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Bhadohi roadside delivery case: मुसहर समाज की महिला को भर्ती नहीं किया, अस्पताल के सामने हुई डिलीवरी, अब 4 डॉक्टर नपे

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Bhadohi roadside delivery case: उत्तर प्रदेश के भदोही में एक आदिवासी महिला को मजबूरी में अस्पताल के सामने बच्चे को जन्म देना पड़ा था. अब मामले में गंभीर लापरवाही का दोषी मानते हुए चार डॉक्टर और एक नर्स पर कार्रवाई की गई है. आरोप ये भी है कि कुछ अधिकारियों ने अस्पताल जाकर देखने के बजाय टेलीफोन पर ही मामले को निपटाया था.

महिला की पहचान 20 वर्षीय रानी के रूप में हुई है. (Bhadohi roadside delivery case) उनका आरोप है कि जाति की वजह से उन्हें हॉस्पिटल में एडमिट नहीं किया गया. रानी ने मीडिया से बात करते हुए बताया कि अस्पताल स्टाफ ने उनसे कहा, ‘तुम मुसहर (आदिवासी समुदाय) से हो इसलिए तुम्हें भर्ती नहीं करेंगे.’

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Bhadohi roadside delivery case: डिलीवरी के बाद घर जा रही थी महिला

रिपोर्टर महेश कुमार जायसवाल की रिपोर्ट के मुताबिक, 28 सितंबर को रानी महाराजा चेतसिंह सरकारी जिला अस्पताल में आई थीं. लेकिन डॉक्टर ने एनीमिया (खून की कमी) बताकर उन्हें एडमिट नहीं किया. कहा कि खून का इंतजाम नहीं हो पा रहा था. फिर उन्हें मिर्जापुर मंडलीय अस्पताल रेफर कर दिया गया.

परिवार के लोग रानी को लेकर मिर्जापुर गए. मगर वापस जिला अस्पताल लौट आए. अगले दिन यानी 29 सितंबर को उन्होंने हॉस्पिटल के सामने अन्य महिलाओं की मदद से बच्चे को जन्म दिया. इसके बाद वह रानी को घर लेकर जा रहे थे.

इसकी जानकारी चीफ मेडिकल ऑफिसर (CMO) संतोष कुमार चक तक पहुंची. उन्होंने तुरंत महिला को लाने के लिए एक एंबुलेंस भेजी, जिसके बाद रानी को हॉस्पिटल में भर्ती कराया गया. अब उनका इलाज चल रहा है. CMO ने बताया कि जांच रिपोर्ट में कॉन्ट्रैक्ट पर काम करने वाले डॉ पंकज कुमार की लापरवाही सामने आई है. वह इमरजेंसी सर्विस में तैनात थे. लेकिन उन्होंने मरीज को अटेंड नहीं किया. इस वजह से उन्हें नौकरी से हटा दिया गया है.

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अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई की सिफारिश

गायनेकोलॉजिस्ट डॉ. मुकेश प्रजापति की एक महीने की सैलरी रोक दी गई है. स्टाफ नर्स नीलम मौर्य का ट्रांसफर औराई कम्युनिटी हेल्थ सेंटर में कर दिया गया है. CMO ने बताया कि अस्पताल के चीफ मेडिकल सुपरिटेंडेंट (CMS) डॉ. अजय कुमार तिवारी और गायनेकोलॉजिस्ट डॉ. नीलिमा धवन के खिलाफ कार्रवाई की सिफारिश की गई है. वह घटना के समय ड्यूटी पर तैनात थे. बताया गया कि CMS और दूसरे अधिकारियों ने अस्पताल जाकर देखने के बजाय टेलीफोन पर ही मामले को निपटाया था.

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