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Nagpur MLC Election: जहां RSS का दबदबा, वहां कांग्रेस का कब्जा! नागपुर के नतीजे ने क्यों बढ़ाई सियासी हलचल?
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4 घंटे agoon

Nagpur MLC Election: राजनीति में किले मजबूत होने के दावे तो खूब होते हैं, लेकिन चुनावी नतीजे कभी-कभी इन दावों की दोबारा परीक्षा ले लेते हैं। महाराष्ट्र (Maharashtra) की नागपुर स्नातक विधान परिषद सीट (Nagpur Graduate MLC Seat) पर कांग्रेस (Congress) की जीत ने एक बार फिर इसी सवाल को चर्चा में ला दिया है। यह वही नागपुर है, जिसे मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस (Devendra Fadnavis) का गृहक्षेत्र, केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी (Nitin Gadkari) की कर्मभूमि और राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) का गढ़ माना जाता है। यहां कांग्रेस उम्मीदवार अभिजीत वंजारी (Abhijit Vanjari) ने लगातार दूसरी बार जीत दर्ज कर राजनीतिक चर्चा तेज कर दी है।
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चार राज्यों की 28 विधान परिषद सीटों (Legislative Council Seats) पर हुए चुनाव में कांग्रेस ने 12 उम्मीदवार मैदान में उतारे थे, लेकिन पार्टी को केवल नागपुर में जीत मिली। ऐसे में यह नतीजा कांग्रेस के लिए खास महत्व रखता है। वहीं, नागपुर में मिली हार के बाद भारतीय जनता पार्टी (BJP) के लिए विदर्भ (Vidarbha) क्षेत्र में अपनी राजनीतिक स्थिति की समीक्षा का सवाल भी उठता है।
Nagpur MLC Election: दूसरी बार नागपुर स्नातक सीट पर वंजारी का कब्जा
अभिजीत वंजारी ने साल 2020 के चुनाव में भी नागपुर स्नातक निर्वाचन क्षेत्र (Nagpur Graduate Constituency) से जीत हासिल की थी। अब दूसरी बार जीत दर्ज कर उन्होंने इस सीट पर अपनी राजनीतिक पकड़ बनाए रखी है। स्नातक निर्वाचन क्षेत्र में मतदाताओं के बीच उनकी सक्रियता और छात्रों व युवाओं से जुड़े मुद्दों पर काम को उनकी जीत की वजहों में गिना जा रहा है।
वंजारी ने जीत के बाद कहा कि छह साल पहले जब वह पहली बार इस निर्वाचन क्षेत्र से चुने गए थे, तब स्नातकों के हितों के लिए अपेक्षित काम नहीं हुआ था। उन्होंने अपने कार्यकाल में स्नातकों, युवाओं और छात्रों के साथ संवाद करने तथा अलग-अलग कार्यक्रमों के जरिए उनकी समस्याओं को उठाने की कोशिश की। उनके मुताबिक, इस काम का फायदा उन्हें चुनाव में मिला और मतदाताओं ने उन्हें दोबारा मौका दिया।
राजनीतिक परिवार से आते हैं अभिजीत वंजारी
अभिजीत वंजारी का संबंध नागपुर के राजनीतिक परिवार (Political Family) से है। उनके पिता गोविंदराव मारोतराव वंजारी दक्षिण नागपुर (South Nagpur) से दो बार विधायक रह चुके हैं। पिता की राजनीतिक पृष्ठभूमि से प्रेरित होकर अभिजीत ने भी राजनीति में कदम रखा।
उन्होंने राष्ट्रसंत तुकड़ोजी महाराज नागपुर विश्वविद्यालय से स्नातक की पढ़ाई की और इसके बाद कानून की डिग्री हासिल की। वह नागपुर विश्वविद्यालय की सीनेट (Senate) और प्रबंधन परिषद (Management Council) के सदस्य भी रह चुके हैं।
छात्र राजनीति से अपने राजनीतिक सफर की शुरुआत करने वाले वंजारी कांग्रेस के छात्र संगठन नेशनल स्टूडेंट्स यूनियन ऑफ इंडिया (NSUI) की महाराष्ट्र इकाई में महासचिव रहे हैं। इसके बाद उन्होंने महाराष्ट्र प्रदेश युवा कांग्रेस (Maharashtra Pradesh Youth Congress) में सचिव की जिम्मेदारी संभाली। वह उत्तर प्रदेश और बिहार के लिए कांग्रेस के चुनाव पर्यवेक्षक (Election Observer) के तौर पर भी काम कर चुके हैं।
‘नागपुर अब BJP का गढ़ नहीं, कांग्रेस का रहेगा’
जीत के बाद अभिजीत वंजारी ने नागपुर को लेकर बड़ा राजनीतिक दावा किया। उन्होंने कहा कि यह इलाका अब भाजपा का गढ़ नहीं रहा, बल्कि कांग्रेस का गढ़ बना रहेगा। वंजारी ने इस परिणाम को युवाओं के बीच कांग्रेस से जुड़ाव बढ़ने के संकेत के तौर पर भी पेश किया।
हालांकि, नागपुर स्नातक सीट का नतीजा एक निर्वाचन क्षेत्र के मतदाताओं के रुझान को दिखाता है। इसे पूरे महाराष्ट्र या देश के युवाओं की राजनीतिक पसंद का निर्णायक प्रमाण मानने के लिए व्यापक चुनावी आंकड़ों की जरूरत होगी।
राहुल गांधी की तारीफ में क्या बोले वंजारी?
अभिजीत वंजारी ने अपनी जीत के संदर्भ में कांग्रेस नेता राहुल गांधी (Rahul Gandhi) के प्रयासों का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी ने पिछले कई वर्षों में छात्रों के साथ संवाद के कार्यक्रमों के जरिए उनकी समस्याओं को समझने और उन्हें पार्टी से जोड़ने की कोशिश की है।
वंजारी के मुताबिक, राहुल गांधी के इन प्रयासों का लाभ भी चुनाव में मिला। उनका मानना है कि युवा मतदाता कांग्रेस की ओर आकर्षित हो रहे हैं और नागपुर का नतीजा इसी बदलाव का संकेत है।
कुल मिलाकर, नागपुर स्नातक MLC सीट पर कांग्रेस की जीत ने महाराष्ट्र की राजनीति में एक नई चर्चा को जन्म दिया है। भाजपा और RSS के प्रभाव वाले माने जाने वाले क्षेत्र में अभिजीत वंजारी की लगातार दूसरी जीत को कांग्रेस अपनी राजनीतिक उपलब्धि के रूप में देख रही है। हालांकि, इस एक सीट के परिणाम से पूरे विदर्भ या महाराष्ट्र में राजनीतिक समीकरण बदलने का निष्कर्ष निकालना जल्दबाजी होगी।
