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Jadavpur University Controversy: ‘आजादी’ के नारे लगाने वालों पर भड़के शुभेंदु अधिकारी, बोले- अब या तो वे रहेंगे या हम
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4 घंटे agoon

Jadavpur University Controversy: पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी (Shubhendu Adhikari) ने शुक्रवार को ‘आजादी’ के नारे लगाने वालों पर निशाना साधा। उन्होंने कहा कि अब या तो वे रहेंगे या हम रहेंगे। रक्षाबंधन (Raksha Bandhan) के मौके पर शुभेंदु अधिकारी के कार्यक्रम की वजह से जादवपुर पुलिस स्टेशन से सुलेखा तक की सड़क पूरी तरह जाम रही।
शुभेंदु अधिकारी ने जादवपुर विश्वविद्यालय (Jadavpur University) की दीवारों पर लिखे नारों और भित्तिचित्रों को लेकर भी सवाल उठाए। उन्होंने 2011 में पुलिस मुठभेड़ में मारे गए माओवादी नेता किशनजी (Kishenji) के सम्मान में बनाए गए ‘लाल सलाम किशनजी’ भित्तिचित्र पर सवाल खड़े किए।
Jadavpur University Controversy: एबीवीपी से बोले- इन्हें सबक सिखाओ
शुभेंदु अधिकारी का कार्यक्रम जादवपुर विश्वविद्यालय के गेट नंबर 2 के पास आयोजित किया गया था। करीब एक सप्ताह पहले ही विश्वविद्यालय में अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (एबीवीपी) के छात्रों ने तोड़फोड़ की थी। इस घटना का जिक्र करते हुए अधिकारी ने कहा कि कुछ लोगों का कहना है कि यह सब करने वाले शुभेंदु अधिकारी के लोग थे। उन्होंने इसे बदनाम करने की साजिश बताया।
शुभेंदु अधिकारी ने एबीवीपी (ABVP) के छात्रों से कहा कि जिस तरह जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय (जेएनयू) में राष्ट्रवाद का सबक सिखाया गया है, उसी तरह जादवपुर विश्वविद्यालय में भी इसकी जरूरत है। उन्होंने कहा कि वे कोई भी हों, हमसे छिप नहीं पाएंगे। अब या तो वे रहेंगे या हम रहेंगे। हमारे बीच में कुछ भी नहीं बचेगा।
‘तुम्हें कौन सी आजादी चाहिए’
शुभेंदु अधिकारी ने ‘आजादी’ के नारे लगाने वालों पर तीखा हमला करते हुए कहा कि ये लोग ढीठ हैं। उन्होंने सवाल किया कि आखिर उन्हें कौन सी आजादी चाहिए। क्या गांजा पीने की आजादी चाहिए या फिर कैंपस में ड्रग्स लेने की आजादी चाहिए।
उन्होंने कहा कि कश्मीर (Kashmir) में आजादी के लिए नारे लगाए जाते हैं। उन्होंने ऐसे लोगों को ‘टुकड़े-टुकड़े गैंग’ से जोड़ते हुए सवाल किया कि आखिर इन लोगों को किस तरह की आजादी चाहिए। शुभेंदु अधिकारी ने जादवपुर विश्वविद्यालय के शिक्षकों को भी चेतावनी दी। उन्होंने कहा कि उन पर भी नजर रखी जा रही है।
‘घर के कचरे की तरह साफ कर देना चाहिए’
शुभेंदु अधिकारी ने देश को भीतर से बांटने की कथित साजिश करने वालों पर भी निशाना साधा। उन्होंने कहा कि ऐसे तत्वों को ‘घर के कचरे की तरह साफ’ कर देना चाहिए।
उन्होंने कहा कि सशस्त्र बल (Armed Forces) भारत के बाहरी दुश्मनों से निपटेंगे, लेकिन देश के भीतर भी कुछ लोग ऐसे हैं जो देश के हितों के खिलाफ काम कर रहे हैं।
उन्होंने कहा कि देश के बाहर जो दुश्मन हैं, उन्हें भारत की ताकत दिखाई जा चुकी है और आगे भी दिखाई जाएगी। लेकिन देश के भीतर से देशभक्ति (Patriotism), राष्ट्रवाद (Nationalism), वंदे मातरम (Vande Mataram) और जन गण मन (Jana Gana Mana) पर हमला करने वालों के खिलाफ भी सख्त रुख अपनाना होगा।
‘आजादी’ के नारों पर बोले- मुझे पीड़ा होती है
शुभेंदु अधिकारी ने कहा कि जब वह कोलकाता की सड़कों पर ‘आजादी’ के नारे देखते हैं तो उन्हें पीड़ा होती है। उन्होंने सवाल किया कि यह आजादी किसलिए है।
