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US Iran Deal: फिर छिड़ सकता है महायुद्ध! इजरायल का ट्रंप-ईरान डील को मानने से इनकार, दुनिया पर मंडराया खतरा

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US Iran Deal: मध्य-पूर्व में शांति स्थापित करने की दिशा में अमेरिका के प्रयासों को बड़ा झटका लगता दिखाई दे रहा है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा ईरान के साथ परमाणु कार्यक्रम और क्षेत्रीय तनाव को कम करने के लिए प्रस्तावित समझौते को लेकर भले ही सकारात्मक दावे किए जा रहे हों, लेकिन जमीनी स्तर पर हालात अब भी तनावपूर्ण बने हुए हैं। इसकी सबसे बड़ी वजह इजरायल का कड़ा रुख माना जा रहा है, जो इस संभावित समझौते से पूरी तरह सहमत नजर नहीं आ रहा। विश्लेषकों का मानना है कि अमेरिका की कूटनीतिक पहल और इजरायल की सुरक्षा रणनीति के बीच बढ़ता मतभेद क्षेत्र में अस्थिरता को और बढ़ा सकता है।

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US Iran Deal: ट्रंप की डील पर इजरायल को भरोसा नहीं

रिपोर्टों के अनुसार ट्रंप प्रशासन ने ईरान को कुछ आर्थिक प्रतिबंधों से राहत देने और बदले में उसके समृद्ध यूरेनियम भंडार को नियंत्रित या नष्ट करने की रूपरेखा तैयार की है। साथ ही, वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति के लिए महत्वपूर्ण स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में सामान्य स्थिति बहाल करने पर भी जोर दिया गया है। (US Iran Deal) हालांकि, इजरायल का मानना है कि केवल कूटनीतिक समझौते से ईरान के परमाणु खतरे को पूरी तरह समाप्त नहीं किया जा सकता। इजरायली नेतृत्व का तर्क है कि जब तक ईरान के परमाणु ढांचे और उसके क्षेत्रीय प्रॉक्सी नेटवर्क को पूरी तरह खत्म नहीं किया जाता, तब तक किसी भी समझौते को सुरक्षित या स्थायी नहीं माना जा सकता।

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इजरायली हमले लगातार जारी

अमेरिकी प्रयासों के बावजूद इजरायल ने ईरान और उसके समर्थित संगठनों के खिलाफ अपने सैन्य अभियान धीमे नहीं किए हैं। इजरायली वायुसेना और खुफिया एजेंसियां कथित तौर पर ईरान, सीरिया और लेबनान में रणनीतिक ठिकानों को निशाना बनाती रही हैं। (US Iran Deal) प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू की सरकार का स्पष्ट संदेश है कि राष्ट्रीय सुरक्षा के मुद्दे पर वह किसी भी अंतरराष्ट्रीय दबाव के आगे झुकने को तैयार नहीं है। इजरायल की रणनीति यह मानी जा रही है कि किसी संभावित समझौते के लागू होने से पहले ईरान की सैन्य क्षमताओं को कमजोर किया जाए।

बढ़ सकता है क्षेत्रीय संघर्ष

कूटनीतिक विशेषज्ञों का मानना है कि यदि अमेरिका इजरायल की चिंताओं को पर्याप्त महत्व दिए बिना ईरान के साथ समझौते को आगे बढ़ाता है, तो इसके गंभीर परिणाम हो सकते हैं। इजरायली हमलों के जवाब में यदि ईरान सैन्य प्रतिक्रिया देता है या अपनी बैलिस्टिक मिसाइलों का इस्तेमाल करता है, तो पूरे क्षेत्र में व्यापक संघर्ष भड़क सकता है। इसके अलावा, यदि ईरान को यह महसूस होता है कि समझौते के बावजूद उस पर हमले जारी हैं, तो वह भी वार्ता प्रक्रिया से पीछे हट सकता है और अपने परमाणु कार्यक्रम को फिर से तेज कर सकता है।

शांति या नया संकट?

मध्य-पूर्व पहले से ही कई भू-राजनीतिक चुनौतियों का सामना कर रहा है। ऐसे में अमेरिका, ईरान और इजरायल के बीच बढ़ती खींचतान ने क्षेत्रीय स्थिरता को लेकर नई चिंताएं पैदा कर दी हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि यदि सभी पक्षों के सुरक्षा हितों को ध्यान में रखकर समाधान नहीं निकाला गया, तो शांति की कोशिशें विफल हो सकती हैं और पूरा क्षेत्र एक बड़े सैन्य संघर्ष की ओर बढ़ सकता है। फिलहाल दुनिया की नजरें इस बात पर टिकी हैं कि आने वाले दिनों में कूटनीति जीतती है या फिर मध्य-पूर्व एक नए संकट की ओर बढ़ता है।

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