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Beldanga Violence Case: ‘बेलडांगा हिंसा’ मामले में ममता दीदी को SC का तगड़ा झटका, NIA जांच पर नहीं लगी रोक! बढ़ा राजनीतिक घमासान

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Beldanga Violence Case: पश्चिम बंगाल के मुर्शिदाबाद जिले के ‘बेलडांगा हिंसा’ के मामले में राज्य सरकार को ज़ोरदार झटका लगा है। (Beldanga Violence Case) भारत का सर्वोच्च न्यायालय ने इस मामले में NIA की जांच पर रोक लगाने से साफ मना कर दिया है। साथ ही कोर्ट ने हाई कोर्ट के उस आदेश में किसी भी प्रकार का हस्तक्षेप करने से भी मना कर दिया, जिसमें इस मामले की जांच NIA को सौंपने की अनुमति दी गई थी।

Beldanga Violence Case: क्या है मामला ?

दरअसल, जनवरी महीने में मुर्शिदाबाद के बेलडांगा इलाके में एक हिंसक झड़प हो गई थी। यह हिंसा एक व्यक्ति की संदिग्ध मौत के बाद फैली अफवाहों के कारण हुई थी। (Beldanga Violence Case) स्थानीय स्तर पर यह दावा किया गया कि मृतक की ‘हत्या’ की गई, जबकि प्रशासन ने इसे आत्महत्या बताया। इसी विवाद ने देखते ही देखते राज्य में हिंसक रूप ले लिया।

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हिंसा के दौरान रेलवे ट्रैक जाम किए गए, बसों और सरकारी संपत्तियों को भारी नुकसान पहुंचाया गया और कई इलाकों में भयंकर तनाव फैल गया। (Beldanga Violence Case) स्थिति इतनी ज्यादा गंभीर हो गई थी कि दो दिनों तक आम जनजीवन गंभीर रूप से तरह प्रभावित रहा। इस पूरे मामले को लेकर राजनीतिक विवाद भी तेज हो गया।

मामले में हाई कोर्ट ने केंद्र सरकार की हस्तक्षेप की मांग

पश्चिम बंगाल सरकार की तरफ से शुरू में इस मामले की जांच राज्य पुलिस द्वारा की जा रही थी। राज्य सरकार का तर्क था कि यह एक साधारण कानून-व्यवस्था से जुड़ा मामला है और इसमें किसी केंद्रीय एजेंसी की आवश्यकता नहीं है। (Beldanga Violence Case) लेकिन बाद में यह मामला अदालत पहुंच गया और हाई कोर्ट ने केंद्र सरकार से इस केस में NIA जांच पर विचार करने को कहा।

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केंद्र सरकार के गृह मंत्रालय ने इस मामले को गंभीर मानते हुए NIA को जांच सौंप दी। इसके पीछे तर्क दिया गया कि इस हिंसा में संगठित अपराध और संभावित विदेशी तत्वों की भूमिका की संभावना लग रही है, जिसकी जांच एक विशेषज्ञ एजेंसी द्वारा ही की जानी चाहिए।

केंद्र सरकार के फैसले पर बंगाल सरकार का सख्त रुख

इसके खिलाफ पश्चिम बंगाल सरकार ने सुप्रीम कोर्ट का रुख किया और दलील दी कि बिना UAPA (गैरकानूनी गतिविधि निवारण अधिनियम) लगाए NIA जांच उचित नहीं है। (Beldanga Violence Case) राज्य सरकार का कहना था कि यह पूरी तरह राज्य का अधिकार क्षेत्र है और केंद्र का हस्तक्षेप संघीय ढांचे के खिलाफ है।

SC की ममता सरकार को फटकार

हालांकि, सुप्रीम कोर्ट ने इन दलीलों को स्वीकार नहीं किया। कोर्ट ने स्पष्ट कहा कि जब हाई कोर्ट ने पहले ही इस मामले में NIA जांच को लेकर प्रक्रिया शुरू कर दी है, तो उसमें दखल देने की आवश्यकता नहीं है। कोर्ट ने यह भी कहा कि NIA को यह अधिकार है कि वह पहले जांच करे और यह तय करे कि इस मामले में UAPA लागू होता है या नहीं।

इस फैसले के बाद अब ‘बेलडांगा हिंसा’ केस की जांच पूरी तरह NIA के हाथ में रहेगी। कोर्ट ने यह भी साफ़ कर दिया है कि जांच एजेंसी को स्वतंत्र रूप से काम करने दिया जाना चाहिए, ताकि सच्चाई सामने आ सके।

ममता सरकार ने खड़े किये सवाल

इस पूरे मामले ने राज्य और केंद्र के बीच टकराव को भी उजागर कर दिया है। ममता बनर्जी के नेतृत्व वाली सरकार पहले से ही केंद्रीय एजेंसियों के प्रयोग को लेकर सवाल खड़े करती आ रही है। (Beldanga Violence Case) वहीं विपक्ष का आरोप है कि राज्य में कानून-व्यवस्था की स्थिति बिगड़ रही है और निष्पक्ष जांच के लिए केंद्रीय एजेंसियों की आवश्यकता है।

इसे लेकर राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि इस निर्णय का प्रभाव अब आगामी चुनावों पर भी पड़ सकता है। अगर जांच के दौरान कोई बड़े खुलासे होते हैं, तो यह राज्य की राजनीति में बड़ा मुद्दा बन सकता है।

फिलहाल, सभी की सभी की निगाहें NIA की जांच पर टिकी हैं। यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि क्या इस हिंसा के पीछे कोई बड़ा साजिश का एंगल सामने आता है या यह सिर्फ स्थानीय विवाद तक ही सीमित था।

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