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PM Modi Blue Economy Vision: समुद्र में छिपी है भारत की तरक्की की चाबी! क्या है ‘ब्लू इकोनॉमी’, PM मोदी के विजन से बदलेगी देश की मरीन इकोनॉमी?
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9 मिनट agoon

PM Modi Blue Economy Vision: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 15 अगस्त को 80वें स्वतंत्रता दिवस (Independence Day) के मौके पर भारत के विकास के लिए ‘सप्तधारा’ (Saptadhara) का सात-सूत्रीय विजन सामने रखा। इस विजन में मैन्युफैक्चरिंग (Manufacturing), कृषि और फूड प्रोसेसिंग (Food Processing), टेक्नोलॉजी और इनोवेशन (Technology and Innovation), गति शक्ति (Gati Shakti), रक्षा (Defence), ग्रीन और ब्लू इकोनॉमी (Green and Blue Economy) तथा सॉफ्ट पावर (Soft Power) को विकास के प्रमुख आधार के तौर पर बताया गया है।
इस विजन का मकसद भारत की आर्थिक और रणनीतिक क्षमताओं को मजबूत करना और देश को विकसित भारत (Viksit Bharat) के लक्ष्य की ओर तेजी से आगे बढ़ाना है। पीएम मोदी ने टिकाऊ विकास (Sustainable Development) पर जोर देते हुए भारत के प्राकृतिक संसाधनों, पर्यावरण और समुद्री व तटीय संपत्तियों की क्षमता का बेहतर इस्तेमाल करने की बात कही। इसी संदर्भ में ब्लू इकोनॉमी (Blue Economy) को भी महत्वपूर्ण माना गया है।
PM Modi Blue Economy Vision: क्या है ‘ब्लू इकोनॉमी’ ?
ब्लू इकोनॉमी यानी नीली अर्थव्यवस्था का सीधा संबंध समुद्र और तटीय संसाधनों (Coastal Resources) के सतत इस्तेमाल से है। इसका उद्देश्य समुद्र से आर्थिक विकास (Economic Growth) को बढ़ावा देना, लोगों के लिए रोजगार और आजीविका के अवसर पैदा करना और साथ ही समुद्री पारिस्थितिकी तंत्र (Marine Ecosystem) को सुरक्षित रखना है।
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आसान भाषा में समझें तो समुद्र से जुड़े व्यापार, रोजगार और विकास को इस तरह आगे बढ़ाना ब्लू इकोनॉमी है, जिससे आर्थिक फायदा भी हो और समुद्री पर्यावरण को नुकसान भी न पहुंचे। यानी समुद्र से संसाधन लेने के साथ उसके संरक्षण का भी ध्यान रखना जरूरी है।
‘ब्लू इकोनॉमी’ में कौन-कौन से क्षेत्र शामिल हैं ?
ब्लू इकोनॉमी केवल मछली पकड़ने या समुद्री कारोबार तक सीमित नहीं है। इसमें मत्स्य पालन और एक्वाकल्चर (Fisheries and Aquaculture) भी शामिल हैं। इसके तहत मछली पालन, समुद्री जीवों का संवर्धन और सी-फूड प्रोसेसिंग (Seafood Processing) जैसे काम आते हैं।
समुद्री परिवहन और बंदरगाह (Maritime Transport and Ports) भी इसका बड़ा हिस्सा हैं। वैश्विक व्यापार का 80 प्रतिशत से अधिक हिस्सा समुद्री जहाजों के जरिए होता है। ऐसे में हरित बंदरगाह (Green Ports) और ज्यादा कुशल जहाजरानी व्यवस्था ब्लू इकोनॉमी के लिए अहम है।
समुद्री पर्यटन (Marine Tourism) भी इस क्षेत्र की महत्वपूर्ण कड़ी है। तटीय इलाकों में इको-टूरिज्म (Eco Tourism), क्रूज टूरिज्म (Cruise Tourism) और वाटर स्पोर्ट्स (Water Sports) के जरिए आर्थिक गतिविधियों को बढ़ाया जा सकता है।
इसके अलावा समुद्री नवीकरणीय ऊर्जा (Marine Renewable Energy) भी ब्लू इकोनॉमी का हिस्सा है। समुद्र की लहरों, ज्वार-भाटा (Tidal Power) और तटीय पवन ऊर्जा (Offshore Wind Energy) से बिजली पैदा करने की संभावनाएं इसमें शामिल हैं।
समुद्र की गहराई में मौजूद संसाधनों की खोज और उनका इस्तेमाल भी इसका हिस्सा है। इसमें डीप-सी माइनिंग (Deep Sea Mining) और समुद्री बायोटेक्नोलॉजी (Marine Biotechnology) शामिल हैं। समुद्र में मौजूद पॉलीमेटेलिक नोड्यूल्स जैसे खनिजों के निष्कर्षण के साथ समुद्री जीवों से दवाइयां और दूसरी उपयोगी सामग्री तैयार करने की संभावनाएं भी हैं।
समुद्री अर्थव्यवस्था से कैसे अलग है ब्लू इकोनॉमी ?
