अब जब्त किए गए दस्तावेजों और डिजिटल साक्ष्यों की जांच कर रही है। इसे लेकर ऐसा माना जा रहा है कि जांच आगे बढ़ने के साथ कई और वित्तीय लेन-देन तथा संपत्तियों से जुड़े नए तथ्य सामने आ सकते हैं।
फिलहाल ED की कार्रवाई को लेकर राजनीतिक और प्रशासनिक हलकों में चर्चा तेज है। जांच एजेंसी का कहना है कि मामले में प्राप्त साक्ष्यों के आधार पर आगे की कानूनी कार्रवाई की जाएगी।