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Bihar Politics: बिहार राजनीति में महा-परिवर्तन! अब तेजस्वी और सुधाकर सिंह संभालेंगे RJDकी कमान,लालू-जगदा का दौर खत्म
Published
10 महीना agoon

Bihar Politics: बिहार विधानसभा चुनाव 2025 में करारी हार के बाद राष्ट्रीय जनता दल (राजद) के भीतर बड़े सांगठनिक बदलाव की तैयारी तेज हो गई है। पार्टी सूत्रों के अनुसार, नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव अब नए सिरे से रणनीति गढ़ने में जुट गए हैं और एक बार फिर “ए टू जेड” (A to Z) सामाजिक समीकरण को मजबूती देने की दिशा में कदम बढ़ा रहे हैं। हालांकि इस बार उनका तरीका पहले से अलग और ज्यादा संतुलित होगा। (Bihar Politics) माना जा रहा है कि एमवाई (मुस्लिम–यादव) वर्ग को संगठन में जिम्मेदारी तो दी जाएगी, लेकिन सभी फैसले सीमित दायरे में न होकर व्यापक प्रतिनिधित्व वाली समितियों के जरिए लिए जाएंगे, ताकि ए टू जेड वर्गों के बीच बेहतर तालमेल बनाया जा सके।
सूत्र बताते हैं कि पार्टी में हाल के दिनों में कुछ निषेधात्मक फैसलों के कारण तनाव और अविश्वास की स्थिति बनी है। तेजस्वी यादव इन हालात को सुधारने के लिए ऐसे निर्णय लेने की तैयारी में हैं, जिससे न सिर्फ संगठन में संतुलन आए, बल्कि परिवार और वरिष्ठ नेताओं के बीच चली आ रही नाराजगी भी कम हो सके। (Bihar Politics) विदेश दौरे से लौटने के बाद हुई समीक्षा बैठक में इसका संकेत भी साफ तौर पर देखने को मिला।
इस बैठक की खास बात यह रही कि भले ही अध्यक्षता तेजस्वी यादव ने की, लेकिन बैठक की ब्रीफिंग बक्सर से सांसद सुधाकर सिंह ने की। (Bihar Politics) इसे राजद के अंदर एक नए राजनीतिक समीकरण के तौर पर देखा जा रहा है। पार्टी के अंदर यह संदेश गया कि जिस तरह लालू प्रसाद यादव और जगदानंद सिंह की जोड़ी ने कभी राजद को मजबूत आधार दिया था, उसी तरह अब तेजस्वी यादव और सुधाकर सिंह की जोड़ी पार्टी को मौजूदा संकट से उबार सकती है। ऐसे संकेत मिल रहे हैं कि आने वाले समय में सुधाकर सिंह को संगठन में कोई बड़ी जिम्मेदारी सौंपी जा सकती है।
Bihar Politics: राजद में अहम पदों पर बदलाव की संभावना
राजद में प्रदेश अध्यक्ष सहित कई अहम पदों पर बदलाव की भी संभावना है। तेजस्वी यादव इस बार संगठन में अनुभव और युवाओं के संतुलन के जरिए मजबूती लाने की रणनीति पर काम कर रहे हैं। (Bihar Politics) उम्रदराज नेताओं को सलाहकार समिति में जगह देकर उनके अनुभव का लाभ लिया जा सकता है, जबकि प्रदेश नेतृत्व में युवाओं को प्रमुखता दी जाएगी। सामाजिक समीकरण के लिहाज से भी इस बार पार्टी सिर्फ एमवाई तक सीमित नहीं रहना चाहती। कुशवाहा और वैश्य वर्ग के साथ-साथ सवर्ण, दलित, कुर्मी और अतिपिछड़ा वर्ग को भी संगठन में प्रतिनिधित्व देने की योजना है।
इसके अलावा पार्टी कार्यालय को अनुशासन का केंद्र बनाने की तैयारी है। तेजस्वी यादव खुद ज्यादा समय कार्यालय में बिताएंगे और कार्यकर्ताओं से मिलने के लिए निश्चित समय तय किया जाएगा, ताकि जमीनी फीडबैक सीधे नेतृत्व तक पहुंचे। वहीं, पार्टी के भीतरघातियों के खिलाफ सख्त रुख अपनाया जाएगा। (Bihar Politics) विधानसभा क्षेत्रवार सूची तैयार कर ली गई है और आरोप सही पाए जाने पर ऐसे नेताओं को पार्टी से बाहर का रास्ता दिखाया जाएगा। इस तरह राजद नेतृत्व अब 2025 की हार से सबक लेकर नए सिरे से संगठन खड़ा करने की कोशिश में जुट गया है।
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