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Rahul Gandhi Defamation Case: ‘चोरों का सरदार’ बयान पर राहुल गांधी को सुप्रीम कोर्ट से बड़ी राहत, मानहानि केस की सुनवाई पर रोक

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Rahul Gandhi Defamation Case: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के खिलाफ कथित तौर पर ‘चोरों का सरदार’ और ‘कमांडर-इन-चीफ’ जैसी टिप्पणियां करने के मामले में कांग्रेस नेता और लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी को सुप्रीम कोर्ट से बड़ी राहत मिली है। (Rahul Gandhi Defamation Case) मंगलवार को सुप्रीम कोर्ट ने आपराधिक मानहानि मामले में निचली अदालत की कार्यवाही पर रोक लगा दी। कोर्ट ने राहुल गांधी की याचिका पर नोटिस जारी करते हुए मामले में आगे की सुनवाई स्थगित रखने का आदेश दिया।

जस्टिस विक्रम नाथ और जस्टिस अपरेश कुमार सिंह की पीठ ने राहुल गांधी की उस याचिका पर सुनवाई की, जिसमें उन्होंने अपने खिलाफ चल रहे मानहानि मामले को रद्द करने की मांग की है। राहुल गांधी की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता अभिषेक मनु सिंघवी पेश हुए।

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सुनवाई के दौरान सिंघवी ने दलील दी कि इस मामले में उठाए गए कानूनी सवाल पहले से ही सुप्रीम कोर्ट के समक्ष एक अन्य प्रकरण में विचाराधीन हैं। उन्होंने शशि थरूर से जुड़े एक तीसरे मामले का भी उल्लेख किया।

दलीलें सुनने के बाद सुप्रीम कोर्ट ने कहा, ‘नोटिस जारी किया जाए। इस बीच, ट्रायल कोर्ट के समक्ष आगे की कार्यवाही पर रोक रहेगी।’ इस आदेश से राहुल गांधी को फिलहाल राहत मिली है और निचली अदालत में उनके खिलाफ चल रही कार्यवाही आगे नहीं बढ़ सकेगी।

सुनवाई के दौरान जज ने पूछा- अखबार में नाम छपेगा या नहीं?

सुनवाई के दौरान जस्टिस विक्रम नाथ ने वरिष्ठ अधिवक्ता अभिषेक मनु सिंघवी से हिंदी में सवाल किया, ‘अखबार में नाम छपेगा या नहीं छपेगा?’ इस पर सिंघवी ने मुस्कुराते हुए जवाब दिया कि उन्होंने कुछ नहीं कहा है, बल्कि केवल अपना पक्ष अदालत के सामने रख रहे हैं।

इसके बाद जस्टिस नाथ ने पूछा कि क्या यहां कोई उनका विरोध नहीं कर रहा है। जवाब में सिंघवी ने एक अन्य मामले का जिक्र किया, जिसमें उन्हें अंतरिम राहत मिली थी और वरिष्ठ अधिवक्ता महेश जेठमलानी ने इसका विरोध किया था।

हालांकि, सुनवाई का मुख्य नतीजा राहुल गांधी की याचिका पर नोटिस जारी करना और ट्रायल कोर्ट की कार्यवाही पर रोक लगाना रहा।

क्या है राहुल गांधी के खिलाफ मानहानि का मामला?

यह मामला सितंबर 2018 में राजस्थान में एक सार्वजनिक रैली के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के खिलाफ राहुल गांधी की कथित टिप्पणियों से जुड़ा है। (Rahul Gandhi Defamation Case) उस समय राफेल लड़ाकू विमान सौदे को लेकर राजनीतिक विवाद चल रहा था। शिकायतकर्ता का आरोप है कि राहुल गांधी ने प्रधानमंत्री के लिए ‘चोरों का सरदार’ और ‘कमांडर-इन-थीफ’ जैसे शब्दों का इस्तेमाल किया था।

