मनोरंजन
Javed Akhtar On Muslim Community: जावेद अख्तर ने हिंदू धर्म की तुलना इस्लाम से की कहा- दूसरों पर उंगली उठाते हैं, अपने समय आँखे बंद
Published
8 घंटे agoon

Javed Akhtar On Muslim Community: बॉलीवुड राइटर और गीतकार जावेद अख्तर जो अक्सर अपने बेबाक अंदाज के लिए जाने जाते हैं। कल उन्होंने अपना 81वॉ जन्मदिन मनाया है। बता दे कि वो धार्मिक मुद्दों पर अपनी राय बेबाक अंदाज से रखते हैं। जिसकी वजह से कई बार उनको सोशल मीडिया पर ट्रोलर्स का सामना भी करना पड़ता है। तो वहीं एक बार फिर से जावेद अख्तर सुर्खियों में आ गए हैं। उन्होंने हिंदू और मुस्लिम समुदाय पर बात की है।
Javed Akhtar On Muslim Community: जावेद अख्तर ने मुस्लिम समुदाय पर की टिप्पणी
हाल ही में एक इंटरव्यू में जावेद अख्तर ने हिंदू धर्म की तुलना इस्लाम से की। एक अखिल भारतीय मीडिया आउटलेट को दिए साक्षात्कार में जावेद ने कहा, “अरफा खानम शेरवानी, मोहम्मद जुबैर, असदुद्दीन ओवैसी और कई अन्य लोग हिंदू समाज की कमियों, अन्याय या सामाजिक बुराइयों के मुद्दे पर तीखी टिप्पणी करते हैं। वे मुखर होकर बोलते हैं। लेकिन, जब उनके अपने समुदाय का मुद्दा उठता है, तो वे मानो चुप्पी साध लेते हैं।”
उन्होंने अपनी बात को स्पष्ट करते हुए कहा, “हिंदू एक ऐसा समुदाय है जो अपने धर्म में हुई किसी भी गलती को गलती मानकर स्वीकार करता है। लेकिन मुसलमान समस्याओं पर बात नहीं करते और हमेशा दूसरों पर उंगली उठाते हैं।” जावेद अख्तर हमेशा से ही बेबाक राय रखते आए हैं। एक बार फिर उन्होंने हिंदू और मुस्लिम समुदायों के अलग-अलग नजरियों पर अपनी राय रखी है। उन्होंने देश के जाने-माने मुस्लिम पत्रकारों से लेकर राजनेताओं तक, सभी को निशाना बनाया है। हिंदू समुदाय में कई लोग अपने रीति-रिवाजों और परंपराओं की आलोचना करते हैं। वे अपने समाज की कमियों पर भी सवाल उठाते हैं। लेकिन मुस्लिम समुदाय में, अपने ही समुदाय के बहुत कम लोग हैं जो आंतरिक बुराइयों या समस्याओं के बारे में खुलकर बोलते हैं। ऐसे लोगों की संख्या वास्तव में बहुत कम है। यही कड़वी सच्चाई है। वे हमेशा अपने बारे में चुप रहते हैं।”
जावेद अख्तर ने अपने बारे में बात करते हुए आगे कहा, “मैं नास्तिक हूँ। लेकिन यह भी सच है कि मेरा जन्म एक मुस्लिम परिवार में हुआ है। इसलिए मेरा कर्तव्य है कि मैं सबसे पहले अपने समुदाय की कमियों को उजागर करूँ। भारत में कई हिंदू हैं जो अपने समाज की समस्याओं के खिलाफ लड़ते हैं। लेकिन कितने मुसलमान गर्व से कह सकते हैं कि हमारे समाज में सब कुछ ठीक है – ऐसा नहीं है, यह स्थिति लंबे समय तक नहीं चल सकती।”
