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Parliament Budget Session 2026: संसद में विपक्ष के ‘दोहरे’ खेल से कैसे निपटेगी केंद्र सरकार…? दो महाभियोग प्रस्ताव से बढ़ी मुश्किलें, गरमाई सियासत
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14 मिनट agoon

Parliament Budget Session 2026: संसद के बजट सत्र 2026 में इस बार राजनीतिक माहौल में उबाल साफ़-साफ़ देखा जा रहा है। एक ही सत्र में दो बड़े प्रस्तावों एक लोकसभा स्पीकर के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव और मुख्य चुनाव आयुक्त के खिलाफ महाभियोग की तैयारी, जिसने सियासी हलचल तेज कर दी है। विपक्षी दलों ने इन कदमों के माध्यम से केंद्र सरकार को घेरने की रणनीति अपनाई है और संसद से लेकर सड़क तक आक्रामक रुख दिखा रहे हैं।
पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव से पहले राज्य की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी पूरी तरह राजनीतिक मोर्चे पर सक्रिय नज़र आ रही हैं। उनकी पार्टी TMC ने देश के मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ महाभियोग लाने की रणनीति बनाई है। (Parliament Budget Session 2026) दूसरी ओर कांग्रेस और अन्य विपक्षी दलों ने लोकसभा स्पीकर ओम बीरला के खिलाफ ‘अविश्वास प्रस्ताव’ लाकर संसद में सरकार पर दबाव बनाने का प्रयास किया है।
Parliament Budget Session 2026: विपक्ष की रणनीति: आक्रामक राजनीति
भारतीय राजनीति में हमेशा से यह कहा जाता है कि सिर्फ बचाव की रणनीति से राजनीतिक मुकाबले नहीं जीते जाते। इसी सोच के साथ विपक्षी दल इस बार संसद में आक्रामक तेवर अपनाए हुए हैं। संख्या बल कम होने के बावजूद विपक्ष सरकार को लगातार घेरने का प्रयास कर रहा है।
पहले लोकसभा स्पीकर के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव लाया गया और अब मुख्य चुनाव आयुक्त के खिलाफ महाभियोग की चर्चा ने राजनीतिक बहस को और तेज कर दिया है। (Parliament Budget Session 2026) विपक्ष का मानना है कि इन कदमों के द्वारा वह सरकार को जवाब देने के लिए मजबूर कर सकता है और जनता के बीच अपनी बात मजबूती से रख सकता है।
स्पीकर ओम बिरला के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव
संसद के बजट सत्र के पहले चरण में उस वक़्त विवाद खड़ा हो गया जब लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी को बोलने की अनुमति नहीं दी गई। राहुल गांधी बजट पर चर्चा के दौरान चीन के साथ सीमा विवाद से जुड़े एक मुद्दे पर अपनी बात रखना चाहते थे, जो पूर्व सेना प्रमुख की एक अप्रकाशित किताब में सामने आया था।
हालांकि, स्पीकर ओम बिरला ने इसे सदन के एजेंडे से बाहर बताते हुए अनुमति नहीं दी। इसके बाद विपक्षी दलों ने स्पीकर पर पक्षपात का आरोप लगाया और उनके खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव लाने का फैसला किया।
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कांग्रेस, समाजवादी पार्टी, तृणमूल कांग्रेस, डीएमके और वामपंथी दलों समेत कई विपक्षी पार्टियां इस प्रस्ताव के समर्थन में एकजुट दिखाई दी। (Parliament Budget Session 2026) हालांकि, संसद में संख्या बल के लिहाज से सरकार मजबूत स्थिति में है, इसलिए प्रस्ताव के पास होने की संभावना कम मानी जा रही है। इसके बावजूद विपक्ष का मानना है कि इस प्रस्ताव से उन्हें संसद में सरकार की कार्यशैली पर सवाल उठाने का मौका मिलेगा।
मुख्य चुनाव आयुक्त के खिलाफ महाभियोग की तैयारी
इसी बीच तृणमूल कांग्रेस ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ महाभियोग लाने की तैयारी कर एक नया राजनीतिक मोर्चा खोल दिया है। (Parliament Budget Session 2026) TMC का आरोप है कि पश्चिम बंगाल में मतदाता सूची से वैध वोटरों के नाम काटे जा रहे हैं और चुनाव आयोग इस मामले में संतोषजनक जवाब नहीं दे रहा है।
टीएमसी सांसद अभिषेक बनर्जी पहले ही बजट सत्र के दौरान यह संकेत दे चुके थे कि उनकी पार्टी मुख्य चुनाव आयुक्त के खिलाफ महाभियोग लाने पर विचार कर रही है। (Parliament Budget Session 2026) वहीं,इसे लेकर TMC का कहना है कि चुनाव आयोग के साथ कई दौर की बैठकों के बावजूद समस्या का समाधान नहीं निकला। ऐसे में पार्टी ने अब संसद में इस मुद्दे को उठाने और महाभियोग का प्रस्ताव लाने का फैसला किया है।
विपक्ष की एकजुटता से बढ़ी सरकार की मुश्किलें
हालांकि, संसद में संख्या के आधार पर केंद्र सरकार को इन प्रस्तावों से तत्काल कोई खतरा नहीं माना जा रहा है, लेकिन राजनीतिक स्तर पर विपक्ष की एकजुटता सरकार के लिए चुनौती बनती साफ़ नज़र आ रही है। (Parliament Budget Session 2026) विपक्ष लगातार यह आरोप लगा रहा है कि देश की संवैधानिक संस्थाएं सरकार के दबाव में काम कर रही हैं। इसी आरोप के आधार पर स्पीकर और चुनाव आयोग की निष्पक्षता पर सवाल उठाए जा रहे हैं।
दूसरी तरफ सरकार का कहना है कि देश की सभी संवैधानिक संस्थाएं पूरी तरह स्वतंत्र हैं और उनके कामकाज में किसी तरह का राजनीतिक हस्तक्षेप नहीं होता।
संसद में बढ़ सकता है टकराव
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि इन प्रस्तावों का मकसद सिर्फ पदाधिकारियों को हटाना नहीं बल्कि राजनीतिक संदेश देना भी है। (Parliament Budget Session 2026) विपक्ष इन मुद्दों के जरिए संसद में सरकार को कठघरे में खड़ा करना चाहता है और यह दिखाना चाहता है कि लोकतांत्रिक संस्थाओं की निष्पक्षता पर सवाल खड़े कर रहे हैं।
अब आगामी दिनों में संसद के बजट सत्र का दूसरा चरण और भी ज्यादा हंगामेदार रहने की संभावना है। विपक्ष जहां सरकार पर दबाव बढ़ाने की रणनीति पर काम कर रहा है, वहीं सरकार अपने बहुमत के भरोसे इन प्रस्तावों को खारिज करने की तैयारी में है। (Parliament Budget Session 2026) ऐसे में यह देखना दिलचस्प होगा कि एक ही सत्र में उठे इन दो बड़े राजनीतिक मुद्दों का देश की राजनीति और आगामी चुनावों पर क्या प्रभाव पड़ता है।
