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Strait of Hormuz: भारत पर पड़ सकता है बड़ा असर! ट्रंप के 20% टोल प्लान से तेल आयात होगा महंगा?
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4 घंटे agoon

Strait of Hormuz: अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के एक नए प्रस्ताव ने दुनिया के कई देशों की चिंता बढ़ा दी है। ट्रंप ने कहा है कि अमेरिका स्ट्रेट ऑफ होर्मुज (Strait of Hormuz) की सुरक्षा करेगा और इस समुद्री मार्ग से गुजरने वाले मालवाहक जहाजों से 20 प्रतिशत शुल्क (टोल) लिया जाएगा। हालांकि यह प्रस्ताव अभी लागू नहीं हुआ है और इसके कानूनी पहलुओं पर भी सवाल उठ रहे हैं, लेकिन यदि ऐसा होता है तो भारत जैसे देशों पर इसका सीधा असर पड़ सकता है। समयऔर कैलेंडर
Strait of Hormuz: क्या है स्ट्रेट ऑफ होर्मुज और क्यों है इतना महत्वपूर्ण?
स्ट्रेट ऑफ होर्मुज ईरान और ओमान के बीच स्थित एक संकरा समुद्री रास्ता है, जो फारस की खाड़ी को अरब सागर से जोड़ता है। इसे दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण ऊर्जा मार्गों में गिना जाता है। दुनिया के कुल कच्चे तेल का लगभग 20 प्रतिशत और बड़ी मात्रा में एलएनजी (प्राकृतिक गैस) इसी रास्ते से होकर गुजरती है। भारत के लिए भी यह मार्ग बेहद अहम है क्योंकि देश अपनी जरूरत का अधिकांश कच्चा तेल सऊदी अरब, इराक, यूएई, कुवैत और कतर जैसे देशों से इसी रास्ते के जरिए मंगाता है।
भारत पर क्या होगा असर?
भारत अपनी कुल जरूरत का 85 प्रतिशत से अधिक कच्चा तेल विदेशों से आयात करता है। इनमें से बड़ी मात्रा स्ट्रेट ऑफ होर्मुज के रास्ते आती है। ऐसे में यदि इस मार्ग पर अतिरिक्त शुल्क लगाया जाता है या सुरक्षा कारणों से जहाजों की आवाजाही प्रभावित होती है, तो भारत का आयात खर्च बढ़ सकता है। पिछले कुछ महीनों में इस क्षेत्र में जहाजों पर हमले, सुरक्षा खतरे और तनाव बढ़ने से पहले ही समुद्री बीमा और माल ढुलाई का खर्च बढ़ चुका है। यदि नया शुल्क भी लागू होता है तो भारतीय तेल कंपनियों को अधिक कीमत चुकानी पड़ सकती है।
क्या बढ़ सकती हैं पेट्रोल-डीजल की कीमतें?
विशेषज्ञों का मानना है कि अगर तेल आयात महंगा होता है तो उसका असर धीरे-धीरे घरेलू बाजार पर भी दिखाई दे सकता है। इससे पेट्रोल, डीजल और अन्य ईंधन की कीमतों पर दबाव बढ़ सकता है। साथ ही एलएनजी आयात महंगा होने से गैस आधारित उद्योगों और उपभोक्ताओं पर भी असर पड़ने की संभावना है।
फिलहाल क्या स्थिति है?
-अभी ट्रंप का यह प्रस्ताव केवल घोषणा के स्तर पर है। इसे लागू करने के लिए कई अंतरराष्ट्रीय कानूनी और कूटनीतिक प्रक्रियाओं से गुजरना होगा। इसलिए फिलहाल भारत को तुरंत किसी अतिरिक्त शुल्क का भुगतान नहीं करना पड़ रहा है। हालांकि, पश्चिम एशिया में बढ़ता तनाव और इस महत्वपूर्ण समुद्री मार्ग की सुरक्षा आने वाले समय में वैश्विक तेल बाजार और भारत की ऊर्जा लागत को प्रभावित कर सकती है।
