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Rajya Sabha Chunav: राज्यसभा में विपक्ष को ‘क्लीन बोल्ड’ करने की तैयारी में BJP, कांग्रेस को लगेगा तगड़ा झटका

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Rajya Sabha Chunav: देश में होने वाले राज्यसभा चुनाव को लेकर राजनीतिक सरगर्मियां तेज हो गई हैं। इस बार 10 राज्यों की कुल 37 सीटों पर चुनाव होना है, लेकिन इनमें से केवल तीन राज्यों की 11 सीटों पर ही वास्तविक मतदान की स्थिति बन रही है। (Rajya Sabha Chunav) बाकी राज्यों में अधिकांश सीटों पर उम्मीदवारों का निर्विरोध चुना जाना लगभग तय माना जा रहा है। जिन राज्यों में मतदान होगा उनमें बिहार की पांच, ओडिशा की चार और हरियाणा की दो सीटें शामिल हैं। इन तीनों राज्यों में राजनीतिक दलों के बीच कड़ा मुकाबला देखने को मिल सकता है।

Rajya Sabha Chunav: ओडिशा में इस बार मुकाबला दिलचस्प

ओडिशा में इस बार मुकाबला दिलचस्प हो गया है। यहां भाजपा ने सत्तारूढ़ बीजू जनता दल (बीजद) की मुश्किलें बढ़ा दी हैं। राज्य में चार सीटों के लिए चुनाव हो रहा है। (Rajya Sabha Chunav) राजनीतिक समीकरणों के अनुसार भाजपा दो सीटें और बीजद एक सीट जीत सकती है, लेकिन चौथी सीट पर मुकाबला बेहद रोमांचक हो गया है। इस सीट के लिए भाजपा समर्थित निर्दलीय उम्मीदवार दिलीप रे और बीजद के उम्मीदवार दत्तेश्वर होता के बीच सीधी टक्कर मानी जा रही है।

इस चुनाव में जीत के लिए 30 वोटों की आवश्यकता है। भाजपा के पास अपने 79 विधायकों के साथ तीन निर्दलीय विधायकों का समर्थन भी है। ऐसे में भाजपा के दो उम्मीदवारों की जीत लगभग तय मानी जा रही है। इसके बाद तीसरे उम्मीदवार के लिए भाजपा के पास 22 वोट बचते हैं। इसलिए दिलीप राय को जीत के लिए अभी आठ और वोटों की जरूरत पड़ेगी। (Rajya Sabha Chunav) दूसरी ओर बीजद के पास 48 विधायक हैं और उसे दूसरी सीट जीतने के लिए 12 अतिरिक्त वोटों की आवश्यकता है। ऐसे में कांग्रेस के 14 और माकपा के एक विधायक का समर्थन बीजद के लिए निर्णायक साबित हो सकता है।

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बिहार में भी राज्यसभा चुनाव चर्चा में

वहीं बिहार में भी राज्यसभा चुनाव काफी चर्चा में है, क्योंकि यहां मुख्यमंत्री नीतीश कुमार खुद उम्मीदवार हैं। राज्य में पांच सीटों के लिए कुल छह उम्मीदवार मैदान में हैं, जिससे मुकाबला रोचक बन गया है। विधानसभा में एनडीए के पास कुल 202 विधायक हैं। राज्यसभा चुनाव में जीत के लिए 41 वोटों की जरूरत होती है। इस समीकरण के आधार पर भाजपा और जद (यू) के दो-दो उम्मीदवारों की जीत लगभग तय मानी जा रही है।

हालांकि एक सीट को लेकर मुकाबला कड़ा हो सकता है। एनडीए की ओर से उपेंद्र कुशवाहा और राजद उम्मीदवार अमरेंद्र धारी सिंह के बीच टक्कर की संभावना है। एनडीए को इस सीट के लिए तीन अतिरिक्त वोटों की जरूरत है, जबकि राजद को छह वोट और चाहिए। (Rajya Sabha Chunav) ऐसे में बहुजन समाज पार्टी के एक विधायक और एआईएमआईएम के पांच विधायकों के वोट काफी अहम माने जा रहे हैं।

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हरियाणा में कांग्रेस के लिए बड़ी चुनौती

उधर हरियाणा में भी चुनावी मुकाबला दिलचस्प होता जा रहा है। यहां दो सीटों के लिए मुकाबला है और इस बार भारतीय जनता पार्टी ने कांग्रेस के लिए चुनौती खड़ी कर दी है। भाजपा ने अपने उम्मीदवार संजय भाटिया को मैदान में उतारा है, जबकि कांग्रेस ने कर्मवीर बौद्ध को उम्मीदवार बनाया है। (Rajya Sabha Chunav) इसके अलावा निर्दलीय उम्मीदवार सतीश नांदल के मैदान में उतरने से मुकाबला और पेचीदा हो गया है। नांदल पहले भी कांग्रेस नेता भूपेंद्र हुडा के खिलाफ चुनाव लड़ चुके हैं। माना जा रहा है कि भाजपा उन्हें निर्दलीय उम्मीदवार के रूप में उतारकर कांग्रेस में सेंध लगाने की रणनीति अपना रही है।

हरियाणा विधानसभा में कांग्रेस के पास 37 विधायक हैं और उसके उम्मीदवार को जीतने के लिए 31 वोटों की जरूरत है। हालांकि पार्टी को क्रॉस वोटिंग का खतरा बना हुआ है। अगर ऐसा होता है तो कांग्रेस को 2016 और 2022 की तरह इस बार भी बड़ा झटका लग सकता है। इस कारण हरियाणा की दोनों सीटों पर भी राजनीतिक समीकरणों पर सभी की नजरें टिकी हुई हैं।

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