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Kumar Vishwas on UGC 2026: “मैं अभागा सवर्ण हूँ…” UGC पर कुमार विश्वास शायराना अंदाज, चार पंक्तियों में सरकार को लिया आड़े हाथों
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13 मिनट agoon

Kumar Vishwas on UGC 2026: देश के उच्च शिक्षण संस्थानों में समानता लाने के लिए लागू किए गए ‘यूजीसी रूल्स 2026’ ने अब एक बड़े सामाजिक और राजनीतिक संग्राम का रूप ले लिया है। जहाँ एक तरफ दिल्ली की सड़कों पर छात्र प्रदर्शन कर रहे हैं और यूपी में एक पीसीएस अधिकारी ने अपनी कुर्सी त्याग दी है, वहीं अब इस विवाद में मशहूर कवि डॉ. कुमार विश्वास की एंट्री ने आग में घी डालने का काम किया है। (Kumar Vishwas on UGC 2026) अक्सर अपनी कविताओं से सत्ता को आइना दिखाने वाले कुमार विश्वास ने इस बार सीधे सरकार की नीतियों पर कड़ा प्रहार किया है। उनकी एक सोशल मीडिया पोस्ट ने पूरे देश में बहस छेड़ दी है, जिसमें उन्होंने खुद को ‘अभागा सवर्ण’ बताते हुए अपना दर्द साझा किया है। क्या कुमार विश्वास का यह दांव सरकार को यूजीसी नियमों पर झुकने के लिए मजबूर कर देगा?
Kumar Vishwas on UGC 2026: “मैं अभागा सवर्ण हूँ मेरा…”: कुमार विश्वास की वो पंक्तियाँ
कुमार विश्वास ने दिवंगत कवि रमेश रंजन मिश्र की मार्मिक पंक्तियों को साझा करते हुए सवर्ण समाज की वर्तमान स्थिति पर कटाक्ष किया है। उन्होंने लिखा— ‘चाहे तिल लो या ताड़ लो राजा, राई लो या पहाड़ लो राजा, मैं अभागा सवर्ण हूँ मेरा, रौंया-रौंया उखाड़ लो राजा…।’ इन पंक्तियों के जरिए उन्होंने यह संदेश देने की कोशिश की है कि नए नियमों के नाम पर एक वर्ग को जानबूझकर प्रताड़ित किया जा रहा है। अपनी पोस्ट के साथ उन्होंने #UGC_RollBack का हैशटैग भी इस्तेमाल किया, जिससे यह साफ हो गया है कि वे इन नियमों को पूरी तरह वापस लेने की मांग का समर्थन कर रहे हैं। (Kumar Vishwas on UGC 2026) उनके इस ट्वीट के बाद समर्थकों और विरोधियों के बीच डिजिटल वॉर छिड़ गई है।
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यूपी में सियासी भूचाल
यूजीसी नियमों के खिलाफ विरोध की सबसे तीखी लहर उत्तर प्रदेश में देखी जा रही है। बरेली के सिटी मजिस्ट्रेट और तेजतर्रार पीसीएस अधिकारी अलंकार अग्निहोत्री ने इन नियमों को भेदभावपूर्ण बताते हुए अपने पद से इस्तीफा देकर प्रशासनिक हलकों में हड़कंप मचा दिया है। (Kumar Vishwas on UGC 2026) अग्निहोत्री का कहना है कि वे ऐसी व्यवस्था का हिस्सा नहीं बन सकते जहाँ एक वर्ग को बिना किसी आधार के अपराधी की तरह देखा जाए। इस इस्तीफे ने सत्ताधारी भाजपा के लिए बड़ी मुसीबत खड़ी कर दी है, क्योंकि एक तरफ सवर्णों की नाराजगी का डर है, तो दूसरी तरफ ओबीसी और एससी-एसटी वर्ग की प्रतिक्रिया का खतरा।
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क्यों हो रहा है इन नियमों का इतना विरोध?
नए यूजीसी नियमों में सबसे बड़ा विवाद शिकायतों के निपटारे की प्रक्रिया को लेकर है। विरोध करने वाले वर्ग का सबसे बड़ा सवाल यह है कि यदि कोई छात्र किसी फैकल्टी या छात्र के खिलाफ झूठी शिकायत करता है, तो शिकायतकर्ता के खिलाफ क्या कार्रवाई होगी? आलोचकों का तर्क है कि इन नियमों में झूठी शिकायतों से बचने का कोई प्रावधान नहीं है, जिसका इस्तेमाल निजी खुन्नस निकालने या प्रतिशोध लेने के लिए किया जा सकता है। (Kumar Vishwas on UGC 2026) सवर्ण समाज के छात्रों का मानना है कि उन्हें ‘ऐतिहासिक अपराधी’ मानकर वर्तमान में निशाना बनाया जा रहा है, जो न्याय के सिद्धांतों के खिलाफ है।
कुमार विश्वास की राय पर बंटा सोशल मीडिया
कुमार विश्वास के इस रुख पर लोगों की मिली-जुली प्रतिक्रियाएं आ रही हैं। जहाँ हजारों यूजर्स ने उनकी सराहना करते हुए लिखा कि “हमें उम्मीद थी कि आप सवर्णों के हक में जरूर बोलेंगे,” वहीं कुछ लोगों ने उन्हें जातिवाद को बढ़ावा न देने की सलाह भी दी। (Kumar Vishwas on UGC 2026) बहरहाल, कुमार विश्वास के मैदान में उतरने से यह मामला अब केवल प्रशासनिक गलियारों तक सीमित नहीं रहा, बल्कि एक बड़ा जन-आंदोलन बनने की राह पर है। अब देखना यह होगा कि केंद्र सरकार इस बढ़ते विरोध और कुमार विश्वास जैसे प्रभावशाली चेहरों की मांग पर क्या फैसला लेती है।
