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Nitish Kumar: तेजस्वी का दांव, नीतीश का ‘चेक-मेट’! शिवेश राम की जीत और ए.डी. सिंह की हार…वो ‘इनसाइड सच’ जो कोई नहीं बता रहा
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2 घंटे agoon

Nitish Kumar: बिहार की राजनीति में एक बार फिर वो हो गया जिसकी उम्मीद खुद तेजस्वी यादव ने भी नहीं की थी। राज्यसभा की 5 सीटों पर हुए चुनाव में एनडीए ने ‘क्लीन स्वीप’ करते हुए सभी सीटों पर कब्जा जमा लिया है। इस करारी हार ने विपक्षी ‘INDIA’ गठबंधन की चूलें हिला दी हैं। (Nitish Kumar) हार से ज्यादा चर्चा इस बात की है कि आखिर ऐन मौके पर महागठबंधन के अपने ही विधायकों ने साथ क्यों छोड़ दिया? 16 मार्च को हुई वोटिंग के बाद अब आरजेडी और कांग्रेस के भीतर वो ज्वालामुखी फूट पड़ा है, जो कभी भी इस गठबंधन को राख कर सकता है।
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Nitish Kumar: आखिर क्या था खेल?
राज्यसभा चुनाव के गणित को समझें तो विपक्ष के पास अपने उम्मीदवार ए.डी. सिंह को जिताने के लिए पूरे 41 वोट मौजूद थे। लेकिन जब नतीजे आए तो पता चला कि कांग्रेस के तीन विधायक सुरेंद्र मेहता, मनोज विश्वास और मनोहर प्रसाद सिंह मैदान से गायब थे। (Nitish Kumar) वहीं आरजेडी के विधायक फैसल रहमान ने भी वोटिंग से दूरी बना ली। इन 4 वोटों की कमी के कारण विपक्ष का गणित पूरी तरह फेल हो गया और एनडीए के शिवेश राम ने बाजी मार ली। अब कांग्रेस और आरजेडी इस उलझन में हैं कि इन बागियों का क्या किया जाए? कांग्रेस ने आनन-फानन में नोटिस तो जारी कर दिया है, लेकिन पार्टी के भीतर डर है कि अगर इन पर कार्रवाई की, तो कहीं ये विधायक अलग गुट बनाकर भाजपा में न शामिल हो जाएं।
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मजबूरी का नाम महागठबंधन
हैरानी की बात यह है कि कांग्रेस के जो तीन विधायक गायब हुए, वे विधानसभा में पार्टी की कुल ताकत का लगभग आधा हिस्सा हैं। ऐसे में अगर उन्हें निकाला जाता है, तो विधानसभा अध्यक्ष उन्हें एक अलग समूह के रूप में मान्यता दे सकते हैं, जिससे कांग्रेस की ताकत और कम हो जाएगी। (Nitish Kumar) दूसरी तरफ आरजेडी के फैसल रहमान ने अपनी मां की बीमारी का बहाना बनाया है, लेकिन पार्टी सूत्रों का कहना है कि वे काफी समय से नेतृत्व से नाराज चल रहे थे। तेजस्वी यादव के पटना लौटने पर फैसला होना है, लेकिन फिलहाल पार्टी ‘वेट एंड वॉच’ की मुद्रा में है क्योंकि वे एनडीए के बिछाए जाल में फंसना नहीं चाहते।
अपमान का आरोप और एनडीए का तंज
बागी विधायकों ने जो दलील दी है, उसने आग में घी डालने का काम किया है। गायब हुए कांग्रेस विधायकों का कहना है कि आरजेडी ने उन्हें लगातार अपमानित किया और बिना चर्चा किए ए.डी. सिंह को उम्मीदवार बना दिया। इधर, एनडीए इस मौके को हाथ से नहीं जाने दे रहा। (Nitish Kumar) जदयू प्रवक्ता नीरज कुमार ने तंज कसते हुए कहा कि जो लोग विपक्षी एकता की बड़ी-बड़ी बातें करते थे, वे अपने ही विधायकों को एकजुट नहीं रख पाए। भाजपा ने भी साफ कर दिया है कि एनडीए अपनी एकजुटता के कारण जीता है, जबकि विपक्ष पूरी तरह बिखर चुका है।
243 सदस्यों वाली विधानसभा में अब विपक्ष के पास सिर्फ 37 वोट बचे हैं। क्या तेजस्वी यादव इस आंतरिक कलह को रोक पाएंगे या बिहार में ‘INDIA’ गठबंधन का अंत करीब है?
