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Dhruv Rathee Defamation Case: ध्रुव राठी की बढ़ीं मुश्किलें, दिल्ली की साकेत कोर्ट ने फिर जारी किया जमानती वारंट
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36 सेकंड agoon

Dhruv Rathee Defamation Case: यूट्यूबर ध्रुव राठी की कानूनी मुश्किलें कम होने का नाम नहीं ले रही हैं। दिल्ली की साकेत कोर्ट ने 2018 के आपराधिक मानहानि मामले में 31 अक्टूबर को उनके खिलाफ एक बार फिर जमानती वारंट जारी किया है। यह इस मामले में 17 अक्टूबर के बाद अदालत की नई कार्रवाई है। शिकायतकर्ता विकास पांडे की ओर से दायर मामले में न्यायिक मजिस्ट्रेट राहुल जैन ने यह आदेश दिया है।
Dhruv Rathee Defamation Case: 17 अक्टूबर को भी जारी हुआ था वारंट
इससे पहले 17 अक्टूबर को अदालत ने ध्रुव राठी के खिलाफ जमानती वारंट जारी किया था। उस समय अदालत को बताया गया था कि समन तामील कराने पहुंचे प्रोसेस सर्वर को गुरुग्राम स्थित उनका आवास बंद मिला। इसके बाद अदालत ने गुरुग्राम के पते पर नए सिरे से समन भेजने की प्रक्रिया भी शुरू की थी।
31 अक्टूबर को अदालत ने फिर नया जमानती वारंट जारी कर दिया। इस मामले में शिकायतकर्ता की ओर से पेश वकील समक्ष शर्मा ने अदालत को बताया कि ध्रुव राठी आमतौर पर ऑस्ट्रिया में रहते हैं और दिल्ली में कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के विरोध प्रदर्शन में शामिल होने के लिए भारत आए थे।
क्या है 8 साल पुराना मानहानि मामला?
ध्रुव राठी के खिलाफ यह मामला साल 2018 में दाखिल किया गया था। शिकायतकर्ता विकास संस्कृत्यायन उर्फ विकास पांडे ने आरोप लगाया था कि ध्रुव राठी ने अपने यूट्यूब चैनल पर ‘BJP IT Cell Part II’ नाम से एक वीडियो अपलोड किया था।
शिकायत के मुताबिक, इस वीडियो में विकास पांडे को लेकर कथित तौर पर भ्रामक और मानहानिकारक आरोप लगाए गए थे। वीडियो में आरोप लगाया गया था कि भाजपा के आईटी सेल ने उन्हें ध्रुव राठी के खिलाफ प्रचार करने के लिए पैसे देने की कोशिश की थी।
इस वीडियो को उस समय दिल्ली के तत्कालीन मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने भी सोशल मीडिया पर साझा किया था। इसके बाद विकास पांडे ने ध्रुव राठी और अरविंद केजरीवाल के खिलाफ मानहानि की कानूनी कार्रवाई शुरू की थी।
2019 से चल रही है कानूनी प्रक्रिया
अदालत के रिकॉर्ड के मुताबिक, ध्रुव राठी को पहली बार जुलाई 2019 में समन जारी किया गया था। हालांकि, विदेश में रहने और समन की तामील में आ रही दिक्कतों के कारण मामले की सुनवाई लंबे समय तक आगे नहीं बढ़ सकी।
अक्टूबर 2026 में शिकायतकर्ता की ओर से जल्द सुनवाई और समन की तामील के लिए आवेदन किया गया। इसके बाद अदालत ने अक्टूबर में नए समन और फिर जमानती वारंट जारी किए।
क्या जमानती वारंट का मतलब गिरफ्तारी तय है?
नहीं। जमानती वारंट का उद्देश्य संबंधित व्यक्ति की अदालत में उपस्थिति सुनिश्चित करना है। इसमें निर्धारित शर्तों पर जमानत पाने का विकल्प रहता है। यह वारंट अपने आप में ध्रुव राठी को मानहानि का दोषी साबित नहीं करता। 31 अक्टूबर की ताजा रिपोर्टों के मुताबिक, अदालत के विस्तृत आदेश का इंतजार है।
