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IAS Santosh Verma on High Court: नया बखेड़ा! ‘ब्राह्मण की बेटी’ वाले बयान के बाद अब IAS संतोष वर्मा ने हाईकोर्ट पर उठाए सवाल
Published
1 महीना agoon

IAS Santosh Verma on High Court: ब्राहमण की बेटी वाला बयान देने के बाद सुर्खियों में आए आईएएस संतोष वर्मा ने अब उच्च न्यायालय पर सवाल उठा दिये हैं। भोपाल में एक कार्यक्रम में पहुंचे आईएएस संतोष वर्मा ने कहा कि हमारे एससी-एसटी के बच्चे आईएएस और आईपीएस तो बन जाते हैं, लेकिन सिविल जज नहीं बन पाते हैं। उन्होंने सीधे निशाना साधते हुए कहा कि उच्च न्यायालय ऐसे बच्चों का सिविल जज बनने नहीं दे रहा है। (IAS Santosh Verma on High Court) उल्लेखनीय है कि आईएएस संतोष वर्मा इन दिनों अपने बयानों को लेकर चर्चा में हैं। एक दिन पहले भी उन्होंने विवादित बयान दे डाला था। उन्होंने कहा कि कितने संतोष वर्मा मारोगा, कितने जलाओगे। हर घर से एक संतोष वर्मा निकलेगा। आईएएस के इस बयान ने विवादों को फिर से हवा दे दी थी।
IAS Santosh Verma on High Court: SC ST समुदाय के बच्चों के साथ किया जा रहा भेदभाव
भोपाल के एक कार्यक्रम में बोलते हुए आईएएस संतोष वर्मा ने इस बार उच्च न्यायालय पर ही सवाल खड़े कर दिये। उन्होंने आरोप लगाते हुए कहा कि एससी और एसटी समुदाय के बच्चों के साथ भेदभाव किया जा रहा है। कटऑफ मार्क्स तक हमारे समुदाय के बच्चे पहुंच नहीं पा रहे। (IAS Santosh Verma on High Court) आईएएस संतोष वर्मा ने कहा कि अभी तक जो भी परीक्षाएं हुई हैं, उसमें एससी-एसटी समुदाय के बच्चों का चयन नहीं हुआ। योग्य उम्मीदवार ही नहीं मिले। लेकिन सिविल जज की ऐसी कौन सी परीक्षा है जहां हमारा बच्चा 40-50 फीसदी कटऑफ मार्क्स नहीं ला सकता। उस समुदाय के बच्चों के लिए 50 पर्सेट कटऑफ मार्क्स निर्धारित कर दिया गया है।
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आईएएस संतोष वर्मा ने कहा कि यह तय कर लिया गया है कि 50 फीसदी कटऑफ करके छात्र को 49.95 फीसदी देना है, 50 फीसदी नहीं देना है। (IAS Santosh Verma on High Court) साक्षात्कार में भी यह तय कर दिया गया कि 20 नहीं 19 नंबर ही देना है, ऐसे में हमारे बच्चों को कौन सिविल जज बना देगा? ये कौन सा आरक्षण है और कौन सा नियम है? यह सब उच्च न्यालय कर रहा है। जिससे सभी को न्याय की उम्मीद होती है। ये सब कुछ वहीं से हो रहा है।
