Lawrence Bishnoi Gang: इन दिनों हर ओर चर्चा में बना हुआ लॉरेंस बिश्नोई गैंग अब सिर्फ एक आपराधिक गिरोह नहीं, बल्कि इंटरनेट (Internet) और विकेंद्रीकृत नेटवर्क (Decentralized Network) के जरिए काम करने वाला ऐसा संगठित नेटवर्क बन चुका है, जिसकी शाखाएं कई देशों तक फैली हुई हैं। गैंग में भर्ती से लेकर रेकी, हथियार पहुंचाने और वारदात को अंजाम देने तक हर काम अलग-अलग लोगों के जरिए कराया जाता है। अब इसी नेटवर्क पर अमेरिका (America) ने बड़ी कार्रवाई करते हुए कई देशों में अभियान चलाया है और दर्जनों संदिग्धों को गिरफ्तार किया है। इस बीच सबसे बड़ा सवाल यह बन गया है कि ये इतना बड़ा नेटवर्क आखिर संचालित कैसे होता है और क्या ये मुंबई की डी कंपनी जैसा ही है या उससे अलग? आइए उसकी पड़ताल करते हैं।
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Lawrence Bishnoi Gang: कई देशों में बड़ी कार्रवाई
लॉरेंस बिश्नोई गैंग (Lawrence Bishnoi Gang) पर अमेरिका (America) में बड़ी कार्रवाई की गई है। अमेरिका, कनाडा (Canada) और यूरोप (Europe) से कम से कम 24 संदिग्धों को गिरफ्तार किया गया है। इन सभी पर भारत (India) से जुड़े तीन संगठित अपराधी गिरोहों से संबंध होने के आरोप हैं। इतिहास
इस पूरे अभियान को ‘ऑपरेशन हार्ड बॉल’ (Operation Hardball) नाम दिया गया है। गिरफ्तार किए गए लोगों पर कई गंभीर आरोप लगाए गए हैं, जिनमें कनाडा में खालिस्तानी आतंकी हरदीप सिंह निज्जर (Hardeep Singh Nijjar) की हत्या की साजिश भी शामिल है।
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अभिनेता की हत्या की साजिश का भी जिक्र
अमेरिका के डिपार्टमेंट ऑफ जस्टिस (Department of Justice-DoJ) ने कहा है कि जेल में बंद गैंगस्टर लॉरेंस बिश्नोई (Lawrence Bishnoi) ने भारत के एक जाने-माने अभिनेता ‘एसके’ (SK) की हत्या का ऐलान इसलिए किया था ताकि लोगों के मन में डर पैदा हो जाए।
हालांकि अमेरिका के रिकॉर्ड में किसी अभिनेता का नाम दर्ज नहीं है, लेकिन यह संकेत बॉलीवुड (Bollywood) अभिनेता सलमान खान (Salman Khan) की ओर माना जा रहा है।
लॉरेंस बिश्नोई वर्ष 2023 से अहमदाबाद (Ahmedabad) की हाई सिक्योरिटी जेल (High Security Jail) में बंद है।
37 की पहचान, 24 गिरफ्तार, 10 की तलाश
आठ जुलाई को डिपार्टमेंट ऑफ जस्टिस (DoJ) ने पंजाब (Punjab) से जुड़े तीन आपराधिक संगठनों के खिलाफ अभियोग का ऐलान किया था। ये तीनों गिरोह भारत, कनाडा, अमेरिका और यूरोप में सक्रिय बताए गए हैं।
डीओजे के अनुसार कुल 37 लोगों की पहचान की गई है। इनमें से 24 लोगों को अमेरिका, कनाडा और स्पेन (Spain) से गिरफ्तार किया गया है, जबकि 10 संदिग्धों की तलाश अभी भी जारी है। समयऔर कैलेंडर
लालच देकर गैंग में किया जाता है शामिल
