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Tirupati Laddu Controversy: तिरुपति लड्डू में ‘Beef Fat’ का सच आया सामने! CBI की फाइनल चार्जशीट ने खोल दी सबकी पोल, भक्त रह गए दंग

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Tirupati Laddu Controversy: तिरुमाला मंदिर के प्रसादम को लेकर हुए उस महा-विवाद का सच आखिरकार सामने आ गया है जिसने पूरे देश की आस्था को झकझोर कर रख दिया था। क्या वाकई लड्डू में BEEF था या यह सिर्फ एक सियासी और तकनीकी मायाजाल था? सीबीआई की चार्जशीट ने जो खुलासे किए हैं, वे किसी फिल्मी थ्रिलर से कम नहीं हैं। जिस घी को हम पवित्र समझ रहे थे, उसकी असलियत जानकर आपके पैरों तले जमीन खिसक जाएगी।

Tirupati Laddu Controversy: लड्डू विवाद का वो चौंकाने वाला सच

साल 2024 में जब आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री चंद्रबाबू नायडू और पवन कल्याण ने तिरुपति लड्डू में ‘जानवरों की चर्बी’ होने का आरोप लगाया, तो पूरे भारत में जैसे एक तूफान आ गया था। करोड़ों भक्तों की भावनाओं को ठेस पहुंची और मामला सुप्रीम कोर्ट तक जा पहुंचा। (Tirupati Laddu Controversy) सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर बनी सीबीआई की विशेष टीम ने जब गहराई से पड़ताल की, तो पता चला कि कहानी में वह नहीं था जो हम सोच रहे थे। नेल्लोर की अदालत में पेश की गई अंतिम चार्जशीट के मुताबिक, लड्डू बनाने वाले घी में बीफ टैलो या लार्ड (सुअर की चर्बी) का कोई नामोनिशान नहीं मिला है। जी हां, जिसे पूरी दुनिया ‘एनिमल फैट’ समझ रही थी, वह दरअसल लैब में तैयार किया गया एक खतरनाक रासायनिक खेल था।

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नकली घी बनाने वाली ‘वर्चुअल’ डेयरी का पर्दाफाश

सीबीआई की जांच में सबसे बड़ा विलेन बनकर उभरी है उत्तराखंड की ‘भोले बाबा ऑर्गेनिक डेयरी’। हैरान करने वाली बात यह है कि 2019 से 2024 के बीच इस डेयरी ने न तो एक बूंद दूध खरीदा और न ही मक्खन, फिर भी इसने तिरुमाला तिरुपति देवस्थानम (TTD) को करीब 68 किलोग्राम नकली घी सप्लाई कर दिया। जांचकर्ताओं ने इसे ‘वर्चुअल’ मैन्युफैक्चरिंग यूनिट कहा है, जो सिर्फ कागजों पर चल रही थी। (Tirupati Laddu Controversy) लगभग 250 करोड़ रुपये का यह घी पूरी तरह से सिंथेटिक था, जिसे बिना दूध के रसायनों की मदद से बनाया गया था। यह सिर्फ मिलावट नहीं, बल्कि करोड़ों श्रद्धालुओं की आस्था के साथ किया गया एक बहुत बड़ा सुनियोजित फ्रॉड था।

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रसायनों से ऐसे दिया गया ‘शुद्ध घी’ का धोखा

इस गिरोह ने लैब टेस्ट को चकमा देने के लिए विज्ञान का सहारा लिया। घी की शुद्धता जांचने के लिए टीटीडी ‘आरएम वैल्यू’ (RM Value) पर भरोसा करता था। इस टेस्ट को फेल करने के लिए कोलकाता से पाम ऑयल और पामोलिन मंगवाया गया और उसमें दिल्ली के एक व्यापारी अजय कुमार सुगंध के जरिए ‘एसिटिक एसिड एस्टर’ मिलवाए गए। (Tirupati Laddu Controversy) ये रसायन लैब की मशीनों को यह यकीन दिला देते थे कि घी बिल्कुल शुद्ध है। यही नहीं, गाय के घी जैसा सुनहरा रंग देने के लिए ‘बीटा कैरोटीन’ और दानेदार खुशबू के लिए आर्टिफिशियल फ्लेवर का इस्तेमाल किया गया। चंद्रबाबू नायडू ने जिस ‘एस-वैल्यू’ का जिक्र किया था, वह असल में इन रसायनों और वनस्पति तेलों की वजह से बदली थी, न कि जानवरों की चर्बी की वजह से।

36 आरोपियों का वो सिंडिकेट और भ्रष्टाचार

सीबीआई ने इस साजिश में कुल 36 लोगों को आरोपी बनाया है, जिसमें टीटीडी के पूर्व अधिकारी और डेयरी विशेषज्ञ भी शामिल हैं। (Tirupati Laddu Controversy) आरोप है कि ब्लैकलिस्ट होने के बावजूद इन कंपनियों ने दूसरे नामों से घी की सप्लाई जारी रखी। अधिकारियों ने मोटी रिश्वत के बदले फर्जी निरीक्षण रिपोर्ट तैयार कीं और भक्तों की सेहत और श्रद्धा के साथ खिलवाड़ होने दिया।

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