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भाजपा सदस्य महेश श्रीश्रीमल ने मुंबई की गिरगांव मजिस्ट्रेट अदालत में शिकायत दर्ज कराई थी। शिकायत में आरोप लगाया गया कि इन टिप्पणियों से प्रधानमंत्री की प्रतिष्ठा को नुकसान पहुंचा और इनके प्रभाव से भाजपा से जुड़े लोगों की मानहानि भी हुई।

मजिस्ट्रेट अदालत ने 28 अगस्त 2019 को राहुल गांधी के खिलाफ समन जारी करने की प्रक्रिया शुरू की थी। बाद में 2021 में समन मिलने के बाद राहुल गांधी ने बॉम्बे हाईकोर्ट का रुख किया और आपराधिक मानहानि की कार्यवाही रद्द करने की मांग की।

बॉम्बे हाईकोर्ट ने याचिका क्यों खारिज की थी?

8 सितंबर को बॉम्बे हाईकोर्ट ने राहुल गांधी की याचिका खारिज कर दी थी। (Rahul Gandhi Defamation Case) जस्टिस एन.आर. बोरकर ने कहा था कि मजिस्ट्रेट के आदेश में ऐसी स्पष्ट अवैधता या गंभीर खामी नहीं दिखती, जिसके आधार पर दंड प्रक्रिया संहिता (CrPC) की धारा 482 के तहत हस्तक्षेप किया जाए।

हाईकोर्ट ने यह भी कहा था कि राहुल गांधी की टिप्पणियां केवल प्रधानमंत्री तक सीमित थीं या उनसे भाजपा के सदस्यों और पदाधिकारियों की मानहानि भी हुई, इसका निर्धारण साक्ष्यों और बयान के संदर्भ के आधार पर किया जाना चाहिए। इस सवाल का अंतिम फैसला मुकदमे के दौरान किया जा सकता है।

हालांकि, हाईकोर्ट ने राहुल गांधी को मजिस्ट्रेट के समक्ष पेशी से छह सप्ताह की राहत दी थी, ताकि वह सुप्रीम कोर्ट में अपील कर सकें।

राहुल गांधी ने शिकायत की वैधता पर उठाए थे सवाल

राहुल गांधी की ओर से दलील दी गई थी कि शिकायतकर्ता महेश श्रीश्रीमल कथित टिप्पणी से सीधे तौर पर प्रभावित व्यक्ति नहीं हैं। ऐसे में उनके द्वारा आपराधिक मानहानि की शिकायत दर्ज कराना कानूनी रूप से उचित नहीं है।

राहुल गांधी के पक्ष ने यह भी कहा था कि टिप्पणी प्रधानमंत्री के संदर्भ में की गई थी, न कि भाजपा या ऐसे स्पष्ट रूप से पहचाने जा सकने वाले समूह के खिलाफ, जिसके किसी सदस्य को व्यक्तिगत रूप से मानहानि का दावा करने का अधिकार मिल सके।

दूसरी ओर, शिकायतकर्ता और राज्य सरकार ने दलील दी थी कि मजिस्ट्रेट के सामने पेश सामग्री प्रथम दृष्टया अपराध का मामला बनाती है और इस स्तर पर कार्यवाही रद्द करना उचित नहीं होगा।

अब आगे क्या होगा?

सुप्रीम कोर्ट के ताजा आदेश के बाद ट्रायल कोर्ट में इस मामले की आगे की कार्यवाही फिलहाल रुकी रहेगी। शीर्ष अदालत ने अभी राहुल गांधी के खिलाफ आरोपों की अंतिम वैधता पर फैसला नहीं सुनाया है। याचिका पर नोटिस जारी किया गया है और मामले का अंतिम निपटारा आगे की सुनवाई के बाद होगा।

इसलिए इसे राहुल गांधी के खिलाफ मानहानि मामले का अंतिम खात्मा नहीं, बल्कि निचली अदालत की कार्यवाही पर अंतरिम रोक के रूप में देखा जाना चाहिए।

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