चार्जशीट (Charge Sheet) के मुताबिक लॉरेंस बिश्नोई गैंग भारत में गरीब नाबालिगों को लालच देकर अपने नेटवर्क से जोड़ता है। उन्हें दौलत, शोहरत और सुरक्षा का वादा किया जाता है।
इसके बाद कई लोगों को स्टूडेंट वीजा (Student Visa) या फॉरेन वर्क वीजा (Foreign Work Visa) के जरिए अमेरिका और कनाडा भेज दिया जाता है, जहां वे गैंग के नेटवर्क का हिस्सा बन जाते हैं।
विकेंद्रीकृत नेटवर्क की वजह से पकड़ना मुश्किल
डिपार्टमेंट ऑफ जस्टिस के अनुसार लॉरेंस बिश्नोई गैंग ने विकेंद्रीकरण की नीति अपनाई है। गैंग की कई शाखाएं हैं और इनमें शामिल लोगों को एक-दूसरे के बारे में बहुत कम जानकारी होती है।
यही वजह है कि अगर कोई सदस्य पकड़ा भी जाता है तो बाकी नेटवर्क सुरक्षित रहता है और जांच एजेंसियों को पूरे गिरोह की जानकारी नहीं मिल पाती।
डी कंपनी से अलग है बिश्नोई सिंडिकेट
लॉरेंस बिश्नोई सिंडिकेट (Bishnoi Syndicate) की तुलना अब दाऊद इब्राहिम (Dawood Ibrahim) की डी कंपनी (D-Company) से की जा रही है। हालांकि दोनों के काम करने का तरीका अलग बताया गया है।
जहां दाऊद इब्राहिम दुबई (Dubai) या कराची (Karachi) में रहकर फोन के जरिए अपने शूटरों को निर्देश देता था और हवाला (Hawala) के जरिए पैसों का लेनदेन होता था, वहीं लॉरेंस बिश्नोई का नेटवर्क इंटरनेट मॉडल पर चलता है।
इस गैंग का कोई एक अड्डा नहीं है। एक सदस्य गोल्डी बराड़ (Goldy Brar) अगर कनाडा में है तो दूसरा रोहित गोदारा (Rohit Godara) किसी दूसरे देश में और अनमोल बिश्नोई (Anmol Bishnoi) किसी अन्य देश में सक्रिय हो सकता है।
कॉर्पोरेट स्टाइल में बंटा हुआ है पूरा नेटवर्क
जानकारी के मुताबिक लॉरेंस बिश्नोई गैंग कॉर्पोरेट (Corporate) की तरह काम करता है। इसमें भर्ती का बड़ा माध्यम सोशल मीडिया (Social Media) है। भर्ती के बाद लोगों को अलग-अलग जिम्मेदारियां दी जाती हैं।
गैंग में काम इस तरह बांटा जाता है कि शूटर को भी यह नहीं पता होता कि वह किसके कहने पर गोली चला रहा है। कोई हथियार उपलब्ध कराता है, कोई रेकी करता है और हमला करने का आदेश किसी दूसरे व्यक्ति से आता है।
युवाओं को ऐसे जोड़ता है गैंग
लॉरेंस बिश्नोई गैंग पंजाब, हरियाणा (Haryana) और राजस्थान (Rajasthan) के गांवों के युवाओं को इंटरनेट के जरिए अपने नेटवर्क में शामिल करता है।
शुरुआत में उन्हें रेकी या हवाई फायरिंग जैसे छोटे काम दिए जाते हैं और बदले में पैसे दिए जाते हैं। गैंग उन्हें रॉबिनहुड (Robin Hood) जैसा बनने का सपना दिखाता है।
अगर कोई युवक पुलिस की नजर में आ जाता है तो उसके फर्जी नाम से पासपोर्ट बनवाकर उसे तुर्की (Turkey), पुर्तगाल (Portugal), साइप्रस (Cyprus) या अजरबैजान (Azerbaijan) जैसे देशों में भेज दिया जाता है। कई मामलों में डोंकी रूट (Donkey Route) के जरिए उसे कनाडा या अमेरिका भी पहुंचाया जाता है।