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Bengal Election 2026: जय श्री राम vs जय बांग्ला! बंगाल चुनाव के फाइनल फेज में भारी बवाल, शुभेंदु अधिकारी के एक बयान ने भवा

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Bengal Election 2026: पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव के दूसरे और अंतिम चरण में 142 सीटों पर मतदान हो रहा है। पहले चरण की तुलना में इस चरण की सीटें अधिक संवेदनशील मानी जा रही हैं। (Bengal Election 2026) खास तौर पर भवानीपुर सीट पर सबकी नजरें टिकी हैं, जहां टीएमसी प्रमुख ममता बनर्जी और बीजेपी के शुभेंदु अधिकारी के बीच सीधा मुकाबला है। इसी वजह से इलाके में राजनीतिक तनाव बना हुआ है और मतदान के दौरान शुभेंदु अधिकारी तथा टीएमसी कार्यकर्ताओं के बीच झड़प भी हुई।

भवानीपुर में जब बीजेपी उम्मीदवार शुभेंदु अधिकारी टीएमसी के मजबूत माने जाने वाले एक बूथ पर पहुंचे, तो वहां पहले से बड़ी संख्या में टीएमसी कार्यकर्ता मौजूद थे। (Bengal Election 2026) शुभेंदु अधिकारी ने ‘जय श्री राम’ के नारे लगाने शुरू किए, जिसके जवाब में टीएमसी कार्यकर्ताओं ने ‘जय बांग्ला’ के नारे लगाए। इससे माहौल और अधिक तनावपूर्ण हो गया और दोनों पक्षों के बीच तीखी बहस और धक्का-मुक्की शुरू हो गई।

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स्थिति बिगड़ने पर शुभेंदु अधिकारी ने सुरक्षा बलों से शिकायत की कि वहां मौजूद लोग मतदाता नहीं, बल्कि बाहरी और बांग्लादेशी हैं। इसके बाद सुरक्षा बलों ने स्थिति संभालते हुए भीड़ को हटाने के लिए हल्का बल प्रयोग किया और लाठीचार्ज किया। वहीं, शुभेंदु अधिकारी ने मीडिया से बातचीत में भी यही आरोप दोहराया कि बूथ पर मौजूद लोग स्थानीय मतदाता नहीं हैं।

घटनास्थल पर मौजूद एक मतदाता ने बताया कि शुभेंदु अधिकारी के नारे लगाने के बाद भीड़ ने जवाबी नारे लगाए, जिससे देखते ही देखते पूरे इलाके में अफरा-तफरी मच गई।

इस मामले पर कोलकाता पुलिस के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि तनाव तब बढ़ा जब शुभेंदु अधिकारी एक बूथ के अंदर गए और वहां मौजूद लोगों ने ‘जय बांग्ला’ के नारे लगाने शुरू कर दिए। पुलिस ने तुरंत मौके पर पहुंचकर स्थिति को नियंत्रित किया और हल्का लाठीचार्ज भी किया।

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शुभेंदु अधिकारी ने कहा कि पार्टी का केंद्रीय नेतृत्व पूरे घटनाक्रम पर नजर बनाए हुए है और इस संबंध में कार्रवाई की मांग की जाएगी।

दरअसल, पश्चिम बंगाल की राजनीति में ‘जय श्रीराम’ और ‘जय बांग्ला’ केवल नारे भर नहीं रह गए हैं, बल्कि वे दो अलग-अलग राजनीतिक विचारधाराओं और पहचान की प्रतीक बन चुके हैं। बीजेपी जहां ‘जय श्रीराम’ के जरिए अपनी पकड़ मजबूत करने और हिंदू वोटरों को साधने की कोशिश कर रही है, वहीं ममता बनर्जी ‘जय बांग्ला’ के जरिए बंगाली अस्मिता और क्षेत्रीय गौरव को सामने रख रही हैं। यह नारा 1971 के बांग्लादेश मुक्ति संग्राम से जुड़ा रहा है, जिसे वर्तमान राजनीति में नए सिरे से इस्तेमाल किया जा रहा है।

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