ब्लू इकोनॉमी और पारंपरिक समुद्री अर्थव्यवस्था (Marine Economy) में सबसे बड़ा अंतर सततता का है। पारंपरिक समुद्री अर्थव्यवस्था में लंबे समय तक संसाधनों के इस्तेमाल और आर्थिक लाभ पर ज्यादा जोर दिया जाता था, जबकि पर्यावरण पर पड़ने वाले असर को उतना महत्व नहीं दिया जाता था।
इसके उदाहरण के तौर पर अत्यधिक मछली पकड़ना या समुद्र में तेल रिसाव जैसी गतिविधियों को देखा जा सकता है। वहीं ब्लू इकोनॉमी का मूल सिद्धांत है कि समुद्र से संसाधनों का इस्तेमाल इस तरह किया जाए कि समुद्री पारिस्थितिकी तंत्र को नुकसान न पहुंचे और वह खुद को दोबारा संतुलित कर सके।
भारत के लिए क्यों जरूरी है ब्लू इकोनॉमी ?
भारत के लिए ब्लू इकोनॉमी की अहमियत इसलिए भी ज्यादा है क्योंकि देश के पास लगभग 7516 किलोमीटर लंबी तटरेखा (Coastline) और 9 तटीय राज्य हैं। इसके अलावा भारत के पास 20 लाख वर्ग किलोमीटर से ज्यादा का विशेष आर्थिक क्षेत्र यानी एक्सक्लूसिव इकोनॉमिक जोन (Exclusive Economic Zone) है, जिसमें समुद्री संसाधनों की काफी संभावनाएं मौजूद हैं। भारतीयसमाचार विश्लेषण
समुद्र से करोड़ों लोगों की आजीविका भी सीधे या अप्रत्यक्ष रूप से जुड़ी हुई है। ऐसे में समुद्री संसाधनों का बेहतर और टिकाऊ इस्तेमाल रोजगार (Employment) और आर्थिक विकास के नए अवसर पैदा कर सकता है।
भारत ने गहरे समुद्र की संभावनाओं को समझने के लिए डीप ओशन मिशन (Deep Ocean Mission) भी शुरू किया है। इसका उद्देश्य गहरे समुद्र के रहस्यों और वहां मौजूद खनिज संसाधनों की खोज करना है।
ग्रीन और ब्लू इकोनॉमी का संबंध
जिस तरह ग्रीन इकोनॉमी (Green Economy) जमीन पर पर्यावरण के अनुकूल विकास और आर्थिक प्रगति की बात करती है, उसी तरह ब्लू इकोनॉमी समुद्र और तटीय क्षेत्रों के संरक्षण के साथ आर्थिक विकास को जोड़ती है। यही वजह है कि पीएम मोदी के ‘सप्तधारा’ विजन में ग्रीन और ब्लू इकोनॉमी को एक साथ महत्वपूर्ण स्थान दिया गया है। इसका लक्ष्य समुद्री संसाधनों का इस्तेमाल करके विकास को गति देना है, लेकिन समुद्र के पर्यावरण और आने वाली पीढ़ियों के हितों को नुकसान पहुंचाए बिना।