उन्होंने भारत के स्वतंत्रता संग्राम (Freedom Struggle) में दिए गए बलिदानों को याद करने की बात कही। अधिकारी ने कहा कि हमें स्वतंत्रता सेनानियों के बलिदान, नेताजी सुभाष चंद्र बोस के संघर्ष और मातंगिनी हाजरा के बलिदान को याद करना चाहिए। उन्होंने कहा कि भारत 1947 में आजाद हुआ था।
दीवारों पर लिखे नारों पर उठाए सवाल
शुभेंदु अधिकारी ने जादवपुर विश्वविद्यालय और कोलकाता की सड़कों पर कश्मीर से जुड़े नारों को लेकर भी सवाल उठाए। उन्होंने पूछा कि कश्मीर को लेकर पाकिस्तान के साथ भारत के कई युद्ध और लंबे संघर्ष हुए हैं, फिर कोलकाता की सड़कों पर ‘कश्मीर मांगे आजादी’ क्यों लिखा जाएगा। उन्होंने कहा कि जादवपुर विश्वविद्यालय उत्कृष्टता का केंद्र है और ऐसे नारों को देखकर उन्हें दुख होता है।
अधिकारी ने विश्वविद्यालय के कला विभाग की दीवारों पर लिखे ‘लाल सलाम किशनजी’ (Lal Salam Kishenji) भित्तिचित्र का भी जिक्र किया। उन्होंने सवाल किया कि नई पीढ़ी को आखिर क्या सिखाया जा रहा है।
‘लाल सलाम किशनजी’ पर भी सवाल
शुभेंदु अधिकारी ने कहा कि जादवपुर की दीवारों पर ‘लाल सलाम किशनजी’ लिखा देखकर उन्हें दुख होता है। उन्होंने सवाल किया कि किशनजी कौन था। उन्होंने आरोप लगाया कि किशनजी ने देश के विभाजन की मांग की थी और संविधान को स्वीकार नहीं किया था।
किशनजी के नाम से चर्चित कोटेश्वर राव (Koteswara Rao) वरिष्ठ माओवादी नेता था। नवंबर 2011 में पुलिस के साथ मुठभेड़ में उसकी मौत हो गई थी। यह घटना पश्चिम बंगाल में ममता बनर्जी (Mamata Banerjee) के नेतृत्व वाली तृणमूल कांग्रेस सरकार के सत्ता में आने के कुछ महीने बाद हुई थी।
‘आजादी’ का नारा लगाने पर गिरफ्तारी की चेतावनी
शुभेंदु अधिकारी ने इससे एक दिन पहले गुरुवार को आयोजित एक कार्यक्रम में भी ‘आजादी’ के नारों को लेकर चेतावनी दी थी। उन्होंने कहा था कि ‘इंकलाब जिंदाबाद’ कहा जा सकता है, लेकिन अगर ‘आजादी’ कहा जाएगा तो मामला दर्ज होगा। उन्होंने कहा था कि अगर कोई ‘कश्मीर मांगे आजादी’ का नारा लगाएगा तो उसकी गिरफ्तारी होगी।
उन्होंने विपक्ष की ओर से वंदे मातरम के पूर्ण संस्करण के विरोध पर भी सवाल उठाया। शुभेंदु अधिकारी ने कहा कि वंदे मातरम किसी राजनीतिक नेता ने नहीं लिखा था, बल्कि इसे बंकिम चंद्र चट्टोपाध्याय (Bankim Chandra Chattopadhyay) ने लिखा था। उन्होंने सवाल किया कि इसके पूर्ण संस्करण को लेकर आपत्ति क्या है।
बंगाल की सांस्कृतिक विरासत का भी किया जिक्र
शुभेंदु अधिकारी ने पश्चिम बंगाल (West Bengal) की आध्यात्मिक और सांस्कृतिक विरासत का भी जिक्र किया। उन्होंने श्री चैतन्य (Sri Chaitanya), रामकृष्ण परमहंस (Ramakrishna Paramahamsa) और रानी रासमणि (Rani Rashmoni) का नाम लिया।
उन्होंने कहा कि पश्चिम बंगाल सरकार उस संस्कृति को फिर से बहाल करने का प्रयास कर रही है, जिसे बंगाल ने खो दिया है। इसी दौरान उन्होंने यह भी घोषणा की कि पश्चिम बंगाल के सभी स्कूलों और कॉलेजों में राष्ट्रीय कैडेट कोर (एनसीसी) शुरू करने के प्रयास किए जा रहे हैं।
शुभेंदु अधिकारी के इस बयान के बाद जादवपुर विश्वविद्यालय में ‘आजादी’ के नारों, कश्मीर से जुड़े नारों और ‘लाल सलाम किशनजी’ भित्तिचित्र को लेकर उनकी आपत्तियां एक बार फिर सामने आई हैं। उन्होंने राष्ट्रवाद और देशभक्ति के मुद्दे पर अपने रुख को स्पष्ट करते हुए ऐसे नारों और गतिविधियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की बात कही है।
