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Assam Barchalla assembly seat 2026: कांग्रेस का ‘ब्रह्मास्त्र’ Vs BJP का ‘युवा तुर्क’! दिग्गज रिपुन बोरा के सामने टिक पाएंगे रितु बरन? बरछाला में महासंग्राम
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1 घंटा agoon

Assam Barchalla assembly seat 2026: असम की राजनीति में 2026 का विधानसभा चुनाव एक नई इबारत लिखने को तैयार है। सोनितपुर जिले की ‘बरछाला’ सीट इस वक्त पूरे राज्य में चर्चा का केंद्र बनी हुई है। कभी कांग्रेस का अभेद्य किला रही इस सीट पर पिछले एक दशक से भाजपा का परचम लहरा रहा है। (Assam Barchalla assembly seat 2026) लेकिन इस बार भाजपा ने एक ऐसा जोखिम भरा दांव खेला है, जिसने राजनीतिक पंडितों को भी सोचने पर मजबूर कर दिया है। पार्टी ने दो बार के विजेता विधायक गणेश कुमार लिंबू का पत्ता काटकर 42 वर्षीय युवा कारोबारी रितु बरन सरमा को मैदान में उतारा है। वहीं, कांग्रेस ने अपने सबसे अनुभवी योद्धा और पूर्व प्रदेश अध्यक्ष रिपुन बोरा को उतारकर मुकाबले को बेहद रोमांचक बना दिया है।
Assam Barchalla assembly seat 2026: BJP का ‘सरप्राइज’ कार्ड: रितु बरन पर क्यों लगाया दांव?
बरछाला में भाजपा की रणनीति इस बार बिल्कुल अलग दिख रही है। लगातार दो जीत (2016 और 2021) दर्ज करने वाले गणेश कुमार लिंबू को टिकट न देना हर किसी के लिए चौंकाने वाला फैसला है। पार्टी सूत्रों का मानना है कि रितु बरन सरमा के रूप में भाजपा एक नई ऊर्जा और युवा नेतृत्व को सामने लाना चाहती है। (Assam Barchalla assembly seat 2026) हालांकि, सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या रितु बरन उस वोट बैंक को सहेज पाएंगे, जिसे लिंबू ने पिछले दस सालों में कड़ी मेहनत से तैयार किया था? भाजपा को उम्मीद है कि प्रधानमंत्री मोदी और मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा के विकास कार्यों के दम पर जनता चेहरे से ज्यादा कमल के फूल पर भरोसा करेगी।
कांग्रेस की वापसी की छटपटाहट: रिपुन बोरा का भारी-भरकम कद
दूसरी ओर, कांग्रेस इस सीट को वापस पाने के लिए बेताब है। रिपुन बोरा केवल एक उम्मीदवार नहीं, बल्कि असम की राजनीति का एक बड़ा चेहरा हैं। राज्यसभा सांसद और तरुण गोगोई सरकार में मंत्री रह चुके बोरा के पास संगठन चलाने का लंबा अनुभव है। (Assam Barchalla assembly seat 2026) कांग्रेस को लगता है कि बरछाला की ग्रामीण जनता और चाय बागान के क्षेत्रों में रिपुन बोरा की पकड़ भाजपा के नए उम्मीदवार पर भारी पड़ सकती है। बोरा की उम्मीदवारी ने कांग्रेस कार्यकर्ताओं में नई जान फूंक दी है, जिससे बरछाला में एक बार फिर ‘हाथ’ की मजबूती दिखने लगी है।
बरछाला का इतिहास: जब ढहा था कांग्रेस का गढ़
बरछाला का चुनावी इतिहास गवाह है कि यहाँ लंबे समय तक कांग्रेस का राज रहा है। 1957 से लेकर 2011 तक कांग्रेस यहाँ की सबसे बड़ी ताकत थी। 2011 में कांग्रेस के टंका बहादुर राय ने यहाँ जीत की हैट्रिक लगाई थी, लेकिन 2016 की लहर में भाजपा के गणेश कुमार लिंबू ने इस किले को ढहा दिया। (Assam Barchalla assembly seat 2026) लिंबू ने न केवल 2016 में बड़े अंतर से जीत दर्ज की, बल्कि 2021 में भी कांग्रेस को पटखनी दी। भाजपा की इस मजबूती ने बरछाला को एक वैचारिक बदलाव वाले क्षेत्र के रूप में स्थापित कर दिया है, जहाँ अब मुकाबला विचारधारा और विकास के दावों के बीच है।
9 अप्रैल को फैसला: ग्रामीण असम की धड़कन बनेगा बरछाला
लगभग 2 लाख मतदाताओं वाली इस सीट पर शहरी वोटरों की संख्या न के बराबर है, जिससे यहाँ के स्थानीय मुद्दे और चाय बागान श्रमिकों की समस्याएँ चुनाव का रुख तय करती हैं। (Assam Barchalla assembly seat 2026) त्रिकोणीय मुकाबला और उम्मीदवारों के फेरबदल ने बरछाला को 2026 के चुनाव की सबसे ‘हॉट सीट’ बना दिया है। क्या भाजपा अपने नए सेनापति के साथ जीत की हैट्रिक पूरी कर पाएगी या अनुभवी रिपुन बोरा कांग्रेस के पुराने गौरव को वापस लाएंगे? इसका फैसला 9 अप्रैल को होने वाले मतदान के बाद 4 मई को मतगणना के दिन होगा। फिलहाल, बरछाला की गलियों में चुनावी सरगर्मी अपने चरम पर है।
