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Supreme Court News: राष्ट्र पुत्र नहीं सुभाष चंद्र बोस! सुप्रीम कोर्ट ने खारिज की याचिका, कहा- जाओ, वरना लगेगा जुर्माना

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Supreme Court News: देश की सबसे बड़ी अदालत ने एक बार फिर ऐसी जनहित याचिका को खारिज कर दिया है, जिसमें स्वतंत्रता सेनानी नेताजी सुभाष चंद्र बोस और आजाद हिंद फौज को लेकर बड़ी मांगें उठाई गई थीं। याचिका में कहा गया था कि यह घोषित किया जाए कि आजाद हिंद फौज ने भारत को आजादी दिलाई थी। साथ ही नेताजी सुभाष चंद्र बोस को ‘राष्ट्र पुत्र’ घोषित करने और 21 अक्टूबर 1943 को राष्ट्रीय दिवस के रूप में मनाने की भी मांग की गई थी। इसके अलावा 23 जनवरी 1897 यानी नेताजी की जयंती को भी राष्ट्रीय दिवस घोषित करने का अनुरोध किया गया था।

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Supreme Court News: पहले भी खारिज हो चुकी है ऐसी याचिका

इस मामले की सुनवाई करते हुए मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली पीठ ने साफ कहा कि इसी याचिकाकर्ता की ओर से पहले भी इसी तरह की याचिका दाखिल की जा चुकी है, जिसे अदालत पहले ही खारिज कर चुकी है। उस समय भी सुप्रीम कोर्ट ने साफ कर दिया था कि इस तरह के मुद्दे न्यायिक समीक्षा के दायरे में नहीं आते और इन्हें संबंधित प्राधिकरण के सामने उठाया जाना चाहिए।

“पब्लिसिटी के लिए दायर की गई याचिका”

सुप्रीम कोर्ट ने इस बार याचिकाकर्ता के रवैये पर नाराजगी भी जाहिर की। अदालत ने कहा कि पहले से स्पष्ट रुख होने के बावजूद, याचिकाकर्ता ने यह याचिका दोबारा दायर की है, जो सिर्फ पब्लिसिटी पाने की कोशिश लगती है। कोर्ट ने इस तरह की याचिकाओं को गंभीरता से न लेने की बात कही और इसे तुच्छ करार दिया।

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जुर्माने की भी चेतावनी

मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत ने याचिकाकर्ता को साफ चेतावनी दी कि भविष्य में इस तरह की याचिकाएं दाखिल न करें, वरना उन पर जुर्माना लगाया जा सकता है। अदालत ने सख्त लहजे में कहा कि अब ऐसी याचिकाओं को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।

रजिस्ट्री को भी दिए गए सख्त निर्देश

सुप्रीम कोर्ट ने अपनी रजिस्ट्री को भी निर्देश दिए कि याचिकाकर्ता की ओर से इसी तरह के मुद्दों पर आने वाली किसी भी नई जनहित याचिका पर विचार न किया जाए। सुनवाई के दौरान कोर्ट ने याचिकाकर्ता से साफ शब्दों में कहा कि अब आप जाइए, नहीं तो हम आप पर और जुर्माना लगा देंगे।

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