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Bangladesh Election Results 2026: बांग्लादेश में PM के ‘पर कतरे’, राष्ट्रपति हुए पावरफुल! ‘Yes Vote’… राज्यसभा ने बदल दिया ढाका का पूरा गेम

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Bangladesh Election Results 2026: बांग्लादेश अब वह देश नहीं रहा जिसे हम और आप जानते थे। 12 फरवरी की तारीख इतिहास के पन्नों में स्वर्ण अक्षरों में दर्ज हो गई है। यह सिर्फ एक चुनाव नहीं था, बल्कि एक क्रांति थी जिसने ढाका से लेकर दिल्ली तक की हवाओं का रुख बदल दिया है। (Bangladesh Election Results 2026) बांग्लादेश के हर नागरिक ने उस दिन दो बार बटन दबाया- एक नई सरकार चुनने के लिए और दूसरा अपने देश की तकदीर बदलने के लिए। जनमत संग्रह के नतीजों ने साफ कर दिया है कि जनता अब पुरानी घिसी-पिटी व्यवस्था से उब चुकी है और उसे ‘जुलाई चार्टर’ के रूप में एक नया सवेरा चाहिए।

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Bangladesh Election Results 2026: संविधान का ‘पोस्टमार्टम’ और नया जन्म

‘जुलाई चार्टर’ कोई मामूली कागज का टुकड़ा नहीं है, बल्कि इसे “नए बांग्लादेश का जन्म” कहा जा रहा है। मोहम्मद यूनुस ने जो सपना देखा था, उसे जनता ने भारी मतों से ‘यस वोट’ देकर हकीकत में बदल दिया है। (Bangladesh Election Results 2026) शेख हसीना की सरकार गिरने के बाद जो गुस्सा लोगों के दिलों में था, वह इस चार्टर के जरिए बाहर आया है। अब नए प्रधानमंत्री तारिक रहमान के सामने फूलों की सेज नहीं, बल्कि काटों का ताज है। उन्हें 84 सुधार प्रस्तावों को लागू करना है जो देश का नक्शा हमेशा के लिए बदल देंगे। सबसे बड़ी बात यह है कि अब सत्ता किसी एक व्यक्ति की जागीर नहीं रहेगी।

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अब बांग्लादेश में भी होगी ‘राज्यसभा’

सबसे चौंकाने वाला बदलाव संसद के ढांचे में हुआ है। अब तक बांग्लादेश में सिर्फ एक सदन होता था, जहां बहुमत वाली पार्टी जो चाहे कर सकती थी। लेकिन अब भारत की तर्ज पर वहां भी ‘राज्यसभा’ यानी ऊपरी सदन का गठन होगा। इसे विकेंद्रीकरण का मास्टरस्ट्रोक कहा जा रहा है। (Bangladesh Election Results 2026) अब कोई भी सरकार अपनी मनमानी से संविधान नहीं बदल पाएगी क्योंकि इसके लिए दोनों सदनों की मंजूरी जरूरी होगी। ऊपरी सदन में 100 सदस्य होंगे और यह सुनिश्चित करेगा कि सत्ता का नशा किसी के सिर पर चढ़कर न बोले।

प्रधानमंत्री के पर कतरे, राष्ट्रपति हुए पावरफुल

अगर आप सोचते हैं कि प्रधानमंत्री ही सबसे ताकतवर होता है, तो बांग्लादेश ने इस सोच को ध्वस्त कर दिया है। नए नियमों के मुताबिक, कोई भी व्यक्ति अपनी पूरी जिंदगी में सिर्फ 10 साल ही प्रधानमंत्री रह सकेगा। इतना ही नहीं, जो प्रधानमंत्री की कुर्सी पर बैठेगा, वह पार्टी का अध्यक्ष नहीं हो सकता। (Bangladesh Election Results 2026) दूसरी तरफ, राष्ट्रपति अब रबर स्टैम्प नहीं रहेंगे। उनकी ताकत में बेतहाशा इजाफा किया गया है। अब वे मानवाधिकार आयोग, चुनाव आयोग और बैंक गवर्नर जैसे अहम पदों पर अधिकारियों की नियुक्ति बिना प्रधानमंत्री की सलाह के कर सकेंगे। यह शक्तियों का ऐसा संतुलन है जो दक्षिण एशिया की राजनीति में एक मिसाल बनेगा।

सांसदों को मिली बगावत की आजादी

पहले वहां अनुच्छेद 70 का डंडा चलता था, यानी सांसद अपनी पार्टी के खिलाफ चूं भी नहीं कर सकते थे। लेकिन अब उन्हें आजाद कर दिया गया है। जनमत संग्रह के बाद सांसद अपनी अंतरात्मा की आवाज पर पार्टी लाइन से हटकर भी वोट कर सकेंगे। साथ ही, इमरजेंसी लगाना अब बच्चों का खेल नहीं होगा। इसके लिए विपक्ष और कैबिनेट की मंजूरी लेनी होगी। कुल मिलाकर, अगले 180 दिनों में एक परिषद इस नए संविधान को अंतिम रूप देगी। यह बांग्लादेश का ऐसा पुनर्जन्म है, जिस पर पूरी दुनिया की नजरें टिकी हैं।

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