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Pahalgam attack mastermind photo: पहलगाम हमले का मास्टरमाइंड बेनकाब! पहली बार सामने आई ये तस्वीर, NIA के हाथ लगी आतंकी की पूरी ‘कुंडली

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Pahalgam attack mastermind photo: पहलगाम हमले के एक साल बाद उस खूनी साजिश का सबसे बड़ा खिलाड़ी अब दुनिया के सामने आ गया है। ‘आजतक’ की एक बड़ी तहकीकात में उस आतंकी की पहली तस्वीर और पूरी कुंडली हाथ लगी है, जो पाकिस्तान में बैठकर कश्मीर को दहलाने की प्लानिंग करता है। (Pahalgam attack mastermind photo) इस खतरनाक मास्टरमाइंड का नाम साजिद जट्ट है, जो लश्कर-ए-तैयबा और टीआरएफ (TRF) का टॉप कमांडर है। लेकिन चौंकाने वाली बात यह है कि वह अब पाकिस्तान में किसी खूंखार आतंकी की तरह नहीं, बल्कि एक लाचार और बेहद साधारण आदमी की पहचान बनाकर ‘साये’ की तरह रह रहा है।

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Pahalgam attack mastermind photo: साजिद जट्ट से ‘हबीबुल्लाह’ बनने का सफर

पहलगाम के बैरसन घाटी में मासूम लोगों पर गोलियां चलवाने वाले इस मास्टरमाइंड का असली चेहरा अब दुनिया ने देख लिया है। एनआईए (NIA) की जांच में साजिद जट्ट उर्फ सैफुल्लाह साजिद को ही इस हमले का असली जिम्मेदार बताया गया है। (Pahalgam attack mastermind photo) लेकिन इस पड़ताल में जो सबसे बड़ा खुलासा हुआ है, वह है उसका असली नाम- हबीबुल्लाह तबस्सुम। जांच टीम ने साजिद के वे पाकिस्तानी आईडी कार्ड ढूंढ निकाले हैं, जो उसके झूठ की पोल खोल देते हैं। कसूर जिले की तंग गलियों से लेकर रावलपिंडी के गुप्त ठिकानों तक, साजिद ने अपनी पहचान छिपाने के लिए हर मुमकिन कोशिश की, लेकिन उसके असली कागजों ने उसे बेनकाब कर दिया।

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ISI का ‘सेफ हाउस’ और पहचान बदलने का खेल

पाकिस्तानी खुफिया एजेंसी ISI साजिद जट्ट को एक साधारण नागरिक बनकर रहने में पूरी मदद कर रही है। साजिद के दो अलग-अलग पहचान पत्र मिले हैं जो पाकिस्तान के पाखंड को उजागर करते हैं। 2015 के एक कार्ड में उसका पता कसूर जिले का है, जिसमें उसका जन्म साल 1976 लिखा है। (Pahalgam attack mastermind photo) वहीं, इस्लामाबाद के सुरक्षित इलाके G-6 के पते पर बने दूसरे कार्ड में उसने अपनी उम्र 6 साल कम करवाकर जन्म का साल 1982 लिखवा लिया है। तस्वीरों में वह रावलपिंडी के एक मामूली घर में, फटे-पुराने कपड़ों में और एक पुराने की-पैड वाले मोबाइल फोन के साथ दिख रहा है ताकि किसी को उस पर आतंकी होने का शक न हो।

‘सलीम लंगड़ा’ के नाम से बना रहा नई साजिश

खुफिया सूत्रों के मुताबिक, साजिद जट्ट कई सालों तक जम्मू-कश्मीर में सक्रिय रहा है। एक मुठभेड़ के दौरान उसके पैर में गोली लगी थी, जिसके बाद से वह लंगड़ा कर चलता है। इसी शारीरिक कमजोरी को उसने अपनी नई पहचान बना लिया है और पाकिस्तान में ‘सलीम लंगड़ा’ के नाम से मशहूर हो गया है। वह एक लाचार आदमी का नाटक करता है ताकि सुरक्षा एजेंसियों की नजरों से बच सके। लेकिन इसी लाचारी के पीछे वह ISI के बड़े अफसरों के सीधे संपर्क में रहता है और वहीं से कश्मीर में आतंकियों का नेटवर्क संचालित करता है।

अज्ञात हमलावरों का खौफ और दर-दर भटकता आतंकी

साजिद जट्ट की इस ‘सादगी’ के पीछे एक गहरा डर छिपा है। पाकिस्तान में पिछले कुछ समय से ‘अज्ञात हमलावरों’ द्वारा भारत के दुश्मनों को खत्म किए जाने की घटनाओं ने साजिद की रातों की नींद उड़ा दी है। साल 2022 में उसके एक करीबी साथी की सरेआम हत्या के बाद साजिद इतना घबरा गया कि उसने इस्लामाबाद का अपना ठिकाना ही बदल दिया। अब वह किसी बड़े कमांडर की तरह नहीं, बल्कि एक डरपोक भगोड़े की तरह अपनी जान बचाने के लिए दर-दर भटक रहा है।

पहलगाम के बेगुनाह लोगों का गुनहगार साजिद भले ही अपना नाम हबीबुल्लाह रख ले या हुलिया बदल ले, लेकिन उसकी फाइल अब पूरी तरह खुल चुकी है। कश्मीर में दर्जनों हमलों के पीछे इसी ‘सलीम लंगड़ा’ का दिमाग रहा है, लेकिन अब नकाब उतर चुका है और गुनहगार को पता है कि उसकी बारी कभी भी आ सकती है।

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